Pune Land Scam Ajit Pawar Son Parth: पुणे में सरकारी ज़मीन की किस तरह बंटरबांट हो रही है, उसका उदाहरण डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ को मिली ज़मीन है। जिसको ज़मीन मिल रही है, उसे पता ही नहीं कि वो सरकारी ज़मीन है। पूरा मामला जानिएः
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार अपने बेटे पार्थ पवार के साथ
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार पर भूमि घोटाले के गंभीर आरोप लगे हैं। पुणे के मुंधवा इलाके में 16.19 हेक्टेयर (लगभग 40 एकड़) सरकारी जमीन को आईटी पार्क के नाम पर कथित रूप से 300 करोड़ रुपये में खरीदा गया। इसका बाजार मूल्य 1,804 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। यह जमीन मूल रूप से 'महार वतन' भूमि है, जो अनुसूचित जाति महार समुदाय की वंशानुगत संपत्ति थी और स्वतंत्रता पूर्व वतन प्रथा के तहत दी गई थी। आरोपों के बाद बिक्री दस्तावेज रद्द कर दिया गया है, लेकिन पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में पार्थ पवार का नाम नहीं है। मामले की जांच का आदेश दिया गया है। हालांकि जांच से कुछ भी बाहर आने की उम्मीद कम ही है। जब सरकार के अपने लोग फंसे हों, तो जांच अपने ही लोगों को सौंप दी जाती है और फिर क्लिन चिट की रिपोर्ट आ जाती है और मामला कानूनी रूप से सही हो जाता है।
ज़मीन का विवादित इतिहास
यह 40 एकड़ जमीन मूल रूप से वतन भूमि है, जो 13 सितंबर 1955 को टैक्स न चुकाने के कारण राज्य सरकार ने अधिग्रहित कर ली थी। उसी वर्ष 12 दिसंबर को इसे बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (बीएसआई) को 50 वर्ष की लीज पर बॉटनिकल पार्क स्थापित करने के लिए सौंप दिया गया, जो 2038 तक चलेगा। 1988 में लीज को 50 वर्ष और बढ़ाया गया था। भूमि के 7/12 दस्तावेज और 2018 के बाद जारी प्रॉपर्टी कार्ड में स्पष्ट रूप से 'मुंबई सरकार' (पूर्व बॉम्बे सरकार) को मालिक बताया गया है, जो इसकी सरकारी प्रकृति की पुष्टि करता है।
पिछले साल इस साइट पर बॉटनिकल पार्क प्रस्तावित किया गया था, लेकिन 2024 में पार्थ पवार और उनके पार्टनर दिग्विजय पाटिल की कंपनी अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी ने इसे आईटी पार्क में बदलने की योजना बनाई। 22 अप्रैल 2024 को पुणे जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) में आईटी/आईटीईएस पार्क के लिए आवेदन किया गया, और मात्र दो दिनों बाद 24 अप्रैल को लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी हो गया। मई 2023 में एकनाथ शिंदे सरकार द्वारा डेटा सेंटर स्थापना के लिए 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट की नीति का फायदा उठाते हुए, 19 मई 2025 को शीतल तेजवानी (272 मूल मालिकों की पावर ऑफ अटॉर्नी धारक) के साथ 300 करोड़ का बिक्री समझौता किया गया। तेजवानी को मूल मालिकों की ओर से भूमि पुनः अनुदान, विकास और कानूनी प्रक्रियाओं का प्रबंधन करने का अधिकार था, लेकिन सरकारी स्वामित्व के बावजूद बिक्री गैरकानूनी बताई जा रही है।
अजित पवार का आरोपों से इनकार भी, बचाव भी
अजित पवार ने इस मामले में अपने बेटे पार्थ का खुले तौर पर बचाव करने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को आरोप सामने आने के बाद उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे हमारे बच्चे बड़े होते हैं, उनके अपने कारोबार होते हैं। मुझे उनसे कोई लेना-देना नहीं है। किसी का भी कोई गलत काम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" शुक्रवार को उन्होंने फिर कहा, "मैं इस लेन-देन के बारे में कुछ नहीं जानता था। मैंने अपने कार्यालय में सभी से पूछा कि क्या किसी पर दबाव डाला गया, लेकिन ऐसा कुछ नहीं था। आरोप लगाना आसान है, लेकिन सच्चाई जानना भी जरूरी है।" पवार ने 2012 के सिंचाई घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि जांच से ही सत्य सामने आएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार का यह रुख आगामी स्थानीय निकाय चुनावों (2 दिसंबर को 42 नगर पंचायतों और 246 नगर परिषदों के लिए) को ध्यान में रखते हुए है। पार्थ पहले भी विवादों में रहे हैं। 2019 में मावल लोकसभा सीट से हार, 2023 में पुणे गैंगस्टर गजानन मार्ने से मुलाकात से वो चर्चा में रहे हैं। शरद पवार ने पार्थ को कभी 'अपरिपक्व' भी कहा था। एनसीपी (अजित पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि पार्टी का पुणे-बरामती में मजबूत आधार है और स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
सरकारी कार्रवाई और जांच की दिशा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरोपों को "पहली नज़र में गंभीर" बताते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खारगे के नेतृत्व में छह सदस्यीय समिति गठित की, जो एक महीने में रिपोर्ट देगी। साथ ही, पंजीकरण के संयुक्त महानिरीक्षक राजेंद्र मुठे की सहायता से सात दिनों में रिपोर्ट मांगी गई। फडणवीस ने कहा, "इस मामले में सभी जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। रजिस्ट्री पूरी हो चुकी थी, लेकिन पैसे का लेन-देन बाकी था। दोनों पक्षों ने रद्द करने की मांग की है, लेकिन नोटिस जारी कर दिया गया है। पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच पूरी होगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।"
पुणे पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कींं। एक मुंधवा भूमि पर और दूसरी बोपोदी के अलग पार्सल पर। एफआईआर में पार्थ का नाम आरोपी नहीं है, बल्कि दिग्विजय पाटिल को आरोपी बनाया गया। एक तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया। मुठे ने पुष्टि की, "7/12 दस्तावेज में मुंबई सरकार मालिक है। पावर ऑफ अटॉर्नी धारक इसे बेच ही नहीं सकता।"
अजित पवार ने भी पैसे का कोई आदान-प्रदान न होने और बिक्री रद्द होने की पुष्टि की। विपक्ष ने सवाल उठाया कि फडणवीस ने पार्थ के मामले में इतनी तेजी दिखाई, लेकिन बीजेपी नेता मुरलीधर मोहोल के समान आरोपों की जांच क्यों नहीं हुई। यह मामला 2012 के सिंचाई घोटाले के बाद अजित पवार से जुड़ा पहला बड़ा भ्रष्टाचार विवाद है, जिसमें उन्हें 2019 में क्लीन चिट मिली थी।
यह घोटाला महाराष्ट्र की भूमि नीतियों और राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग पर सवाल खड़े कर रहा है। जांच समिति की रिपोर्ट से ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। हैरानी की बात है कि महाराष्ट्र में आए दिन समुदाय विशेष की ज़मीनों में कमी निकालकर आए दिन बुलडोज़र कार्रवाई की जा रही है लेकिन सरकारी संरक्षण प्राप्त घोटालेबाजों के ऊपर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही है। पार्थ पवार के मामले में जमकर बचाव किया जा रहा है। मुख्य एफआईआर में पार्थ पवार का नाम न होना क्या बता रहा है। जांच के नाम पर खानापूरी की कार्रवाई जारी है।