बजट में मनरेगा के तहत औसतन 50 दिन के काम की हकीकत सामने है तो G RAM G योजना में 125 दिन के रोज़गार का दावा कैसे संभव होगा? क्या इसके लिए कुछ बजट का प्रावधान किया गया है?
वीबी जी राम जी क़ानून को लेकर सरकार के दावों की कलई पहले ही बजट में खुल गई! 100 दिन के काम की गारंटी वाले मनरेगा की जगह लाए गए वीबी जी राम जी क़ानून में 125 दिन के काम की गारंटी दी गई है, लेकिन बजट में जो प्रावधान किए गए हैं, उससे तो इतने दिनों का काम मिलना संभव ही नहीं लगता है। जी राम जी क़ानून के बारे में सरकार ने काम के दिन बढ़ाकर 125 दिन करने का ही ढोल पीटा है। तो क्या यह दावा दिखाने के लिए है?
केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने नई योजना 'विकसित भारत - ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी' यानी VB-G RAM G के लिए 95692.31 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके लागू होने तक के लिए पुरानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के लिए 30000 करोड़ रुपये रखे गए हैं। कुल मिलाकर दोनों योजनाओं के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं। यदि सभी रजिस्टर्ड मज़दूरों को 125 दिन का रोजगार दिया जाए तो सिर्फ़ केंद्र का बजट ही क़रीब 2.30 लाख करोड़ का होना चाहिए। राज्य का तो अलग से होना ही चाहिए। इसको समझने के लिए पिछले कुछ साल के मनरेगा के बजट और काम के दिवस को समझिए।
2020-21 में कोविड के कारण काम की मांग बहुत बढ़ी और ख़र्च का संशोधित अनुमान 1,11,500 करोड़ रुपये रहा। 2023-24 और 2024-25 में बजट अनुमान 86000 करोड़ रहा। 2025-26 में भी यह 86000 करोड़ रखा गया। इन वर्षों में इतना बजट ख़र्च कर औसत रूप से हर कार्ड धारक को क़रीब 50 दिनों का रोजगार मिला है। किस साल में औसत रूप से कितने दिन रोजगार मिला-
- 2020-21: 51.54 दिन
- 2021-22: 50.07 दिन
- 2022-23: 47.84 दिन
- 2023-24: 52.07 दिन
- 2024-25: 50.24 दिन
- 2025-26 (फरवरी 2026 तक): अब तक औसत 38-39 दिन
आवंटन बढ़ा, लेकिन क्या यह काफ़ी है?
पिछले साल 2025-26 में मनरेगा के लिए संशोधित अनुमान 88 हज़ार करोड़ रुपये था। इस बार आवंटन में क़रीब 43% की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का कहना है कि यह रक़म सरकार के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए काफ़ी नहीं है। सरकार का वादा है कि ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन का काम मिलेगा, लेकिन इसके लिए बहुत ज़्यादा पैसा चाहिए।
नये क़ानून VB-G RAM G एक्ट 2025 पुराने मनरेगा क़ानून की जगह लेगा। इस नए क़ानून के तहत कोई भी ग्रामीण परिवार जो अकुशल काम करने को तैयार हो, रजिस्टर करवा सकता है और काम मांग सकता है। देश में क़रीब 8.65 करोड़ सक्रिय जॉब कार्ड धारक हैं, जो इस योजना के तहत काम मांग सकते हैं।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार लीबटेक इंडिया के वरिष्ठ शोधकर्ता चक्रधर बुद्धा ने कहा, 'अगर सभी सक्रिय जॉब कार्ड धारकों को 125 दिन का काम दिया जाए और प्रति व्यक्ति प्रति दिन औसत ख़र्च 355 रुपये हो तो कुल ख़र्च 3,83,844 करोड़ रुपये होगा। केंद्र और राज्य 60:40 के अनुपात में खर्च बांटते हैं तो केंद्र का हिस्सा क़रीब 2.30 लाख करोड़ रुपये होगा।' लेकिन बजट में सिर्फ 95,692 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो बहुत कम है।
नया क़ानून अभी अधिसूचित नहीं हुआ है। जब तक यह लागू नहीं होता, मनरेगा पुराने तरीक़े से चलेगी। 30000 करोड़ रुपये पुराने साल के बकाया चुकाने और चल रहे ख़र्च के लिए रखे गए हैं।
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बजट को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए कुल आवंटन 21% बढ़कर 2,31,423 करोड़ रुपये हो गया है।
मंत्री ने बताया कि पिछले साल मनरेगा के लिए कुल 86000 करोड़ थे, लेकिन इस बार केंद्र का हिस्सा 95,600 करोड़ से ज्यादा है और राज्यों के हिस्से को जोड़ने पर 1.51 करोड़ से ज्यादा होगा। उन्होंने कहा, 'यह अभूतपूर्व है और ग्रामीण भारत को नई गति देगा।' 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार पंचायतों को सीधे 55900 करोड़ से ज्यादा मिलेंगे।
लेकिन मनरेगा के संस्थापक लेखकों में से एक निखिल डे ने कहा कि पुरानी योजना के अभी 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया हैं। अगले दो महीनों में करीब 15,000 करोड़ और खर्च होने की संभावना है। इसलिए 30000 करोड़ का प्रावधान अगले साल के लिए बेकार है।
उन्होंने आगे कहा कि कई राज्य अपने बजट में नई योजना के लिए अपना हिस्सा नहीं रख पाए हैं, क्योंकि केंद्र ही तय करता है कि हर राज्य को कितना मिलेगा। केंद्र ने अपना हिस्सा तय कर दिया है, लेकिन बाकी जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी है। इससे VB-G RAM G योजना का असल क्रियान्वयन बहुत अनिश्चित है। ग्रामीण भारत में मनरेगा जैसी योजनाएं लाखों परिवारों के लिए रोजगार का सहारा हैं, खासकर जब काम कम हो।
यह बजट ग्रामीण विकास पर फोकस को दिखाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वादों को पूरा करने के लिए और ज्यादा फंड की जरूरत है।