UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमिटी ने फ़ैसला किया है कि 2000 रुपये से ज़्यादा के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर MDR दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। NPCI ने एक बयान में कहा कि इसकी सही तारीख़ की घोषणा अलग से बाद में की जाएगी।
UPI से भुगतान करने पर दुकानदारों और कारोबारियों पर लगने वाली मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR फ़ीस लागू करने का फ़ैसला अगले महीने के लिए टाल दिया गया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने मंगलवार को बताया कि चुनिंदा UPI ट्रांज़ैक्शन पर यह शुल्क अब दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। पहले इसे 15 अक्टूबर से लागू करने की योजना थी। एनपीसीआई के मुताबिक़ UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमिटी ने यह फ़ैसला किया है। हालाँकि, नई व्यवस्था किस तारीख़ से लागू होगी, इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है। इसने कहा है कि सही तारीख़ की घोषणा अलग से की जाएगी।
यह फ़ैसला तब लिया गया है जब त्योहारों के दौरान खरीदारी और डिजिटल भुगतान बढ़ने की उम्मीद है। इससे पहले ऐसी रिपोर्टें आई थीं कि मर्चेंट संगठनों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट कंपनियों ने प्रस्तावित शुल्क को लागू करने की तारीख़ आगे बढ़ाने की मांग की थी।
क्या है MDR और किस पर लगेगी फीस?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले कारोबारी या दुकानदार को देना पड़ता है। यह शुल्क पेमेंट स्वीकार करने की व्यवस्था से जुड़ा होता है और लागू नियमों के आधार पर कारोबारियों की भुगतान संबंधी लागत को प्रभावित कर सकता है। इस व्यवस्था के तहत 2000 रुपये से ज़्यादा के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट UPI ट्रांज़ैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने की बात कही गई है।पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन का मतलब है किसी व्यक्ति की ओर से दुकानदार, कारोबारी या किसी मर्चेंट को किया गया भुगतान। मिसाल के तौर पर किसी दुकान पर सामान खरीदने के बाद यूपीआई से पैसे देना इस श्रेणी में आ सकता है। प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत दर के हिसाब से अगर कोई ग्राहक 10,000 रुपये का भुगतान करता है और वह ट्रांज़ैक्शन इस शुल्क के दायरे में आता है तो MDR की राशि 40 रुपये होगी। हालाँकि, NPCI के 13 अक्टूबर के बयान में यह साफ़ नहीं किया गया है कि किन-किन श्रेणियों के ट्रांज़ैक्शन पर शुल्क लगेगा और नई व्यवस्था के तहत कौन-सी दरें लागू होंगी।
दिवाली के दौरान क्यों टाला गया फ़ैसला?
त्योहारों के मौसम में बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है। लोग इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, घरेलू सामान, यात्रा और दूसरी ज़रूरतों पर अधिक खर्च करते हैं। इस दौरान दुकानों और ऑनलाइन कारोबार में डिजिटल भुगतान की संख्या भी बढ़ सकती है। त्योहारी सीजन में UPI भुगतान पर नई फीस लागू होने से कारोबारियों के बीच भ्रम पैदा होने की आशंका जताई जा रही थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उद्योग से जुड़े संगठनों ने यह सवाल उठाया था कि शुल्क किन ट्रांज़ैक्शन पर लगेगा और अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग दरें होंगी या नहीं।
NPCI ने अपने बयान में यह नहीं बताया कि फ़ैसला टालने के पीछे कौन-से कारण निर्णायक रहे। हालाँकि, इससे पहले आई रिपोर्टों में कहा गया था कि त्योहारों के दौरान कारोबारियों और ग्राहकों पर संभावित असर को देखते हुए शुल्क लागू करने की तारीख़ आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा था।
क्या ग्राहकों को भी देना पड़ सकता है ज़्यादा पैसा?
MDR सीधे तौर पर मर्चेंट यानी भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी से जुड़ा शुल्क है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक को UPI से भुगतान करते समय अलग से फीस देनी होगी। हालाँकि, कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ने पर इसका असर उनके कारोबार के खर्च पर पड़ सकता है। इसकी आशंका जताई जा रही है कि इसका बोझ आख़िरकार ग्राहकों पर ही पड़ेगा।अभी NPCI ने अपने बयान में यह साफ़ नहीं किया है कि प्रस्तावित शुल्क का अंतिम ढांचा क्या होगा और इसका अलग-अलग कारोबारियों पर किस तरह असर पड़ेगा। इसलिए ग्राहकों पर पड़ने वाले संभावित असर के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी।
कारोबारियों, पेमेंट कंपनियों को मिली अतिरिक्त मोहलत
MDR लागू करने की तारीख़ आगे बढ़ने से कारोबारियों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट कंपनियों को नई व्यवस्था को समझने और उसके लिए तैयारी करने का अतिरिक्त समय मिलेगा। हालाँकि, यह राहत स्थायी नहीं है। NPCI ने साफ़ किया है कि चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर शुल्क दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। इसकी सटीक तारीख़ और लागू होने वाली विस्तृत शर्तों को लेकर आगे की घोषणा का इंतज़ार है।