अवैध एवं कथित जहरीली शराब से बरा मंडल क्षेत्र में बीजेपी नेता का परिवार भी प्रभावित हुआ है। अब तक नौराज और गूगरा खुर्द गांव में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज हैं। भोपाल से संजीव श्रीवास्तव की रिपोर्टः
मध्य प्रदेश में जहरीली शराब से 22 मौतें हुई हैं
मध्य प्रदेश के आबकारी महकमे ने जिन ब्रांड्स को शनिवार 05 सितंबर को पीने योग्य करार दिया, उसे पीने के बाद, शनिवार शाम से अब तक 22 लोगों की जानें चली गई हैं। जबकि 100 से ज्यादा प्रवित लोग, विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। उधर सरकार अब लीपापोती में जुटी हुई है। भोपाल से करीब दो सौ किलोमीटर दूर सागर के बंडा में अवैध एवं जहरीली शराब ने कहर बरपाया है। बंडा तहसील (विधानसभा क्षेत्र भी है) के आधा दर्जन से ज्यादा गांवों के लोग, ‘बाॅम्बे’ और ‘सागर गोल्ड’ ब्रांड नामक शराब पीने के बाद बीमार हुए हैं।
शनिवार देर शाम को बंडा में पहली मौत दर्ज हुई थी। रविवार सुबह से पीड़ितों के अस्पताल पहुंचने का क्रम तेज हुआ। कई लोगों की मौतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आये। मगर तब तक देर हो चुकी थी। सोमवार को इस रिपोर्ट को लिखे जाने के समय तक, मौतों का आंकड़ा 22 हो गया था। जबकि 112 प्रभावित लोग बंडा सिविल डिस्पेंसरी, सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराये जा चुके थे। भर्ती लोगों में कई की हालत गंभीर बनी हुई है। शराब का सेवन करने वालों की आंखों में धुंधलापन, बुखार, चक्कर और उल्टी आदि की शिकायतें होना आरंभ हुईं। ये सिलसिला बढ़ता चला गया।
बीजेपी नेता का परिवार भी शिकार
अवैध एवं कथित जहरीली शराब से बरा मंडल क्षेत्र के बीजेपी महामंत्री हरनाम राय और एक पूर्व सरपंच के भतीजे दिग्विजय लोधी की भी मौतें हुईं हैं। अब तक नौराज और गूगरा खुर्द गांव में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज हैं। बंडा से भाजपा के विधायक हैं। फ़ॉरेंसिंक एक्सपर्ट्स ने कहर बरपाने वाली शराब में मिथाइल अल्कोहल की आशंका जताई है। जिला कलेक्टर प्रतिभा पाल ने पोस्टमोर्टम रिपोर्ट आने के बाद मीडिया से बातचीत में अल्कोहल के सेवन से मौतों की पुष्टि की है।
शनिवार सुबह क्लीनचिट, फिर तांडव
मध्य प्रदेश के आबकारी महकमे ने बाम्बे एवं सागर गोल्ड ब्रांड को इसी पांच सितंबर को पीने योग्य करार किया था। असल में दैनिक भास्कर ने तीन दिन पहले दो सितंबर को एक स्टोरी की थी। स्टोरी में अवैध शराब से जुड़ी कहानी की गई थी। ढाबों-गलियों में इसके बिकने का जिक्र था। शराब अमानक होने की भी बात स्टोरी में तथ्यों के साथ कही गई थी।
आरोप है, आबकारी महकमे ने स्टोरी का गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस और प्रशासन भी हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। हद तो तब हुई, जब आबकारी महकमे ने उपरोक्त दोनों ब्रांड्स को पीने योग्य करार दे दिया। इसके बाद भास्कर का यह भी दावा रहा, ‘आबकारी महकमे ने जिन शराब ब्रांड्स को पीने योग्य करार दिया, उसकी फाॅरेंसिक जांच नहीं करायी।’
मप्र में शराब माफिया में ‘वॉर’
