सरकार के साथ कई दौर की बातचीत में 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने, जाँच के आदेश देने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार जैसे फैसले हुए, पर छात्रों ने कहा कि CBI जांच, CGL व अन्य JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर कार्रवाई की मांगें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं।
रांची में झारखंड के छात्रों का आंदोलन जारी है
झारखंड सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार जैसे मुद्दों पर सहमति बनी है। सरकार ने कथित गड़बड़ियों की जाँच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भी भरोसा दिया है। भारी विरोध के बीच JPSC के तीन सदस्यों ने रविवार को इस्तीफ़ा दे दिया। इसके बावजूद यह छात्र आंदोलन फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है। छात्रों का कहना है कि उनकी सबसे अहम मांग अभी पूरी नहीं हुई है। छात्र केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसके अलावा JSSC CGL और दूसरी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी छात्रों की मांगों का समाधान नहीं हुआ है।
छात्र नेताओं ने साफ़ कहा है कि वे सीबीआई जांच की घोषणा होने तक आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा की ओर बड़े मार्च का ऐलान किया है। आंदोलनकारी छात्रों का दावा है कि मार्च में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल होंगे।
तीन दिन की वार्ता के बाद फ़ैसला
झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार ने छात्रों के साथ लगातार तीन दिनों तक बातचीत की और उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा और 2023 से 2025 के बीच हुई बैकलॉग भर्तियों में सामने आई कथित गड़बड़ियों से निपटने के लिए दो स्तर पर जांच का फैसला किया है।मंत्री के मुताबिक आपराधिक मामलों की जांच सीआईडी करेगी। वहीं, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और अवैध धन के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा। सरकार का कहना है कि जांच के बाद मामले को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा और आरोपियों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की कोशिश होगी। इस बीच भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर दो हफ़्ते से ज़्यादा समय तक चले विरोध-प्रदर्शनों के बाद रविवार को JPSC के तीनों सदस्यों ने इस्तीफ़ा दे दिया।
भर्ती प्रक्रिया सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति
सरकार ने केवल मौजूदा विवाद की जांच तक सीमित रहने के बजाय भर्ती परीक्षा की व्यवस्था में सुधार का भी प्रस्ताव रखा है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों को शामिल करके एक समिति बनाई जाएगी। यह समिति भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था, परीक्षा संचालन, पारदर्शिता और भविष्य में गड़बड़ियों को रोकने के उपायों पर सुझाव देगी।
झारखंड सरकार का दावा है कि इसके ताज़ा कदमों से राज्य की भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सकेगा।
14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग मानी गई
छात्रों के आंदोलन की सबसे प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना शामिल था। सरकार ने इस मांग को स्वीकार करने का फ़ैसला किया है। हालांकि, छात्रों के लिए यह फैसला आंदोलन खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है। सीबीआई जाँच का यही मुद्दा सरकार और छात्रों के बीच बातचीत में सबसे बड़ी अड़चन बन गया है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने मांग की कि 14वीं JPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच सीबीआई से कराई जाए। लेकिन सरकार ने सीबीआई जांच की जगह सीआईडी जांच और वित्तीय मामलों में ईडी जांच का रास्ता प्रस्तावित किया। सरकार की ओर से एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग कमेटी बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया। इसका उद्देश्य जांच की निगरानी करना था। लेकिन छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक CBI जांच की घोषणा नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर भी विवाद
आंदोलन का दूसरा बड़ा मुद्दा JSSC CGL परीक्षा बन गया है। छात्र प्रतिनिधियों ने बातचीत के दौरान CGL परीक्षा को भी रद्द करने की मांग रखी। सरकार ने इस मांग को मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आयोजित हुई थी और मामला न्यायिक निगरानी में है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार ऐसी परीक्षा को अपने स्तर पर रद्द नहीं कर सकती।
सरकार ने यह भी तर्क दिया कि CGL परीक्षा का परिणाम पहले ही जारी हो चुका है और सफल अभ्यर्थियों में से कई लोग नौकरी भी ज्वाइन कर चुके हैं। ऐसे में परीक्षा को रद्द करने के गंभीर कानूनी और प्रशासनिक प्रभाव हो सकते हैं। छात्रों ने सरकार के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया है।
सरकार का दावा- 98 फीसदी मांगों पर सहमति
सरकार का कहना है कि बातचीत के दौरान छात्रों की लगभग 98 फीसदी मांगों पर सहमति बन गई है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि केवल दो फीसदी मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। उनके मुताबिक, इनमें मुख्य रूप से CGL परीक्षा रद्द करने की मांग शामिल है। सरकार का कहना है कि वह जांच, कार्रवाई और भर्ती व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीर है। लेकिन छात्रों का कहना है कि सीबीआई जांच की मांग कोई छोटा मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे आंदोलन की सबसे अहम मांगों में से एक है। यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हो सका।संवाद से समाधान होगा: CM
इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजनीतिक दलों से छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग नहीं देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए करना चाहती है। सोरेन ने यह भी कहा कि छात्रों की मांगों का समाधान बल प्रयोग से नहीं, संवाद से किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पारदर्शी तरीके से जांच कराकर छात्रों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका संदेश है कि बातचीत से समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए और आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा बनाने से बचना चाहिए।
10 अगस्त को विधानसभा मार्च की तैयारी
सरकार के साथ बातचीत विफल होने के बाद छात्र नेताओं ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है। उन्होंने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा की ओर मार्च निकालने की घोषणा की है। छात्रों का कहना है कि जब तक CBI जांच की घोषणा नहीं होती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
आंदोलनकारी छात्रों के मुताबिक, बड़ी संख्या में JPSC और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी इस मार्च में शामिल हो सकते हैं। इससे विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ सकती है।छात्रों के आंदोलन में अब कई मुद्दे शामिल
शुरुआत में आंदोलन का मुख्य केंद्र 14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताएं थीं। लेकिन अब आंदोलन का दायरा बढ़ गया है। छात्रों की मांगों में 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करना, कथित गड़बड़ियों की CBI से जांच कराना, JSSC CGL परीक्षा को लेकर कार्रवाई, दूसरी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, दोषी अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और भविष्य की परीक्षाओं के लिए बेहतर व्यवस्था लागू करना शामिल हैं।
सरकार ने इनमें से कई मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन CBI जांच और CGL परीक्षा को लेकर गतिरोध बना हुआ है। फिलहाल झारखंड सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से कुछ अहम मांगों पर रास्ता जरूर निकला है, लेकिन सबसे अहम मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच दूरी बनी हुई है। सरकार सीआईडी, ईडी और न्यायिक निगरानी के जरिए जांच आगे बढ़ाने की बात कर रही है, जबकि छात्र सीबीआई जांच को ही भरोसेमंद समाधान मान रहे हैं। ऐसे में 10 अगस्त का विधानसभा मार्च आंदोलन की अगली बड़ी परीक्षा होगा। यदि सरकार और छात्रों के बीच इस दौरान कोई नया समझौता नहीं होता है तो झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन आगे और बड़ा रूप ले सकता है।