मध्य प्रदेश शराब घोटाले को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी से जांच की मांग की है। कांग्रेस ने इस मामले में सात सवाल उठाए हैं और पूछा है कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी।
मध्य प्रदेश में शराब ठेकों से जुड़े कथित घोटाले को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि यदि वह भ्रष्टाचार को संरक्षण नहीं दे रहे हैं, तो मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आदेश दें। विवाद के केंद्र में भोपाल की दो शराब दुकानों के ठेके, 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की कथित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) और एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के आरोप हैं।
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की सोशल मीडिया पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री से जवाब मांगा। पटवारी ने इस मामले में सात सवाल उठाए हैं और पूछा है कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी।
इस मामले में बीजेपी और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। हालांकि, राज्य सरकार ने पहले ही संबंधित अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार से हटाकर विभागीय जांच के निर्देश दिए थे।
क्या है पूरा मामला
विवाद की शुरुआत भोपाल में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान दो शराब दुकानों के ठेकों में कथित अनियमितताओं की खबरों से हुई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ठेका प्रक्रिया और सुरक्षा राशि जमा करने में कई गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। मामले में सबसे अहम आरोप 2,75,53,535 रुपये की ई-फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (e-FDR) से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने इस राशि की FDR जारी करने से इनकार किया था। इसके बावजूद कथित तौर पर यह दस्तावेज ठेका प्रक्रिया में स्वीकार कर लिया गया।
इसके अलावा, सुरक्षा राशि निर्धारित समय के बाद जमा करने और बैंक गारंटी के बिना 76 लाख रुपये की सुरक्षा राशि स्वीकार किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इन अनियमितताओं की जांच करके यह पता लगाया जाना चाहिए कि दस्तावेजों को स्वीकार करने और ठेके दिलाने में किन अधिकारियों की भूमिका थी। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच से अंतिम निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
मोहित गोगिया के कथित बयान में एक करोड़ रुपये की रिश्वत का आरोप
इस विवाद में दिल्ली के कारोबारी मोहित गोगिया के नाम से प्रसारित एक कथित बयान भी सामने आया है। इसमें आरोप लगाया गया कि भोपाल में दो शराब दुकानों के ठेके हासिल करने के लिए एक करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन दुकानों को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र में जसवंत कुमार के नाम पर आवंटित किए जाने का दावा किया गया है। कथित बयान में रिश्वत की रकम में से 50 लाख रुपये नकद और बाकी 50 लाख रुपये एक होटल संचालक के बैंक खाते में भेजे जाने का आरोप है। बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि ठेके हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी FDR को मंजूरी दिलाने और आवश्यक लाइसेंस के बिना शराब बिक्री को सुगम बनाने में मदद की गई। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।दीपम रायचूरा को पद से हटाया गया, जांच के आदेश
आरोपों के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) दीपम रायचूरा को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया। देवड़ा ने कहा कि शराब ठेकों में कथित अनियमितताओं की जानकारी उन्हें मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मिली थी। उन्होंने संबंधित विभाग को मामले की शीघ्र जांच करने के निर्देश दिए। देवड़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अवधि में रायचूरा भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर तैनात थे और उस समय उनके OSD के रूप में काम नहीं कर रहे थे। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें OSD के अतिरिक्त प्रभार से हटाया गया। दूसरी ओर, रायचूरा ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को झूठा और निराधार बताया है। जांच के नतीजे आने तक इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।जीतू पटवारी के प्रधानमंत्री से सात सवाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए सवाल उठाया कि 2.75 करोड़ रुपये की कथित फर्जी FDR और एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत का पूरा मामला आखिर किसके संरक्षण में चल रहा था।
पटवारी के सवालों का मुख्य केंद्र इस तरह है:
- 1. FDR कैसे स्वीकार हुई? जब बैंक ने कथित तौर पर 2,75,53,535 रुपये की FDR जारी ही नहीं की, तो उसे ठेका प्रक्रिया में स्वीकार कैसे कर लिया गया?
- 2. नियमों के विपरीत सुरक्षा राशि क्यों स्वीकार की गई? सुरक्षा राशि निर्धारित समय से 22 दिन देर से जमा होने के बावजूद उसे मंजूरी किसने दी?
- 3. 76 लाख रुपये की सुरक्षा राशि किसके आदेश पर स्वीकार हुई? बैंक गारंटी के बिना इतनी बड़ी रकम की सुरक्षा को मंजूरी देने का निर्णय किसने लिया?
- 4. एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत किसके इशारे पर दी गई? शराब ठेके हासिल करने के लिए कथित भुगतान की पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी?
- 5. फर्जी दस्तावेज स्वीकार करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी? कथित गड़बड़ियों के बावजूद सुरक्षा राशि और दस्तावेज स्वीकार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
- 6. वल्लभ भवन में कथित रूप से शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? राज्य सचिवालय में बैठे अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कब की जाएगी?
- 7. प्रधानमंत्री निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेंगे या नहीं? पटवारी ने प्रधानमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
पटवारी का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से इस मामले में स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के कारण अब प्रधानमंत्री को सामने आकर जवाब देना चाहिए।
जयराम रमेश ने बीजेपी सरकारों पर साधा निशाना
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी की राज्य सरकारों में भ्रष्टाचार के नए मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में मध्य प्रदेश में पहले सामने आए भूमि घोटाले का उल्लेख करते हुए अब शराब ठेकों में कथित घोटाले का मुद्दा उठाया। रमेश ने कहा कि जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री के सामने सात सवाल रखे हैं। यदि प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार को संरक्षण नहीं दे रहे हैं, तो उन्हें मामले की निष्पक्ष जांच का आदेश देना चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान का भी उल्लेख किया। रमेश के मुताबिक, चौहान भी मध्य प्रदेश सरकार की आलोचना कर चुके हैं। हालांकि, इस संदर्भ में उन्होंने जिस आलोचना का उल्लेख किया, उसका विस्तृत ब्योरा रिपोर्ट में नहीं दिया गया है।बहरहाल, इस मामले में तीन प्रमुख सवाल हैं—कथित FDR की वास्तविक स्थिति क्या थी, शराब ठेकों की प्रक्रिया में किन अधिकारियों ने निर्णय लिए और एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के आरोपों की पुष्टि के लिए क्या सबूत मौजूद हैं।