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पुडुचेरी की तरह होगा केंद्र-शासित जम्मू-कश्मीर, होंगे अहम बदलाव

जम्मू-कश्मीर 31 अक्टूबर से केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। इसके साथ ही इसकी स्थिति में अहम बदलाव होंगे। अनुच्छेद 370 में हुए बदलाव और राज्य को मिले विशेष दर्जा को ख़त्म करने के साथ ही 5 अगस्त को यह फ़ैसला भी किया गया था कि यह राज्य ऐसा केंद्र-शासित प्रदेश होगा, जिसकी विधानसभा भी होगी। इस मामले में यह पुडुचेरी की तरह है, जहाँ विधानसभा है, लेफ़्टिनेंट गवर्नर भी हैं और वह केंद्र शासित प्रदेश भी है। 

विधानसभा

जम्मू-कश्मीर में एक सदन की विधानसभा होगी। पहले जम्मू-कश्मीर में दो सदन, ऊपरी और निचली हुआ करते थे। ऊपरी सदन को ख़त्म कर दिया गया है। इसके साथ ही इस विधानसभा में अब सिर्फ़ निचला सदन ही होगा।
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 114 सीटें होंगी। लेकिन इसमें 24 सीटें पाक-अधिकृत कश्मीर के लिए भी हैं। ज़ाहिर है, ये सीटें खाली रहेंगी। यह विधानसभा 5  साल के लिए होगा। पहले विधानसभा में 111 सीटें थीं, जिनमें 24 पाक-अधिकृत कश्मीर के लिए छोड़ी जाती थीं, 87 निर्वाचित होते थे और 2 मनोनीत हुआ करते थे। 

सरकार

पहले यह व्यवस्था थी कि जम्मू-कश्मीर में अधिकतम 24 मंत्री हो सकते थे, इसमें मुख्य मंत्री, कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री  शामिल थे। पर नई व्यवस्था में विधानसभा सीटों के 10 प्रतिशत से अधिक मंत्री नहीं हो सकते। इससे साफ़ है कि राज्य में अधिकतम 10 मंत्री होंगे। 

लेफ़्टिनेंट गवर्नर

जम्मू-कश्मीर में लेफ़्टिनेंट गवर्नर होंगे। अब तक वहाँ राज्यपाल यानी गवर्नर हुआ करते थे। जम्मू-कश्मीर के ही लेफ़्टिनेंट गवर्नर लद्दाख का भी कामकाज देखेंगे। लेफ़्टिनेंट गवर्नर किसी विधेयक को स्वीकार कर सकते हैं, विचार के लिए भेज सकते हैं और इसे अपने पास लंबित भी रख सकते हैं।
यदि किसी मुद्दे पर केंद्र और राज्य के नियमों में टकराव हुआ तो केंद्र का नियम ही सर्वोपरि होगा। क़ानून व्यवस्था का विषय केंद्र के अधीन होगा। इसमें वित्तीय आपातकाल लागू करना भी शामिल है।

हाई कोर्ट

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, दोनों ही केंद्र-शासित प्रदेशों का एक ही हाई कोर्ट होगा। लेकिन दोनों के महाधिवक्ता यानी सॉलीसिटर जनरल अलग-अलग होंगे।
जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग अभी की तरह काम करता रहेगा। पर लद्दाख के अफ़सरों की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग से  होगी। 

केंद्रीय क़ानून

अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला हुआ था। इसके तहत रक्षा, विदेश मामले, संचार और मुद्रा को छोड़ कर तमाम मुद्दों पर राज्य अपना क़ानून बना सकता था। लेकिन बीच-बीच में केंद्रीय क़ानून भी यहाँ लाग होत रहे हैं, मसलन, जीएसटी। 
बदली हुई स्थिति में जम्मू-कश्मीर केंद्रीय क़ानूनों के तहत काम करेगा। कुछ राज्य क़ानून भी वजूद में रहेंगे। लेकिन जहाँ केंद्र और राज्य क़ानूनोें में टकराव होगा, केंद्रीय क़ानून सर्वोपरि होगा।
अनुच्छेद 35 ए के तहत यह व्यवस्था थी कि जम्मू-कश्मीर के मूल बाशिंदे ही राज्य में जायदाद खरीद सकते हैं और राज्य सरकार की नौकरी ले सकते हैं। यह अनुच्छेद ख़त्म कर दिया गया है। 

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