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नफरती भाषण और 50 रैलियां, सरकार ही नहीं विपक्ष भी चुप

बीते साल नवंबर से पूरे महाराष्ट्र में कम से कम 50  'हिंदू जन आक्रोश मोर्चा' रैलियों का आयोजन किया गया। यह रैलियां महाराष्ट्र के लगभग सभी 36 जिलों में आयोजित की गईं। इनमें से हर एक रैली में पहले से निर्धारित पैटर्न का पालन किया गया। इन रैलियों भगवा झंडे और भगवा टोपी पहने लोगों का हुजूम शहर के बीचोंबीच एक छोटा पैदल मार्च करता है,  उसके बाद एक छोटी रैली आयोजित की जाती है। इन रैलियों के मंच पर आए वक्ता अल्पसंख्यकों (मुसलमानों) पर हमला करते हैं। उन पर लव जिहाद, भूमि जिहाद, और जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया जाता है। इन्हीं रैलियों से मुस्लिम समुदाय के आर्थिक बहिष्कार का आह्वान भी किया जाता है। 
भगवा झंड़ो और टोपी वाली इन रैलियों से भाजपा ने खुद को इन रैलियों से दूर किया हुआ है। बीजेपी की तरफ से इन रैलियों से यह कहकर दूरी बनाई गई कि इनका आयोजन सकल हिंदू समाज द्वारा किया गया था। इसके उलट लगभग सभी रैलियों में स्थानीय भाजपा विधायक और सांसद सहित पार्टी नेताओं की उपस्थिति रही है। हालांकि, भाषण ज्यादातर दक्षिणपंथी कट्टरपंथियों द्वारा दिए जाते हैं। इनमें रैलियों में जिन्होंने सबसे ज्यादा भाषण दिये वह बीजेपी से निलंबित और तेलंगाना के विधायक टी राजा सिंह है। टी राजा सिंह के अलावा कालीचरण महाराज और काजल हिंदुस्तानी इन रैलियों में प्रमुख रूप से शामिल रहे। इसमें से टी.राजा सिंह और कालीचरण महाराज महारष्ट्र के अलावा  अन्य जगहों पर भी भड़काउ भाषण के मामलों का सामना कर रहे हैं।
इन रैलियों में जो लोग प्रमुख रूप से शामिल हैं उनमें से टी. राजा सिंह को बीजेपी ने पिछले साल अगस्त में इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद पर उनकी टिप्पणी के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया था। महाराष्ट्र के अकोला के रहने वाला कालीचरण महाराज उर्फ अभिजीत धनंजय सारंग 'हिंदू राष्ट्र' का  समर्थक है और उसे दिसंबर 2021 में रायपुर में हुई एक धर्म संसद में उसके भाषण के लिए गिरफ्तार किया गया था। उस धर्म संसद में उसने कथित तौर पर नाथूराम गोडसे की प्रशंसा की थी। वहीं  काजल हिंदुस्तानी उर्फ काजल शिंगाला गुजरात की हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता हैं।
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सकल हिंदू समाज की इन रैलियों को मुख्य एजेंडा मुसलमानों के खिलाफ नफरत का प्रचार प्रसार करना होता है। 12 मार्च को मुंबई के मीरा रोड पर हुई एक रैली, इस्लामिक कट्टरता, लव जिहाद और लैंड जिहाद के खिलाफ भाषण दिए गए।  यहीं पर कुछ वक्ताओं ने मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार भी का आह्वान किया। काजल हिंदुस्तानी ने अपने भाषण में कहा कि इस्लामी आक्रामकता के तीन प्रमुख पहलू हैं। पहला लव जिहाद, दूसरा लैंड जिहाद है और सबसे अंत में धर्मांतरण है, इसका एक ही समाधान है, राम के नेतृत्व वाला समाधान - एक ऐसा हल जिसमें आपको राजनीतिक नेताओं, सुप्रीम कोर्ट या यहां तक कि मीडिया द्वारा नहीं रोका भी जाएगा। यह समाधान उनका आर्थिक बहिष्कार है।
दो किलोमीटर लंबी रैली को मीरा भयंदर से निर्दलीय विधायक गीता जैन ने हरी झंडी दिखाई, गीता जैन फिलहाल सरकार के समर्थन में हैं। इस कार्यक्रम में भाजपा विधायक नितेश राणे के साथ स्थानीय भाजपा नेता और विहिप और बजरंग दल जैसे संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए।
