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ब्राह्मणवाद- विरोधी फ़ेसबुक पोस्ट के कारण दलित वकील की हत्या

आज़ादी के 70 साल से अधिक समय बीत जाने और संविधान में दलितों के ख़िलाफ़ किसी तरह के भेदभाव को दंडनीय अपराध घोषित किए जाने के बावजूद स्थिति कितनी बदली है, यह महाराष्ट्र में एक दलित की हत्या से साफ हो जाता है। 

मामला क्या है?

पुलिस का कहना है कि ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनोरिटी कम्युनिटीज़ इंप्लाइज़ फेडरेशन के वरिष्ठ कार्यकर्ता देवजी माहेश्वरी की हत्या इसलिए कर दी गई कि वह ब्राह्रमणवाद की आलोचना करते हुए लेख अपने फ़ेसबुक पर पोस्ट करते थे। 

इस सिलसिले में शनिवार को मुंबई के पश्चिमी मलाड से एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है। 

पुलिस ने 'इंडियन एक्सप्रेस' से कहा कि मुंबई के भरत रावल माहेश्वरी के फ़ेसबुक पोस्ट से नाराज़ रहा करते थे। 

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पुलिस ने कहा, 'माहेश्वरी अपने फ़ेसबुक पेज पर ब्राह्मणवाद के आलोचना करते हुए पोस्ट डाला करते थे। रावल इससे असहमत थे और उन्होंने माहेश्वरी को कई बार चेतावनी दी थी कि वह इस तरह के पोस्ट न डालें।'

पुलिस के मुताबिक माहेश्वरी और रावल दोनों एक ही गाँव के थे। रावल ने कई बार माहेश्वरी से कहा था कि एक ही गाँव के होने के कारण वे इस तरह के पोस्ट लिख कर गड़बड़ी पैदा न करें। उन्होंने एक बार उनके ऑफ़िस जाकर उन्हें चेतावनी भी दी थी। पुलिस के अनुसार, माहेश्वरी ने इस पर कहा कि उसे जो करना है, कर ले। 

माहेश्वरी ने अपने फ़ेसबुक पेज पर बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेशराम का एक वीडियो डाला. जिसमें कहा गयाा है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के लोग हिन्दू नहीं हैं। 

 दलित उत्पीड़न क्यों?

पुलिस का कहना है कि रावल के ख़िलाफ़ हत्या, आपराधिक साजिश रचने और एससी/एसटी  की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। 
मामला सिर्फ एक माहेश्वरी का नहीं है। दलित उत्पीड़न एक ऐसी सच्चाई है जिससे जुड़ी ख़बरें देश के कोने-कोने से बीच-बीच में आती रहती हैं। 

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में दलित उत्पीड़न की एक घटना में गोरखपुर में एक नाबालिग लड़की के साथ दो लोगों ने बलात्कार किया और हैवानियत की हदें पार करते हुए उसके बदन को सिगरेट से दाग भी दिया। 

नाबालिग लड़की अचेत अवस्था में मिली। पुलिस ने इस मामले में देहरीभर गांव के रहने वाले अर्जुन और एक अज्ञात व्यक्ति के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया। यह केस नाबालिग की मां की शिकायत पर दर्ज किया गया। 
आज़मगढ़ में हुई दलित उत्पीड़न की एक ताज़ा घटना में सत्यमेव जयते नाम के ग्राम प्रधान की हत्या कर दी गई। बांसगांव में हुई इस घटना में आरोप लगा है कि कथित रूप से गाँव के सवर्णों ने दलित प्रधान की हत्या कर दी। सत्यमेव जयते के भतीजे लिंकन ने 'इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि यह हत्या जातीय नफ़रत की वजह से हुई। लिंकन के मुताबिक़, सवर्ण लोग एक दलित के प्रधान बनने और उनके सामने उसके तन कर खड़े होने को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। 

कर्नाटक

हाल ही में बेंगलुरू में हुई एक वारदात में एक सवर्ण की मोटर साइकिल छू लेने के कारण एक दलित को कथित तौर पर नंगा कर बुरी तरह पीटा गया था। उसके परिवार वालों को भी नहीं बख्शा गया और उन्हें भी बुरी तरह मारा-पीटा गया था। इस घटना का वीडियो वायरल हुआ था। 

कुछ महीने पहले कर्नाटक के चित्रदुर्ग से बीजेपी के एक दलित सांसद को एक गांव में वहां के लोगों ने आने ही नहीं दिया था। सांसद का नाम ए. नारायणस्वामी है। जब यह घटना हुई तो सांसद अपने साथियों के साथ गांव में विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए जा रहे थे।

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के पुणे में दलित समाज के एक युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई। युवक का कसूर सिर्फ़ इतना था कि वह सवर्ण जाति की एक युवती से प्यार करता था। युवक का नाम विराज विलास जगताप था और उसकी उम्र 20 साल थी। 
‘इंडिया टुडे’ के मुताबिक़, विराज ने मौत से पहले दिए अपने अंतिम बयान में उसके साथ हुई क्रूरता को बताया है। बयान में विराज ने कहा था कि वह अपनी मोटरसाइकिल से जा रहा था, तभी युवती के रिश्तेदारों ने एक ऑटो से उसे टक्कर मार दी। विराज ने कहा था कि उसके नीचे गिरने के बाद, अभियुक्त आए और उस पर रॉड और पत्थरों से हमला कर दिया। 
ये तो सिर्फ कुछ गिनी-चुनी वारदात हैं जो पिछले कुछ दिनों में हुई है। इस तरह के कई मामले हैं जो देश के कोने-कोने से आते रहते हैं। सवाल है, क्या संविधान अपने मूल रूप में अभी भी लोगों के चेतन में प्रवेश नहीं कर पाया है? क्या अभी भी हम बराबरी के सिद्धान्त को मन से स्वीकार नहीं कर पाए हैं?

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