आरएसएस के रजिस्ट्रेशन पर सवाल उठाने वाले प्रियांक खड़गे ने स्वतंत्रता दिवस पर संघ की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि 'मैं आज़ादी की लड़ाई के दौरान शहीद हुए 500 कांग्रेस सदस्यों की सूची दे सकता हूँ, क्या RSS ऐसे 50 नामों की सूची दे सकता है'।
प्रियांक खड़गे और मोहन भागवत
आरएसएस के रजिस्ट्रेशन पर हाल में सवाल उठाने वाले कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने एक बार फिर संघ को कटघरे में खड़ा किया है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने आज़ादी की लड़ाई में आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि संघ बताए कि उसने देश के किस स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया था। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस आज़ादी की लड़ाई में शहीद हुए अपने 500 कार्यकर्ताओं की सूची दे सकती है, लेकिन क्या आरएसएस ऐसे 50 लोगों के नाम भी बता सकता है?
प्रियांक खड़गे का यह बयान तब आया है जब कर्नाटक सरकार के प्रस्तावित एक क़ानून को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच पहले से ही सियासी टकराव चल रहा है। इस क़ानून में सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल के लिए अनुमति लेने का प्रावधान किया गया है, जिसे लेकर बीजेपी का आरोप है कि सरकार आरएसएस की शाखाओं को निशाना बनाना चाहती है। इसी बीच अब स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में प्रियांक खड़गे ने कहा कि उनका आरएसएस से सिर्फ एक सवाल है कि आरएसएस बताए कि उसने किस स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया? उन्होंने पूछा कि क्या संघ पचास ऐसे नाम बता सकता है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपनी जान दी?
प्रियांक ने यह भी आरोप लगाया कि देश के विभाजन के बाद हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान भी आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठते हैं। उन्होंने पूछा कि उस समय संगठन ने लोगों की सुरक्षा के लिए क्या किया था।
RSS के रजिस्ट्रेशन पर भी उठाया सवाल
प्रियांक खड़गे ने आरएसएस के कानूनी दर्जे को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आरएसएस को प्रतिबंधित करने की बात करना भी व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि उनके अनुसार संगठन का औपचारिक पंजीकरण ही नहीं है।
उन्होंने कहा, आरएसएस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। संघ प्रमुख मोहन भागवत और बीएल संतोष ने जो कहा कि संगठन पर बैन नहीं लग सकता, वह सही है। लेकिन इसकी वजह यह है कि आरएसएस पंजीकृत ही नहीं है। किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाने के लिए उसका पहले रजिस्टर्ड होना भी जरूरी है। प्रियांक खड़गे
कर्नाटक गृहमंत्री
सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल वाले बिल का बचाव
कर्नाटक सरकार द्वारा लाए जा रहे 'कर्नाटक रेगुलेशन ऑफ़ यूज ऑफ़ गवर्नमेंट प्रिमाइसेस एंड पब्लिक प्रॉपर्टी बिल, 2026' का बचाव करते हुए खड़गे ने कहा कि यह कानून किसी एक संगठन को निशाना बनाने के लिए नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित कानून में कहीं भी किसी संगठन, संस्था या राजनीतिक दल का नाम नहीं लिखा गया है। खड़गे ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी कार्यक्रम, रैली या सभा के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना ज़रूरी होगा। हालाँकि निजी परिसरों में होने वाली गतिविधियों पर इस कानून का असर नहीं पड़ेगा।
बीजेपी को 'प्रियांक-फोबिया' हो गया?
