संसद में बजट पेश होते ही शेयर बाज़ार में ख़ून ख़राब मच गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए। सेंसेक्स 1546.84 अंक गिरकर 80722.94 पर यानी करीब 1.88% नीचे बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 495.20 अंक टूटकर 24825.45 पर आ गया। यानी 1.96% की गिरावट आई। यह छह साल में बजट के दिन सबसे बुरी गिरावट है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी 2-3% तक गिरे। बैंकिंग, मेटल, सरकारी बैंक, रेलवे जैसे कई सेक्टरों के स्टॉक्स में भारी बिकवाली हुई।

इससे पहले दिन की शुरुआत अच्छी हुई थी, सुबह सेंसेक्स 450 अंक से ज्यादा ऊपर चढ़ गया था, लेकिन बजट भाषण के बाद भारी बिकवाली शुरू हो गई। यानी सीधे-सीधे कहें तो शेयर बाज़ार ने बजट को खारिज कर दिया। दरअसल, 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट 2026-27 पेश किया। यह बजट रविवार को पेश हुआ और बाजार के लिए स्पेशल ट्रेडिंग सेशन रखा गया था। लेकिन बजट भाषण खत्म होते ही शेयर बाजार में भारी गिरावट आ गई।
बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ किया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा, रेयर अर्थ और एमएसएमई को सपोर्ट मिला है। फिस्कल डिसिप्लिन बरकरार है, फिस्कल डेफिसिट 4.5% से नीचे लाने का लक्ष्य है। लेकिन बाजार के जानकारों का कहना है कि बाजार की यह गिरावट मुख्य रूप से तीन कारणों से हुई है।

फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर STT में भारी बढ़ोतरी

सरकार ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स यानी एसटीटी को काफी बढ़ा दिया। इससे इस सेगमेंट में आक्रामक बिकवाली हुई, क्योंकि ट्रेडिंग वॉल्यूम का बड़ा हिस्सा इसी से आता है। ट्रेडर्स ने इसे ज्यादा सट्टेबाजी रोकने का कदम बताया, लेकिन तुरंत असर गिरावट के रूप में दिखा। इससे पीएसयू बैंक, मेटल और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टर पर दबाव बढ़ा। 

शेयर बाज़ार का क्या हाल था, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि निवेशकों की घबराहट को दिखाने वाला इंडिया VIX यानी वॉलेटिलिटी इंडेक्स भी 15% उछल गया।

कैपिटल गेंस टैक्स में कोई राहत नहीं

बाजार को उम्मीद थी कि कैपिटल गेंस टैक्स यानी शेयर बेचने पर लगने वाले टैक्स में कुछ छूट मिलेगी, लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं हुआ। इससे निवेशकों को निराशा हुई और बिकवाली बढ़ गई।

कर्ज लेने की सरकार की बड़ी योजना

बजट में वित्त वर्ष 27 के लिए सरकार ने 17.2 लाख करोड़ रुपये का उधार लेने का प्लान रखा। इतना बड़ा उधार लेने से बॉन्ड यील्ड बढ़ सकती है, जिसका असर बैंकों पर पड़ता है क्योंकि उनके बॉन्ड पोर्टफोलियो में नुकसान होता है। इससे बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक पर दबाव बढ़ा।

बाजार विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के विनोद नायर ने मनीकंट्रोल से कहा कि बजट ग्रोथ और स्थिरता का बैलेंस बनाता है। टैक्स में बड़े बदलाव नहीं होने से बाजार की उम्मीदें कम थीं। एसटीटी बढ़ोतरी से तुरंत नकारात्मक असर पड़ा, लेकिन लंबे समय में अच्छा है। जेएम फाइनेंशियल के विशाल कंपानी ने कहा कि एसटीटी बढ़ोतरी सट्टेबाजी कम करने के लिए है, जो बाजार को स्थिर बनाएगा। कैपेक्स, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस से लंबे समय में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा।

रिपोर्ट के अनुसार जियोजित के वीके विजयकुमार ने कहा कि कैपिटल गेंस टैक्स में राहत न मिलना निराशाजनक है, लेकिन मीडियम-लॉन्ग टर्म में अच्छा बजट है। नॉमिनल जीडीपी 10% बढ़ सकता है, जिससे कमाई 15% तक बढ़ेगी। बोनांजा के अभिनव तिवारी ने कहा कि यह गिरावट शॉर्ट-टर्म रिएक्शन है। कैपेक्स 12.2 लाख करोड़ तक बढ़ा है, इंफ्रा, डिफेंस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और फार्मा जैसे सेक्टर फायदे में रहेंगे।

कुल मिलाकर बजट के दिन की गिरावट की बड़ी वजह एसटीटी बढ़ोतरी और उम्मीदों पर खरा न उतरना बनी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बजट के प्रावधानों को अच्छे से लागू किया गया तो इंफ्रा, डिफेंस, रेलवे, सेमीकंडक्टर और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर मीडियम टर्म में फायदे में रहेंगे।
सेमीकंडक्टर, डिफेंस, एमएसएमई, हाई-स्पीड रेल, मेडिकल टूरिज्म जैसे सेक्टर में ऐलान हुए। लेकिन बाजार को तुरंत फायदा दिखाई नहीं दिया। निवेशक ज्यादा टैक्स राहत या विदेशी निवेश बढ़ाने वाले बड़े कदम चाहते थे। एसटीटी बढ़ने से ब्रोकरेज, ट्रेडिंग कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा गिरे। रेलवे स्टॉक्स भी टूटे, भले ही बजट में रेल पर अच्छे ऐलान थे।

क्या यह गिरावट लंबी चलेगी?

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह ज्यादातर तुरंत की प्रतिक्रिया है। एसटीटी सिर्फ फ्यूचर एंड ऑपशंस पर है, इक्विटी पर नहीं। बाजार धीरे-धीरे एडजस्ट हो जाएगा। लंबे समय में कैपेक्स बढ़ने से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, जो शेयर बाजार के लिए अच्छा है। लेकिन अगले कुछ दिनों में उतार-चढ़ाव रह सकता है।