बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के बुधनी इलाके में आदिवासियों की जमीन पर बुलडोजर चला तो पूर्व सीएम और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान नाराज़ हो गये। पहली बार उनकी राजनीति को उनके घर में ही किसी बीजेपी नेता ने ही चुनौती दे दी है। संजीव श्रीवास्तव की रिपोर्टः
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान बुधनी में धरने पर
मध्य प्रदेश के 17 सालों तक मुख्यमंत्री रहे, मोदी सरकार में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का ‘मुगालता’, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दूर कर दिया है! इस आशय की चर्चा, सूबे के राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ प्रशासनिक वीथिकाओं में हो रही हैं। दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री एवं विदिशा के सांसद शिवराज सिंह चौहान के निर्वाचन क्षेत्र में रविवार को मोहन यादव का ‘बुलडोजर’ चला है। राज्य सरकार की इस कार्रवाई से शिवराज सिंह और उनके समर्थक तिलमिला उठे हैं। राज्य सरकार के बुलडोजर एक्शन के खिलाफ, स्वयं शिवराज सिंह, स्थानीय विधायक और अन्य भाजपा नेताओं को धरना तक देना पड़ा है। शिवराज सिंह ने पूरी कार्रवाई के खिलाफ बेहद तल्ख एवं सख्त टिप्पणियां की हैं। प्रदेश नेतृत्व से लेकर दिल्ली तक को शिकायतें की हैं।
वन भूमि पर अतिक्रमण पर हुआ टंटा
बता दें, पूरा टंटा शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा के अंतर्गत आने वाले बुधनी विधानसभा क्षेत्र में हुआ। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोसमी गांव में लंबे समय से वन भूमि पर काबिज एक दर्जन बरेला समुदाय के आदिवासियों की घर-गृहस्थी को रविवार दोपहर को बुलडोज किया गया। इनकी खड़ी फसल को रौंद डाला गया। कुएं को मिट्टी से पूर दिया गया है। ये कार्रवाई वन विकास निगम द्वारा की गई। वन महकमा, मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास है। शिवराज सिंह के मुख्यमंत्री पद से हटने और मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद से इस गांव पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई थी। बीते साल भी इन्हें हटाने का प्रयास हुआ था। शिवराज सिंह चौहान मसले को लेकर मुख्यमंत्री यादव से मिले थे। उनका वीटो चला था। कार्रवाई रूक गई थी।
रविवार 11 अक्टूबर को इनके खिलाफ एक्शन हो गया। भनक लगी तो शिवराज सिंह मौके पर पहुंचे। शिवराज सिंह के पहुंचते ही कार्रवाई के पीड़ित परिवारों ने उन्हें घेर लिया। महिलाएं चीख-चीखकर रोने लगीं। बच्चे भी बिलखते रहे। क्रुंदन सुनने के बाद, शिवराज सिंह ने सभी को ढांढस बंधाया। धरना स्थल पर बैठकर पीड़ितों की पीड़ा सुनी। शिवराज सिंह के सक्सेसर एवं बुधनी से भाजपा के विधायक रमाकांत भार्गव और अन्य नेतागण भी धरनारत पीड़ितों के साथ बैठे रहे। मीडिया का जमघट लगा रहा।
शिवराज का दर्द मीडिया के सामने आया
शिवराज ने मीडिया से कहा, ‘मेरे क्षेत्र में जुल्म और अन्याय की इंतिहां हुई है। जिन घरों में सुबह तक बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब चीखें सुनाई दे रही हैं। महिलाएं छाती पीट-पीटकर रो रही हैं।’ शिवराज सिंह ने राज्य के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन किया। अन्य अधिकारियों को फोन लगाये। राहत नहीं मिली। इस सबके बाद शिवराज सिंह ने प्रभावित परिवारों के लिए नए घर बनवाने और स्थायी व्यवस्था होने तक उनके रहने-खाने का इंतजाम का भरोसा दिलाया। शिवराज सिंह ने बेहद तल्ख अंदाज में ये भी कहा, ‘इन्हीं के वोट से मोहन जी, मुख्यमंत्री बने हैं। ये सचमुच में मेरे लिए बहुत दुःखद है।’
शिवराज सिंह ने आगे कहा, ‘लोगों के वर्षों पुराने घर गिरा दिए गए, फसलें कुचल दी गईं और कुएं तक पूर दिए गए। लोगों की मेहनत को कुचल दिया गया।’ उन्होंने इस कार्रवाई को शर्मनाक बताते हुए आगे कहा, ‘ऐसा करने वाले इतने हृदयहीन और संवेदनहीन हैं कि उन्हें ईश्वर भी माफ नहीं करेगा।’ मौके पर वन विकास निगम और प्रशासन के किसी बड़े अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर भी शिवराज ने नाराजगी जताई। उन्होंने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को फोन कर मामले की जानकारी दी।
प्रभावित परिवारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि गरीबों को बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करने और भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस ने ली चुटकियां!