प्रियांक ने कहा, 'जो भी गतिविधि करनी है, अपने घर या अपने कार्यालय परिसर में कीजिए। सरकार को सार्वजनिक संपत्तियों और सरकारी जगहों के उपयोग को नियंत्रित करने का अधिकार है।' उन्होंने बीजेपी पर बिना बिल पढ़े विरोध करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी को 'प्रियांक-फोबिया' हो गया है।
बीजेपी ने किया पलटवार
प्रियांक खड़गे के बयान पर बीजेपी नेता बी.एल. संतोष ने जवाब दिया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार संतोष ने कहा कि किसी संगठन का अस्तित्व केवल रजिस्ट्रेशन से तय नहीं होता। उन्होंने कहा, 'आरएसएस उस समय भी पंजीकृत नहीं था और आज भी नहीं है। लेकिन उसका अस्तित्व करोड़ों लोगों के विश्वास से बना है। संगठन को रजिस्ट्रेशन की नहीं, समाज के भरोसे की ज़रूरत होती है।'
बीएल संतोष ने यह भी कहा कि भारत की आज़ादी केवल नमक सत्याग्रह या चरखा चलाने से नहीं मिली, बल्कि लाखों स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों के बलिदान से देश आज़ाद हुआ।
भागवत को लिखा था ख़त
संघ के रजिस्ट्रेशन का ताज़ा विवाद तब शुरू हुआ जब जून महीने में प्रियांक खड़गे ने आरएसएस के रजिस्ट्रेशन, कानूनी दर्जे और फंडिंग जैसी डिटेल को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिख डाला था। इसमें उन्होंने संगठन से अपने कानूनी दर्जे, रजिस्ट्रेशन, फंडिंग के स्रोत और खर्च का पूरा ब्योरा देने को कहा था। प्रियांक खड़गे ने लिखा था कि आरएसएस बहुत बड़ा संगठन है, इसकी 60 हज़ार से ज्यादा शाखाएं चल रही हैं, इतना बड़ा संगठन कानून से ऊपर नहीं रह सकता।
प्रियांक ने कहा, 'संगठन की इतनी बड़ी मौजूदगी, खासकर जब इसमें नियमित रूप से लोगों को इकट्ठा करना, वर्दी पहनकर रूट मार्च करना और बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुँचना शामिल हो, इसे कोई निजी या अनौपचारिक व्यवस्था नहीं माना जा सकता। इससे कानूनी स्थिति, जवाबदेही, वित्तीय पारदर्शिता, कानून-व्यवस्था, मंज़ूरी, फंडिंग के स्रोत और भारत के संविधान व कानूनों का पालन करने जैसे वाजिब सवाल उठते हैं।' उन्होंने कहा, 'संविधान वाले लोकतंत्र में कोई भी संगठन, चाहे कितना भी पुराना या बड़ा हो, जांच से ऊपर नहीं हो सकता। आरएसएस राष्ट्रवाद, अनुशासन और कर्तव्य की बात करता है तो उसे खुद इन मूल्यों को दिखाना चाहिए।'
मोहन भागवत का जवाब
तब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया था। केरल में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, 'आरएसएस को रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं है क्योंकि यह सरकार से कोई फंड नहीं लेता। पिछले 100 साल से संगठन बिना रजिस्ट्रेशन के काम कर रहा है। पहले किसी ने भी यह सवाल नहीं उठाया। हिंदू धर्म भी रजिस्टर्ड नहीं है। कई अन्य संस्थाएं भी बिना रजिस्ट्रेशन के काम करती हैं। जो संगठन सरकारी फंड लेते हैं, उन्हें रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है। हम नहीं लेते। 100 साल से ज़्यादा समय में किसी ने हमसे नहीं कहा कि हमें रजस्टर्ड होना ही होगा।' भागवत ने प्रियांक के सवालों को राजनीतिक हथकंडा बताया और कहा कि लोगों के मन में भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है।संघ का पैसा कहाँ से आता है: प्रियांक
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने RSS के रजिस्ट्रेशन और फंडिंग का हिसाब देने से इनकार करने वाले संघ प्रमुख मोहन भागवत से पूछा था कि संघ का पैसा कहाँ से आता है? संघ क़ानून की पड़ताल से परे क्यों है? प्रियांक ने आरएसएस की कानूनी स्थिति पर अपना रुख दोहराते हुए कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संस्था क़ानूनी जाँच से ऊपर नहीं है। उन्होंने आरएसएस को कानून के दायरे में आने और जवाबदेही मानने को कहा है। मंत्री ने क़ानून का पालन करने और अपने अधिकारियों या क़ानूनी सलाहकारों को जवाब देने के लिए भेजने को कहा है। प्रियांक ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भागवत और आरएसएस से बड़े कई सवाल किए हैं।
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा था, "मोहन भागवत ने कहा- 'क्या हम कुछ गुप्त रूप से कर रहे हैं? हम संघ के नाम पर खुलेआम ऐसा कर रहे हैं।' मैं भी यही पूछ रहा हूँ। अगर यह संघ के नाम पर किया जा रहा है, तो असल में संघ क्या है? इसके पीछे कौन लोग हैं? आपका पैसा कहां से आता है? मैं भी यही पूछ रहा हूं। वह भी यही कह रहे हैं और हम भी यही कह रहे हैं।"बहरहाल, प्रियांक खड़गे का यह ताज़ा बयान तब आया है जब कर्नाटक सरकार सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाला क़ानून लाने की तैयारी कर रही है। बीजेपी का आरोप है कि यह क़ानून आरएसएस की शाखाओं और अन्य संगठनों की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश है, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि यह केवल सार्वजनिक संपत्तियों के व्यवस्थित उपयोग और न्यायालयों के निर्देशों को लागू करने के लिए लाया जा रहा है।
इसी मुद्दे पर अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज हो गई है। कांग्रेस आरएसएस की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका पर सवाल उठा रही है, जबकि बीजेपी का कहना है कि आरएसएस ने समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में बड़ा योगदान दिया है तथा सरकार केवल राजनीतिक कारणों से संगठन को निशाना बना रही है।