मध्य प्रदेश में RSS के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की खबरों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। क्या संघ किसी बड़े कदम या रणनीति की तैयारी में है?
आरएसएस जब अपने बेहतरीन दौरों में से एक में है तो फिर वह संगठन के ढाँचे में बड़ा बदलाव क्यों कर रहा है? क्या यह देश में कुछ बड़ा करने की योजना बना रहा है? आख़िर संघ में चल क्या रहा है?
ये सवाल इसलिए क्योंकि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने नया प्लान अपनी प्रयोग भूमि मध्य प्रदेश से लॉन्च किया है। दशकों पुराने संगठनात्मक ढांचे का संघ ने न केवल कायाकल्प करने का निर्णय लिया है, बल्कि आने वाली 27 मार्च से नई व्यवस्था लागू भी करने जा रहा है। मध्य प्रदेश के बाद संगठनात्मक ढाँचे में बदलाव का ये प्लान देश भर में आरएसएस लागू करने वाला है। देश भर में 80 नए संभाग गठित करने की योजना है।
संघ से जुड़े मध्य प्रदेश के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार संगठन के कामकाज को तेज करने, फैसले तेज गति से लेने या कराये जाने और युवा कार्यकर्ताओं को ज्यादा जिम्मेदारियाँ देने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू की जा रही है। सूत्रों ने बताया हरियाणा में हुई बैठक में नई व्यवस्था को हरी झंडी मिली है।
ये है मध्य प्रदेश की नई व्यवस्था
आरएसएस ने मध्य प्रदेश को तीन प्रांतों में बांट रखा था। ये तीन प्रांत मालवा, महाकौशल और मध्य भारत हैं। नई व्यवस्था के तहत तीन प्रांतों को समाप्त करते हुए मध्य प्रदेश को सात संभागों में बांटा जा रहा है। सात संभागों में भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, सागर, जबलपुर और रीवा शामिल होंगे। हर संभाग की अपनी कार्यकारिणी होगी। हरेक कार्यकारिणी के ऊपर संभाग प्रचारक होंगे।
तीन प्रांत वाला ढांचा समाप्त होने के बाद एक राज्य इकाई रहेगी। राज्य संघसंचालक नहीं होगा। इसके बजाय प्रदेश कार्यसमिति होगी। कार्यसमिति में प्रदेश प्रचारक, प्रदेश कार्यवाह और 2-3 सहयोगी सदस्य होंगे। इनकी जिम्मेदारी तालमेल को बेहतर करने के होगी। असल काम अब संभाग, विभाग और जिला स्तरीय कमेटियां करेंगी।
नौ क्षेत्र की व्यवस्था
मध्य प्रदेश राज्य को संघ ने अभी 11 क्षेत्रों में विभक्त कर रखा है। नई व्यवस्था में ये संख्या नौ की गई है। कार्यकारिणी अपना कार्यकाल पूरा होने तक काम करेंगी, लेकिन उपरोक्त नई व्यवस्था 27 मार्च से लागू हो जायेगी।
वर्तमान में मध्य प्रदेश में संघ के तीन प्रांत प्रचारक हैं। मालवा की जिम्मेदारी राजमोहन के पास है, मध्य भारत को विमल गुप्ता संभाल रहे हैं और महाकौशल का दायित्व ब्रजकांत चतुर्वेदी के पास है। जो खबरें हैं, उसके अनुसार इन तीनों में किसी एक को प्रांत प्रचारक को प्रदेश प्रचारक का दायित्व देने की सुगबुगाहट है। यानी कोई एक पूरे मध्य प्रदेश के कामकाज को संभालेगा।
संघ ढाँचे में बड़े बदलाव को लेकर मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार दिनेश गुप्ता ने ‘सत्य हिन्दी’ से कहा, ‘इस बदलाव (नई व्यवस्था) के बाद, संघ और भाजपा के बीच टकराव या मतभेद जैसी खबरों पर कान धरने वालों को सतर्क होने की जरूरत है।’ गुप्ता ने कहा, ‘वे हमेशा कहते हैं, संघ और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इनके कार्य के तरीकों से भ्रम फैलता है, लेकिन दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। एक-दूसरे के लिए प्राणपन से जुटकर काम करते हैं।’ गुप्ता ने यह भी कहा, ‘बीजेपी हो या संघ, दोनों ही 365 दिन काम करते हैं। विभिन्न कोणों से इनकी जमावट होती है। संगठन को मजबूती प्रदान करने से लेकर चुनावी राजनीति में ये कवायद बारंबर काम आती है। विरोधियों को झटके-दर-झटके देती है।’
काफी वक्त से बार-बार ये खबरें गति पकड़ती रही हैं कि संघ और भाजपा में रिश्ते ठीक नहीं हैं। बीजेपी से संघ खफा है। भाजपा, संघ से ज्यादा ताकतवर हो गई है।
1569 हिन्दू सम्मेलन
संघ शताब्दी वर्ष के तहत देश भर में हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इस कड़ी में मध्य भारत प्रांत में 1 हजार 814 मंडलों और 759 बस्तियों में 1 हजार 569 हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया गया है। इन सम्मेलनों में 52 लाख से अधिक लोगों ने शिरकत की है। इसके अलावा 80 हजार स्वयंसेवकों की टोलियां बनाकर 27 लाख 46 हजार परिवारों से सीधे संपर्क के आंकड़े भी सामने आये हैं।