मध्य प्रदेश में साल 2023 में मोहन यादव के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से राज्य में शराब माफिया और सिंडिकेट में खींचतान संबंधी खबरें लगातार सुर्खियां बनीं हुईं हैं। शिवराज सरकार के दौर के सिंडिकेट टूटे हैं। नए सिंडिकेट अस्तित्व में आये हैं। कई बड़े प्लेयर किनारे हैं। राज्य के एक बड़े लीकर किंग के तो यूपी शिफ्ट हो जाने और वहां खुश होने संबंधी खबरें भी चर्चा में हैं।
महीने भर में दूसरा बड़ा घटनाक्रम
बीते महीने भर में अवैध और जहरीली शराब को लेकर मध्य प्रदेश के सुर्खियों में होने का ये दूसरा बड़ा मसला है। गुजरात के अहमदाबाद में बीते माह जहरीली और अवैध शराब से मौतें हुईं थीं। घटनाक्रम वाले क्षेत्र के एसपी ने प्रेस कांफ्रेंस करके उज्जैन कनेक्शन का आरोप लगाया था। वहां हुई मौतों के बाद गिरफ्तारियों में उज्जैन के दो लोगों के नाम आये थे। राजगढ़ से एक को पुलिस ने उठाया था।इधर, सागर के बंडा के ताजा कांड के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने यूपी के ललितपुर कनेक्शन का जिक्र किया है। उस कोण को तलाशने की बात सागर के एसपी अनुराग सुजानिया ने मीडिया से बातचीत में कही भी है।
सुजानिया के एसपी रहते दूसरा घटनाक्रम
अनुराग सुजानिया, साल 2021 में जब मुरैना के एसपी थे तब मुरैना में ऐसा ही हादसा हुआ था। जहरीली एवं अवैध शराब को पीने से तब 24 जानें गईं थीं। जांच में पुलिस संरक्षण में अवैध शराब की बिक्री की बात कही गई थी। इसके बाद सरकार ने उन्हें, मुरैना एसपी पद से हटा दिया था।
सागर हादसे के बाद राज्य सरकार ने सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते, आबकारी उप निरीक्षक रोशनी उरेते, बंडा थान प्रभारी राजेन्द्र सिंह कुशवाहा और गूगरा चैकी प्रभारी पूरनलाल लड़िया को सस्पेंड किया है। जबकि फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को मुख्यालय ग्वालियर अटैच किया है।
पुलिस ने अब तक कुल 30 लोगों पर एफआईआर की है और 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। तितरवारा का मास्टरमाइंड फरार बताया गया है। आधा दर्जन से ज्यादा शराब की दुकानें/ठेके भी सील किए गए हैं। सैंपल लिए गए हैं। जांच के लिए भेजे गए हैं।
लीपापोती का क्रम तेज
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई की बात कही है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने भी यही वाक्य दोहराया है। देवड़ा के पास आबकारी महकमा है। अन्य उप मुख्यमंत्री (स्वास्थ्य महकमे के मुखिया हैं) राजेन्द्र शुक्ल ने मौके का मुआयना किया है। उधर विपक्ष हमलावर है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को फेल करार दिया है। उन्होंने कहा है, ‘माफिया और सिंडिकेट को संरक्षण है, इसलिए बार-बार मध्य प्रदेश जहरीली एवं अवैध शराब को लेकर सुर्खियों में हैं। लोग मारे जा रहे हैं। माफिया का कुछ नहीं बिगड़ रहा है। इस मामले में भी माफिया बच जायेगा। छुटभैयों पर कार्रवाई होकर रह जायेगी।’मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता विपक्ष उमंग सिंघार बुंदलेखंड मेडिकल कॉलेज सागर पहुंचे थे। उन्होंने पीड़ितों से मिलकर पूरा ब्यौरा लिया। गठजोड़ की बातें उन्होंने भी कहीं हैं। सरकार के संरक्षण में माफिया के पनपने का आरोप लगाया है। पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी उन्होंने की है।