वीबी-जी राम जी योजना के तहत जुलाई 2026 में केवल 7.67 करोड़ पर्सन डेज यानी व्यक्ति-दिवस रोजगार मिले जो कि पिछले साल इसी महीने में मनरेगा के तहत 15.33 करोड़ व्यक्ति-दिवस की तुलना में 49.94 प्रतिशत कम है।
मनरेगा की जगह लाई गई जिस वीबी जी राम जी योजना को विपक्ष ग्रामीण रोजगार को ख़त्म करने वाला क़रार देता रहा है उसके लागू किए जाने के पहले ही महीने जुलाई में ग्रामीण रोजगार में क़रीब आधी कमी आ गई है। मोदी सरकार ने मनरेगा को ख़त्म कर विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM-G लागू किया है और इसको रोजगार बढ़ाने वाला क़रार दिया है।
जुलाई 2026 में नई योजना के तहत सिर्फ 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिवस यानी पर्सन डेज रोजगार पैदा हुआ। यह पिछले साल जुलाई में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के तहत पैदा हुए 15.33 करोड़ व्यक्ति-दिवस के मुकाबले करीब 49.94 प्रतिशत कम है। द इंडियन एक्सप्रेस ने यह रिपोर्ट दी है। VB-G RAM-G को 1 जुलाई 2026 से देशभर में मनरेगा की जगह लागू किया गया है। ऐसे में योजना के पहले महीने के आँकड़ों में आई यह गिरावट ग्रामीण रोजगार और सरकार की नई रोजगार व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रही है। यहाँ व्यक्ति-दिवस का मतलब एक व्यक्ति द्वारा एक दिन किए गए काम से है। मिसाल के तौर पर यदि 10 लोगों को एक दिन काम मिलता है तो इसे 10 व्यक्ति-दिवस माना जाता है।
कितने परिवारों को मिला काम?
नई योजना के तहत रोजगार पाने वाले ग्रामीण परिवारों की संख्या में भी बड़ी गिरावट आई है। जुलाई 2026 में क़रीब 68.94 लाख परिवारों ने वीबी-जी राम-जी के तहत रोजगार का लाभ लिया। पिछले साल जुलाई में मनरेगा के तहत यह संख्या क़रीब 1.42 करोड़ परिवार थी। यानी रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या में 51.45 प्रतिशत की गिरावट आई है।
पिछले चार वर्षों के औसत से तुलना करें तो स्थिति और साफ़ होती है। इस अवधि में हर साल औसतन क़रीब 1.72 करोड़ परिवार ग्रामीण रोजगार योजना का लाभ लेते रहे थे। इसके मुक़ाबले जुलाई 2026 में क़रीब 68 लाख परिवारों को ही काम मिला।
पाँच साल में सबसे कम रोजगार
उपलब्ध आँकड़ों के मुताबिक़ जुलाई 2026 में वीबी-जी राम-जी के तहत रोजगार पाने वाले परिवारों और पैदा हुए व्यक्ति-दिवस की संख्या पिछले पांच वर्षों में सबसे कम रही।
पिछले चार वर्षों में औसतन क़रीब 21.56 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार जुलाई के आसपास दर्ज होता रहा था। इस साल जुलाई में यह आँकड़ा सिर्फ 7.67 करोड़ रहा। यानी इस साल का आँकड़ा पिछले चार वर्षों के औसत का क़रीब 35 प्रतिशत ही है।
मनरेगा के अंतिम महीनों में भी रोजगार में साल-दर-साल मामूली गिरावट देखी जा रही थी। मार्च 2025 में मनरेगा के तहत 17.56 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार पैदा हुआ था जो मार्च 2024 के 17.69 करोड़ के मुक़ाबले क़रीब 0.70 प्रतिशत कम था। जून 2026 तक जब मनरेगा लागू था तब तक मासिक रोजगार के आँकड़ों में यह गिरावट बनी रही।
जहाँ वीबी-जी राम-जी डैशबोर्ड जुलाई में 7.67 करोड़ पर्सन-डेज़ यानी व्यक्तिगत दिवस दिखाता है वहीं ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि इस योजना के लागू होने के पहले महीने में क़रीब 9 करोड़ पर्सन-डेज़ रोजगार दिए गए। अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि वीबी-जी राम-जी को 1 जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण इलाक़ों में लागू कर दिया गया है और मनरेगा से नई योजना में बदलाव सुचारू तरीक़े से हुआ है।
सरकार के मुताबिक़ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी योजनाओं को अधिसूचित कर दिया है और नई व्यवस्था के लिए ज़रूरी प्रशासनिक तथा डिजिटल सिस्टम भी तैयार कर लिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय ने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए 95692 करोड़ रुपये का बजट अनुमान रखा है जो किसी ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट अनुमान है।
सरकार का दावा- 98% परिवारों को काम मिला
ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक़ रोजगार की मांग करने वाले 98 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों को काम की पेशकश की गई है। मंत्रालय ने दावा किया कि नई योजना के पहले महीने में करीब 9 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार पैदा हुआ। 1.33 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण कामगारों को उनकी मांग के अनुसार रोजगार की पेशकश की गई। देशभर में 9 लाख से अधिक सक्रिय कार्यस्थलों पर काम चल रहा था। कुल व्यक्ति-दिवस में करीब 63 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की रही। सरकार का कहना है कि महिलाओं की भागीदारी कानून में तय एक-तिहाई न्यूनतम हिस्सेदारी से काफी अधिक है।मौसम ठीक नहीं रहा, फिर भी रोजगार कम
जुलाई में ग्रामीण रोजगार में गिरावट तब आई है जब देश के कई हिस्सों में बारिश का पैटर्न असामान्य रहा। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 1 जून से 3 अगस्त के बीच देश के 741 जिलों में से क़रीब 50 प्रतिशत जिलों में बारिश सामान्य से कम से लेकर गंभीर रूप से कम दर्ज की गई। ऐसे समय में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना उन लोगों के लिए बड़ा सहारा बन सकती है जो कृषि क्षेत्र में असंगठित या दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। हालाँकि, इस दौरान खरीफ की बुवाई भी चलती है और कृषि मजदूरों का एक हिस्सा खेतों में काम करने में लगा रहता है।
क्या खरीफ बुवाई के कारण कम हुआ रोजगार?
