झारखंड लोकसेवा आयोग का पेपर लीक अनुमान से बड़ा हो रहा है। CID ने सोमवार को JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी छात्रों के व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच हुई है। कल आयोग के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था।
झारखंड लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष खिंग्याते को गिरफ्तार कर लिया गया।
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) भर्ती परीक्षा में सामने आए व्यापक फर्जीवाड़े और पेपर लीक मामले में आपराधिक अनुसंधान विभाग (CID) की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस मामले में जहां एक तरफ बड़े पैमाने पर पैसों के लेन-देन और प्रश्न-पत्र लीक करने की पुष्टि हुई है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और संवैधानिक स्तर पर भी कार्रवाई तेज हो गई है। इसी मुद्दे पर झारखंड के छात्रों ने सोमवार 10 अगस्त को रांची में जोरदार प्रदर्शन किया।
CID की जांच में मुख्य खुलासे
CID द्वारा गिरफ्तार अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी से पूछताछ के बाद पेपर लीक और चयन में बड़े पैमाने पर हुई सांठगांठ का खुलासा हुआ है: बोकारो में 15 कैंडिडेट्स से परीक्षा से पहले प्रश्न-पत्र और उत्तर उपलब्ध कराने के एवज में 12-12 लाख रुपये वसूले गए। इस प्रकार कुल 1.80 करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन किया गया। कैंडिडेट्स को परीक्षा से ठीक पहले 65 प्रश्न और उनके उत्तर रटवाए गए थे।
- पूछताछ में आरोपी अभय तिवारी (जो उस समय गोड्डा में प्रखंड आपूर्ति अधिकारी के रूप में कार्यरत था) ने बताया कि उसने खुद CGL परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल की थी। इसके अलावा, उसका भाई अक्षय तिवारी (महिला एवं बाल विकास विभाग में JSA) और अक्षय की पत्नी सुष्मा कुमारी (सतर्कता विभाग) भी इसी परीक्षा के माध्यम से चयनित हुए थे।
JSSC CGL परीक्षा के लिए बायोमेट्रिक का काम करने वाली कंपनी 'TDPL' (जिसमें अभय तिवारी मार्केटिंग मैनेजर था) को रेट विवाद के कारण हटाया गया था। इसके बाद यह काम पटना के मिथिलेश सिंह की एजेंसी वेबेल (Webel) को दिया गया, जिसे प्रश्न-पत्र छपाई और बायोमेट्रिक दोनों का जिम्मा मिला। अभय तिवारी ने मिथिलेश सिंह और खूंटी निवासी उमाकांत प्रमाणिक से संपर्क कर पेपर लीक कराया। बोकारो में प्रश्न-पत्र रटवाने के दौरान मिथिलेश सिंह और राकेश सिंह भी मौजूद थे।
JPSC के पूर्व अध्यक्ष गिरफ्तार, कुल 20 गिरफ्तारियां
इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए झारखंड CID ने सोमवार को JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते (L Khiangte) को परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया है। एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी के साथ ही इस पूरे केस में गिरफ्तार होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। उनकी यह गिरफ्तारी अभ्यर्थियों के व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच JPSC के तीनों सदस्यों द्वारा इस्तीफा दिए जाने के ठीक एक दिन बाद हुई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी शुरू की जांच
परीक्षाओं में हुए करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के कोण को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में अपनी जांच औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। ED अब इस घोटाले में शामिल आरोपियों की संपत्तियों, पैसों के प्रवाह (Money Trail) और अवैध वित्तीय साधनों की पड़ताल कर रही है।छात्रों को सीबीआई से कम जांच मंज़ूर नहीं
रांची में सोमवार 10 अगस्त को JPSC और JSSC भर्ती परीक्षा में हुई धांधली तथा पेपर लीक के विरोध में अभ्यर्थियों ने 'विधानसभा घेराव' आंदोलन शुरू किया। राज्य सरकार द्वारा 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और सुधार के आश्वासन के बावजूद, प्रदर्शनकारी छात्र JSSC-CGL परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने तथा पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग पर अड़े रहे। 'JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच' के बैनर तले राज्य भर से आए हजारों अभ्यर्थियों ने पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा की ओर शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला, जिसमें कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता भी शामिल हुए।
आंदोलन के दौरान राजधानी की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह मुस्तैद दिखी, लेकिन छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा था। अभ्यर्थियों के जुलूस ने विधानसभा मार्ग पर लगाए गए दो से तीन बैरिकेड्स को पार कर लिया और सुरक्षाबलों के साथ तीखी बहस तथा हल्की झड़प की स्थितियां बनीं। भीड़ को नियंत्रित करने और विधानसभा परिसर में घुसने से रोकने के लिए पुलिस ने जल तोपों (Water Cannons) और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया। वहीं दूसरी ओर, घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन को बल प्रयोग में संयम बरतने के कड़े निर्देश दिए गए थे।
बीजेपी कर रही है राजनीति
इसी बीच, आंदोलन को लेकर राज्य की राजनीति भी गरमा गई। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और विपक्ष के सदस्यों ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया, जिन्हें बाद में पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया; वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की। सरकार ने आश्वासन दिया कि अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जाएगी, लेकिन छात्र प्रतिनिधियों का स्पष्ट रुख है कि जब तक CGL परीक्षा रद्द करने और पूरे प्रकरण की CBI जांच का लिखित आदेश जारी नहीं होता, उनका यह विशाल आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।
- इस प्रदर्शन के दौरान पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने गिरफ्तारियां दी। मरांडी ने नेता विपक्ष राहुल गांधी पर हमले बोले। हालांकि यही मरांडी और बाकी बीजेपी नेता जंतर मंतर आंदोलन के दौरान चुप रह थे।