‘पर्ची वाले’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किस उधेड़बुन में हैं? माजरा क्या है? ये और ऐसे अनेक सवाल, उनके अपने महाकाल की नगरी उज्जैन में गूंज रहे हैं। इन सवालों की अनुगूंज, मध्य प्रदेश के राजनैतिक गलियारों और प्रशासनिक वीथिकाओं में भी हो रही है।
उज्जैन में रविवार को ‘लाइट, कैमरा और एक्शन’ वाला नजारा रहा। मीडिया को जुटाया गया था। भोपाल से मीडिया वाले ले जाये गए थे। मौका था, मुख्यमंत्री यादव के उज्जैन स्थित पैतृक मकान पर बुलडोजर ‘चलने’ के पहले, स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा अपने ही इस (पैतृक) मकान पर कुदाल चलाने का।
दरअसल, सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण की जद में मुख्यमंत्री का पैतृक मकान भी आ रहा है। खचाखच मीडिया की भीड़, स्टील एवं वीडियो कैमरों के बीच, मुख्यमंत्री ने पहले ‘घर’ की पूजा-अर्चना की। घर को बाहर-भीतर से मन भरकर निहारा। बाद में कुदाली चलाई। कुदाल चलाते हुए वे ‘भावुक’ भी हुए।
यहां बता दें, साल 2028 के सिंहस्थ के लिए उज्जैन की प्रमुख सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। इसके तहत खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक जाने वाली 730 मीटर लंबी रोड को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है।
कुल 272 इमारतें इसके आड़े आ रही हैं। इनमें मुख्यमंत्री का पैतृक मकान और उनकी बड़ी बहन (उज्जैन नगर निगम की सभापति) कलावती यादव का घर भी शामिल है।
अब्दालपुरा, मुस्लिम बाहुल्य एरिया है। एक दर्जन से कुछ ज्यादा मजार और मस्जिदें (दो बड़ी एवं प्राचीन मस्जिदें) भी प्रस्तावित सड़क की जद में हैं। इसके अलावा दो मंदिर भी इस रास्ते में आ रहे हैं। इसे लेकर कई दिनों से उधेड़बुन चल रही है। नपती हुई! लाल निशान लगाए गए।
तीन दशक पहले अन्य घर में शिफ्ट
बताया गया है, मोहन यादव और उनका परिवार करीब तीन दशक पहले, अब्दालपुरा से अन्यत्र शिफ्ट हो चुका है। उनकी बहन कलावती यादव भी घर को पुराने घर छोड़कर अन्यत्र निवास करती हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद मुख्यमंत्री यादव, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के वीसी के लिए ईयर मार्क्ड घर को अपना सरकारी निवास बना चुके हैं। जबकि कलावती यादव, नगर निगम सभापति के नाते मिले घर में निवासरत हैं।
एक तीर से कई निशाने!
मुख्यमंत्री मोहन यादव के मूव को प्रेक्षक ‘एक तीर से कई निशाने’ करार दे रहे हैं। कहा जा रहा है, ‘अपने ही घर पर कुदाल चलाने के बाद, इस मार्ग की बाकी इमारतों को बुलडोज करना ज्यादा आसान हो जाएगा।’
सीएम के ‘मूव’ की भविष्य को अतिक्रमण विरोधी मुहिमों में या ऐसे अन्य अवसरों के लिए, नज़ीर के तौर पर पेश किया जाएगा।
मोहन यादव को मुख्यमंत्री बने ढाई वर्ष से कुछ ज्यादा का वक्त हो चुका है। अपने इस काल में मोहन यादव की सफलताओं से कहीं ज्यादा विवाद जुड़े हुए हैं। जिस उज्जैन में उधेड़बुन की चर्चा है, उससे जुड़े कारणों की पांत भी लंबी है।
सिंहस्थ के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव बीते वर्ष लैंड पुलिस स्कीम लेकर आये थे। स्कीम का भारी विरोध हुआ था। पूरा विवाद दिल्ली तक पहुंचा था। अमित शाह को बैठक लेना पड़ी थी। बाद में स्कीम वापस हुई थी।
मुख्यमंत्री, अब रीयल स्टेट के कारोबार से सीधे जुड़े हुए नहीं है। उनका परिवार इस व्यवसाय में है। बीते दिनों इंडियन एक्सप्रेस ने जमीनों से जुड़ी स्टोरी की थी। स्टोरी के टारगेट पर सीएम रहे थे। पार्टी ने सफाई दी थी। मुख्यमंत्री स्टोरी को लेकर कुछ नहीं बोले थे।
ऐसा माना जा रहा है, सिंहस्थ से जुड़े तमाम संभावित विवादों और संभावित डैमेज को मुख्यमंत्री ने अपने ही घर पर कुदाल चलाकर अभी से ही काफी हद तक कंट्रोल कर लिया है।
ये भी कहा जा रहा है, ‘उज्जैन में आगे के सिंहस्थ कार्यों में वर्ग विशेष की इमारतों एवं इबादतगाहों और विरोधियों पर बुलडोजर चलाकर, राजनीतिक लाभ की राह भी आसान कर ली है।’
इन इलाकों में भी हो रहा चौड़ीकरण का काम
उज्जैन शहर में कोयला फाटक से सती गेट, गोपाल मंदिर, ढाबा रोड, केडी गेट से जूना सोमवारिया, दो तालाब नानाखेड़ा से नीलगंगा और नीलगंगा से हरिफाटक ब्रिज समेत 12 से ज्यादा जगहों पर सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है।लाइट, कैमरा-एक्शन एपीसोड को लेकर एनडीटीवी के जर्नलिस्ट अनुराग द्वारी का सवाल सबसे सटीक रहा। उन्होंने अपने एक्स पर लिखा, ‘घर टूटना किसी के लिये भावुक पल होता है। मप्र के मुख्यमंत्री के लिये भी होगा। घर से जुड़ी कितनी यादें होती हैं...लेकिन इस भावुकता में कई पत्रकार बहे जा रहे हैं। मीडिया संस्थान, यू-ट्यूबर्स भी...काश कोई पूछता कि जब बुलडोजर फैसलों में घर तोड़े जाते थे, क्या उन लोगों की संवेदना पर उनकी कलम रोई थी?’