रोजगार में गिरावट की एक संभावित वजह खरीफ की बुवाई का मौसम भी बताई जा रही है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि नई योजना में खरीफ़ की बुवाई के दौरान रोजगार कार्यों पर रोक का प्रावधान होने के कारण जुलाई में रोजगार के आंकड़े कम हो सकते हैं। हालाँकि, उपलब्ध जानकारी में इस बात का कोई अलग आँकड़ा नहीं दिया गया है कि राज्यों ने बुवाई के दौरान कितने दिनों तक रोजगार कार्यों को रोका।
इसलिए सिर्फ बुवाई के मौसम को जुलाई में रोजगार में करीब 50 प्रतिशत गिरावट की पूरी वजह मानना अभी संभव नहीं है।
ट्रांजिशन के दौर की वजह से कमी आई?
VB-G RAM-G का पहला महीना कई मायनों में ट्रांजिशन का दौर भी था। मनरेगा से नई योजना में प्रशासनिक और तकनीकी बदलाव किए गए हैं। साथ ही जुलाई में खरीफ बुवाई का मौसम भी रहा। इसलिए आने वाले महीनों के आँकड़े यह समझने में ज़्यादा मदद करेंगे कि जुलाई में रोजगार में आई भारी गिरावट नई योजना के शुरुआती ट्रांजिशन, कृषि सीजन, रोजगार मांग में बदलाव या योजना के नए नियमों का परिणाम थी।
नई योजना में काम के दिन बढ़ाए
ऐसी गिरावट तब आई है जब VB-G RAM-G में मनरेगा के मुकाबले रोजगार गारंटी के दिनों को बढ़ाया गया है। मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी। नई VB-G RAM-G योजना में इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। लेकिन नई व्यवस्था में एक अहम बदलाव भी किया गया है।
कानून के तहत राज्यों में कृषि के बुवाई और कटाई के व्यस्त मौसम के दौरान कुल मिलाकर 60 दिनों तक रोजगार गारंटी के काम को रोका जा सकता है। इस अवधि में ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत काम नहीं कराया जाएगा। सरकार का तर्क है कि इसका उद्देश्य कृषि के पीक सीजन में ग्रामीण श्रमिकों की उपलब्धता को कृषि कार्यों के लिए बनाए रखना है।कांग्रेस का वीबी जी राम जी पर बड़े आरोप
कांग्रेस लगातार आरोप लागाती रही है कि वीबी-जी राम जी से ग्रामीण रोजगार और काम का कानूनी अधिकार खत्म या कमजोर होगा। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह सरकार की मर्जी से काम बांटने वाली योजना बन जाएगा। केंद्र-राज्य फंडिंग 90:10 से 60:40 हो जाने से राज्यों पर बोझ बढ़ेगा, जिससे रोजगार कम होगा। केंद्रीकरण से ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता घटेगी।
राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी सरकार ने एक दिन में 20 साल की मनरेगा को ध्वस्त कर दिया। VB-G RAM G मनरेगा का सुधार नहीं, बल्कि काम के अधिकार को ख़त्म करता है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे 'दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार योजना की व्यवस्थित हत्या' बताया।
बहरहाल, सरकार का दावा है कि VB-G RAM-G ज्यादा रोजगार, बेहतर तकनीकी निगरानी और ग्रामीण विकास से जुड़े कामों पर ज्यादा ध्यान देगा। लेकिन योजना के पहले महीने के आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। आधिकारिक डैशबोर्ड के अनुसार, जुलाई में व्यक्ति-दिवस रोजगार पिछले साल के मुकाबले करीब आधा रह गया। इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि VB-G RAM-G के डैशबोर्ड पर 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिवस और ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से करीब 9 करोड़ व्यक्ति-दिवस का आंकड़ा क्यों बताया गया है। दोनों आंकड़ों के बीच अंतर को लेकर मंत्रालय की ओर से उपलब्ध जानकारी में सफाई नहीं दी गई है।
फिलहाल इतना साफ़ है कि मनरेगा की जगह पर लागू की गई VB-G RAM-G योजना के पहले महीने में ग्रामीण रोजगार के आँकड़े में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है।