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जम्मू-कश्मीर पर केंद्र की नज़र, इंटरनेट फिर से बंद

जम्मू-कश्मीर के हालात पर केंद्र सरकार पैनी निगाह रखे हुए है और सोमवार दोपहर को इस मसले पर केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक बेहद अहम बैठक हुई है। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने राज्य के ताज़ा हालात पर चर्चा की है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के बाद से ही अजीत डोभाल घाटी में रुके हुए थे और लगातार वहाँ के हालात का जायजा ले रहे थे।सरकार का दावा है कि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हैं और वहाँ पर छिटपुट घटनाओं को छोड़कर कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की एक ख़बर के मुताबिक़, रविवार को श्रीनगर के कई इलाक़ों में स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं हैं, जिसमें कई लोग घायल हो गए हैं। इसके बाद इंटरनेट और फ़ोन सेवाओं पर फिर से प्रतिबंध लगा दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसा अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए किया गया। बता दें कि इससे पहले शनिवार को जम्मू के कई इलाकों में मोबाइल फ़ोन सेवा और इंटरनेट को चालू कर दिया गया था। 

रॉयटर्स की ख़बर के मुताबिक़, पिछले 24 घंटे में अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के ख़िलाफ़ श्रीनगर में बड़ी संख्या में प्रदर्शन हुए हैं। राज्य सरकार ने कहा है कि पिछले दो हफ़्ते से कहीं भी कर्फ्यू नहीं लगा है लेकिन रविवार को श्रीनगर में कई लोगों को रास्तों पर बैरिकेड लगाकर घर वापस भेज दिया गया। कुछ जगहों पर सुरक्षा बलों ने लोगों को बताया कि श्रीनगर में कर्फ्यू लगा हुआ है। 

सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि 17 अगस्त की रात को हुई हिंसक झड़पों में पैलेट गन से कम से कम दो दर्जन लोग घायल हुए हैं और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ख़बर के मुताबिक़, एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि लोगों ने श्रीनगर में दो दर्जन जगहों पर सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके। सूत्र ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में पत्थर फेंकने की घटनाएँ बढ़ी हैं। 

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सबसे ज़्यादा हिंसक झड़पें रैनावाड़ी, नोहट्टा और गोजवाड़ा में हुई हैं। ख़बर में प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि लोगों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आँसू गैस के गोले छोड़े, मिर्च के गोले और पैलेट गन का इस्तेमाल किया। बता दें कि मिर्च के गोलों में बेहद तीख़ी लाल मिर्च होती है और यह आँखों और त्वचा में जबरदस्त जलन पैदा करती है और बहुत तेज़ गंध फैलाती है। 

ख़बर के मुताबिक़, अपनी पहचान उजागर न करने की शर्त पर अधिकारियों ने कहा कि श्रीनगर के कई अन्य इलाक़ों जैसे सौरा आदि में पिछले दो हफ़्ते में प्रदर्शन हुए हैं। 

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और अस्पताल से जुड़े लोगों ने बताया कि श्रीनगर के मुख्य अस्पताल में 17 लोग ऐसे हैं जो पैलेट गन के चलते घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि 12 लोगों को छुट्टी दे दी गई है जबकि पाँच की हालत गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अस्पताल के अधिकारियों और पुलिस अफ़सर ने रॉयटर्स को बताया कि 65 वर्षीय बराड़ीपोरा के रहने वाले मुहम्मद अयूब को आँसू गैस और मिर्च के गोलों से घायल होने के बाद शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ देर रात उनकी मौत हो गई। 35 साल के जावेद अहमद ने कहा कि उन्हें अपने माता-पिता से मिलने श्रीनगर के पुराने शहर वाले इलाक़े में जाना था लेकिन जवानों ने रास्ते को बंद किया हुआ था। जावेद ने कहा कि सुरक्षा बलों ने मुझे वापस जाने को कहा और यह भी कहा कि इलाक़े में कर्फ्यू लगा हुआ है। ख़बर के मुताबिक़, राजनीतिक दलों और समाज से जुड़े 500 से ज़्यादा नेताओं को हिरासत में रखा गया है।
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सरकार की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि सोमवार से घाटी में स्कूल-कॉलेज खुल गए हैं और बच्चे स्कूल गए हैं। लेकिन न्यूज़ 18 के मुताबिक़, बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल नहीं गए। सभी प्राइवेट स्कूल लगातार 15 वें दिन बंद रहे। इसके पीछे यह कारण बताया जा रहा है कि माता-पिता बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। केवल बेमिना में मौजूद पुलिस पब्लिक स्कूल और कुछ केंद्रीय विद्यालय ही खुले जहाँ गिने-चुने बच्चे स्कूल में आए। सरकार से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि श्रीनगर शहर में 190 प्राइमरी स्कूलों को खोलने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। 

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न्यूज़ 18 के मुताबिक़, बारामुला जिले के एक अधिकारी ने कहा कि जिले के पाँच कस्बों में स्कूल पूरी तरह बंद रहे जबकि बाक़ी जगहों पर स्कूल खुले रहे। एक अधिकारी ने यह भी कहा कि पाट्टन, पल्हालन, सिंगपोरा, बारामुला और सोपोर में अभी प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी गई है। 

न्यूज़ 18 के मुताबिक़, घाटी में बाज़ार पूरी तरह बंद रहे और सड़कों पर वाहन भी नहीं दिखाई दिये। घाटी में अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के बाद से ही घाटी में स्कूल-कॉलेज बंद थे और इंटरनेट और फ़ोन सेवाओं को बंद कर दिया गया था। 

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