भाजपाई बनने के बाद पचौरी ने क्या कहाः उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस ने एक समय नारा लगाया था, जात पर न पात पर मोहर लगेगी हाथ पर, कांग्रेस इससे पलट गई है।’ उन्होंने कहा, ‘सेना के कामकाज पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाये जाते, लेकिन लगाये गये। यह उचित नहीं मानता।’ रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा के आमंत्रण को ठुकरा देने की कांग्रेस की बात से मुझे आघात पहुंचा। अयोध्या का ताला किसने खोला। इसका प्रत्यक्षदर्शी हूं। बावजूद इसके आमंत्रण को ठुकराना समझ नहीं आया।’ सुरेश पचौरी ने कहा, ‘तत्कालीन प्रधानमंत्री ने मुझे भेजा था, धर्माचार्यों के पास मेरे पास पत्र है। प्रमाण हैं। इस सबके बाद निमंत्रण पत्र अस्वीकार करना गले नहीं उतरा।’ पचौरी ने कहा धार्मिक निर्णय उद्वेलित करने वाले हो रहे थे। राम के अनदार पर कांग्रेस को छोड़ने का फैसला लिया। राख के ढेर पर शोले है न अंगारे हैं, कुछ तो बात होगी जो हम बेवफा हो गए। सुरेश पचौरी ने कहा, ‘मैं बिना शर्त भाजपा में आया हूं, पद की लालसा में नहीं। पद की लालसा कभी कांग्रेस में भी नहीं की।