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए कहा, ‘शिवराज सिंह चौहान के पहले से रोकने के निर्देश के बावजूद मोहन यादव सरकार ने कार्रवाई की। ये मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच टकराव की कहानी है। गरीब आदिवासी इसकी कीमत नहीं चुकाएंगे। कांग्रेस आदिवासी अधिकारों की लड़ाई जमीन पर लड़ेगी। मोहन सरकार को जवाब देना होगा।’ उधर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, ‘मोहन-मामा की आपसी खींचतान में आदिवासी परिवार उजड़ रहे हैं। आदिवासी समुदाय के परिवारों की फसलें नष्ट की जा रही हैं। भाजपा सरकार की आपसी खींचतान के कारण गरीब आदिवासी परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।’ सिंघार ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘आखिर आदिवासियों का कसूर क्या है? सत्ता की आपसी खींचतान की सजा गरीब आदिवासी परिवार क्यों भुगतें? मोहन यादव जी, आदिवासियों के खेत और घर उजाड़ने वाली इस कार्रवाई पर जवाब दीजिए। प्रभावित परिवारों को न्याय और सुरक्षा कब मिलेगी?’
कैबिनेट के साथी नाखुश!
मोहन यादव काबीना के कनिष्क से लेकर वरिष्ठ साथियों की कथित खिन्नता से जुड़े अनेक घटनाक्रम पहले भी सामने आये हैं। पार्टी संगठन के पदाधिकारियों से टकराव और संघ से जुड़े पदाधिकारियों-स्वयंसवेकों की की कथित अनदेखी संबंधी खबरें भी मीडिया की सुर्खियां बनी हैं। सीनियर मिनिस्टर प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय तो खुलकर अपनी पीड़ा व्यक्त करते दिखे हैं। विधानसभा के भीतर में अनेक ऐसे मौके आये हैं, जब विधायकों ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। मुख्यमंत्री उज्जैन से आते हैं। उनके अपने गृह जिले के विधायकों ने सदन में मोहन यादव से तीखे सवाल पूछकर सरकार को संकट में डाला है।
शिकवे-शिकायत संगठन तक पहुंचे हैं। मगर संगठन भी मोहन यादव के आगे ‘मजबूर’ नजर आया है। यहां बता दें, शिवराज सिंह चैहान ने पूरे मामले का ब्यौरा और घटनाक्रम, मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के अलावा केन्द्रीय नेतृत्व एवं सेन्ट्रल के अन्य जिम्मेदारों तक पहुंचा दिया है, ऐसा सूत्रों ने बताया है।
सरकार बोली - ‘प्लांटेशन नष्ट किया, केस’
सरकारी सूचना में बताया गया, ‘वन विकास निगम सीहोर के वन कक्ष 426 में 2021 में प्लांटेशन किया गया। इस एरिया के एक हिस्से सिंहपुर में 10 आदिवासी परिवारों ने प्लांटेशन को नष्ट कर खेती चालू कर दी। झोपड़ी बना ली। सभी के खिलाफ वन अपराध का केस दर्ज था। सबको बेदखली के नोटिस दिए गए थे। अब अवैध झोपड़ियों एवं अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई है।