ट्रंप प्रशासन के टैरिफ़ वाले क़दम से तमिलनाडु में लगभग 30 लाख नौकरियों के जोखिम में होने की आशंका जताई गई है। तमिलनाडु सरकार ने केंद्र को क्या चेतावनी दी?
भारत में टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री संकट में?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ से भारत के निर्यात पर तो बड़ा असर पड़ ही रहा है, अब बड़े पैमाने पर नौकरियाँ जाने की आशंका है। तमिलनाडु ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो राज्य में 30 लाख नौकरियाँ तुरंत ख़तरे में पड़ सकती हैं। यह बात तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई प्री-बजट बैठक में कही।
तमिलनाडु ने शनिवार को हुई इस बैठक में केंद्र से मिलने वाली फंडिंग में देरी, जीएसटी से राजस्व घाटा और अमेरिकी टैरिफ से होने वाला नुकसान जैसे कई मुद्दों पर विस्तार से बात की। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बैठक के दौरान थेन्नारासु ने छोटे और मध्यम उद्योगों पर संकट के बादल मंडराने और इनके बंद होने की बात कही। उन्होंने कहा कि इनके बंद होने से बड़ी संख्या में नौकरियाँ जाएँगी।
टेक्सटाइल सेक्टर पर सबसे बड़ा ख़तरा
तमिलनाडु का निर्यात बहुत हद तक अमेरिका पर निर्भर है। राज्य के कुल सामान निर्यात का 31% अमेरिका जाता है। खासकर टेक्सटाइल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित है। तमिलनाडु भारत के कुल टेक्सटाइल निर्यात का 28% करता है और यहाँ 75 लाख से ज्यादा लोग इस सेक्टर में काम करते हैं।
अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार थेन्नारासु ने कहा, 'ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ़ से हमारे निर्यात पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। अगर यही हाल रहा तो 30 लाख नौकरियाँ तुरंत खतरे में आ सकती हैं। कई छोटे-मध्यम उद्योग यानी एमएसएमई बंद होने की कगार पर हैं।' उन्होंने केंद्र से टेक्सटाइल सेक्टर के लिए विशेष पैकेज मांगा, जिसमें ब्याज पर सब्सिडी, सामान्य सब्सिडी, निर्यात प्रोत्साहन और टैक्स राहत शामिल हो।
तमिलनाडु के तिरुपुर, कोयंबटूर और इरोड जैसे शहर टेक्सटाइल हब हैं। यहां से अमेरिका को कपड़े, होम टेक्सटाइल और गारमेंट्स जाते हैं। टैरिफ़ बढ़ने से ऑर्डर रुक गए हैं, क़ीमतें कम करनी पड़ रही हैं और कामगारों की छँटनी हो रही है।
ट्रंप का टैरिफ़
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में भारत पर 50% तक टैरिफ लगाए हैं। ये दो तरीक़े से लगाए गए हैं। एक तो 25% का जवाबी टैरिफ़ है और दूसरा रूस से तेल खरीदने के लिए दंड के रूप में 25% का अतिरिक्त टैरिफ़। इन टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना और रूस पर दबाव बनाना है, लेकिन इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, हालाँकि भारत की मज़बूत घरेलू मांग और सरकारी सुधारों ने इसे कुछ हद तक संभालने की कोशिश की है।
निर्यात पर असर
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और यह सालाना करीब 80-90 बिलियन डॉलर है। टैरिफ के बाद मई-अक्टूबर 2025 में अमेरिका को निर्यात में 28.5% की गिरावट आई है। व्यापार घाटा बढ़कर 32.15 बिलियन डॉलर हो गया। टैरिफ से जीडीपी ग्रोथ पर भी असर पड़ने की संभावना जताई गई है। कई रिपोर्टों में कहा गया है कि इससे 0.2-0.5% का असर पड़ा है। लेकिन 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है। यह सरकारी खर्च, उपभोक्ता करों में कटौती और श्रम सुधारों से संभव हो सकता है। वैश्विक स्तर पर टैरिफ से अनिश्चितता बढ़ी, जिससे निवेश प्रभावित हुआ, लेकिन कहा जा रहा है कि भारत की घरेलू मांग मज़बूत है।
कौन से सेक्टर प्रभावित हैं?
स्टील, एल्यूमिनियम, टेक्सटाइल्स, गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटोमोटिव, फार्मा, लेदर, फुटवेयर, हैंडीक्राफ्ट्स और सीफूड सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
नौकरियों पर असर
टेक्सटाइल्स, गारमेंट्स जैसे ज़्यादातर श्रमों पर निर्भर उद्योगों में लाखों नौकरियाँ खतरे में हैं, जहां महिलाएं और पहली पीढ़ी के इंडस्ट्रियल वर्कर्स ज्यादा हैं। निर्यात में गिरावट से निर्माण क्षेत्र और निर्यात से जुड़ी नौकरियाँ प्रभावित हुईं। कहा जा रहा है कि कुछ सेक्टरों में अवसर बढ़ा, लेकिन कुल मिलाकर नकारात्मक प्रभाव ज्यादा रहा।
आगे क्या असर हो सकता है?
अगर रूस से तेल खरीद जारी रही तो ट्रंप 500% तक टैरिफ की धमकी दे चुके हैं। यह निर्यात को और बर्बाद कर सकता है। वैश्विक ट्रेड अनिश्चितता से निवेश कम हो सकता है और वैश्विक जीडीपी विकास दर भी गिर सकती है। यह सब मिलकर भारत पर बुरा असर ही पड़ेगा।
हालाँकि, भारत नए बाजार तलाश रहा है। यूके से ट्रेड डील से गारमेंट निर्यात दोगुना हो सकता है। डाइवर्सिफिकेशन से निर्यात चीन और यूरोपीय व अन्य देशों की ओर शिफ्ट हो रहा है। कुल मिलाकर टैरिफ से तत्काल नुकसान हुआ है, लेकिन भारत की घरेलू-केंद्रित अर्थव्यवस्था और सुधारों से आगे संभल सकता है।