झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में झारखंड के युवकों  का आंदोलन उग्र रूप ले चुका है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 25 जुलाई से जारी इस विरोध प्रदर्शन में कई छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। युवकों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग की है और आगामी 10 अगस्त को राज्य विधानसभा के घेराव तथा 'तिरंगा यात्रा' का ऐलान किया है।

झारखंड आंदोलनकारियों की मांग क्या है

परीक्षा रद्द करने की मांग: अभ्यर्थी 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) को तुरंत रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
स्वतंत्र जांच की मांग: धांधली और पेपर लीक की जांच CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) या झारखंड से बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक स्वतंत्र समिति से कराने की मांग की जा रही है।
JPSC और JSSC में सुधार: भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के लिए आयोग की कार्यप्रणाली में व्यापक प्रशासनिक सुधार की मांग की जा रही है।
विधानसभा घेराव का ऐलान: मानसून सत्र के बीच अभ्यर्थियों ने 10 अगस्त को राज्यव्यापी 'तिरंगा मार्च' निकालने और विधानसभा घेराव का फैसला किया है।
प्रदर्शन के दौरान झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो 4 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। मंगलवार रात 2 महिलाओं समेत 5 और अभ्यर्थी उनके साथ भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिससे हड़ताल करने वालों की संख्या 6 हो गई।देवेंद्र नाथ महतो का ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर काफी गिर जाने से उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई थी। इसके बाद पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के जरिए महतो से बात की और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उनसे कम से कम पानी पीने का आग्रह किया। वांगचुक की अपील के बाद महतो ने पानी पीकर अपनी निर्जला हड़ताल खत्म की, हालांकि उनका अनिश्चितकालीन विरोध जारी है।
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हेमंत सोरने से छात्र नेता बातचीत को तैयार- लेकिन कैमरे के सामने

आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बयान जारी करते हुए कहा कि भर्ती परीक्षाओं का पेपर लीक सिर्फ झारखंड की समस्या नहीं है, बल्कि यह देश के कई राज्यों के युवाओं से जुड़ा एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। राज्य सरकार ने उप-विभागीय अधिकारी (SDM) कुमार रजत और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) धनंजय कुमार को धरना स्थल भेजकर छात्रों के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास पर बातचीत का न्योता दिया। छात्रों ने आपस में विचार-विमर्श के लिए समय मांगा है और शर्त रखी है कि बैठक की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए।
मुख्यमंत्री सोरेन ने राजभवन जाकर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की और उन्हें छात्रों के आंदोलन व अब तक हुई जांच की प्रगति की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जांच एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं। अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। सीआईडी (CID) ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में 18 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की है और JPSC के पूर्व अध्यक्ष से भी पूछताछ की गई है।

विपक्ष और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

बाबूलाल मरांडी (नेता प्रतिपक्ष, BJP): भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि CID जांच केवल मामले को दबाने और लीपापोती करने के लिए की जा रही है। उन्होंने 14वीं JPSC परीक्षा रद्द कर मामला तुरंत CBI को सौंपने की मांग की।
कांग्रेस (गठबंधन सहयोगी): सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कांग्रेस पार्टी ने भी अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन किया है। कांग्रेस नेता डॉ. अजय कुमार ने हाईकोर्ट के सिटिंग जज से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।