महाराष्ट्र पुलिस की तरफ से ज्यादातर रैलियों की रिकॉर्डिंग भी गई लेकिन अब तक किसी भी वक्ता के खिलाफ एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। टी राजा सिंह के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस ने लातूर (फरवरी) और अहमदनगर (मार्च) में भड़काऊ भाषण देने के लिए दो मामले दर्ज किये हैं। राजा सिंह के खिलाफ जो मामले दर्ज किये गये हैं, उनका आयोजन 'हिंदू जन आक्रोश मोर्चा' द्वारा नहीं किया गया था।
इस मसले पर पुलिस की तरफ से कहा गया कि हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, हम इन रैलियों में हो रही हर गतिविधि की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं, उसके बाद हम इन्हें बहुत बारीकी से सुनते हैं, इस मसले पर कानूनी सलाह भी लेते हैं, उसके बाद कार्रवाई कर रहे हैं। इन रैलियों के खिलाफ 3 फरवरी को  सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्देश दिया था कि रैलियों के आयोजन की अनुमति केवल एक शर्त पर दी जाएगी कि उनमें नफरत फैलाने वाले भाषण न दिये जाएं।
सकल हिंदू समाज की पहली हिंदू जन आक्रोश रैली 20 नवंबर, 2022 को परभणी में हुई इस रैली को  श्रद्धा वाल्कर की हत्या के बाद हिंदू समाज में 'लव जिहाद' के खतरों के बारे में जागरूकता पैदा करना था। रैली में भाजपा के स्थानीय पदाधिकारियों के साथ शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के विधायक राहुल पाटिल भी मौके पर मौजूद थे।
29 जनवरी, 2023 को मुंबई में आयोजित एक और रैली में मस्जिदों की मौजूदगी, वक्फ बोर्ड द्वारा राज्य को कथित धमकी और हलाल मांस जैसे मुद्दों पर मुसलमानों को खुली धमकियां दी गईं।  कामगार मैदान में आयोजित रैली में भीड़ को संबोधित करते हुए तेलंगाना के विधायक टी राजा सिंह ने हिंदुओं से मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा संचालित दुकानों के बहिष्कार का आग्रह करते हुए कहा कि यही समय है जबकि हिंदू समुदाय इन लोगों के वर्चस्व के खिलाफ खड़ा हो। लोगों के दिलों में गुस्सा है, हमारी बहनें और बेटियां दूसरे समुदाय के कुत्सित और सोचे समझे मंसूबों का शिकार हो रही हैं। इस रैली में भाजपा विधायक आशीष शेलार और प्रवीण दारेकर तथा सांसद गोपाल शेट्टी और मनोज कोटक शामिल रहे।
12 मार्च को मीरा रोड पर आयोजित एक और रैली में काजल हिंदुस्तानी ने दावा किया कि मुस्लिम विक्रेताओं ने सब्जियों और फलों में विषाक्त पदार्थ मिला रहे हैं। शांति नगर, पूनम गार्डन, जेसल पार्क के लगभग सभी विक्रेताओं पर जिहादियों ने कब्जा कर लिया है। उसने आह्वान किया थोड़ा अतिरिक्त पैसा खर्च करें लेकिन उनसे सामान खरीदना बंद कर दें। सुनिश्चित करें कि हिंदुओं का एक-एक पैसा एक हिंदू के घर जाए। रैली में भयंदर से निर्दलीय विधायक गीता जैन और भाजपा विधायक नितेश राणे भी मौजूद थे।
इंडिन एक्सप्रेस ने इन रैलियों में भाजपा नेताओं और मंत्रियों की भागीदारी को लेकर  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जनवरी में सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि कुछ रैलियों में, हमारी पार्टी के कार्यकर्ता या नेता मौजूद रहे हैं, और ऐसा इसलिए क्योंकि वे भी हिंदू हैं। अगर हिंदुओं की समस्याओं को लेकर रैली आयोजित की जा रही है, तो स्वाभाविक है कि ये नेता भाग ले सकते हैं। लेकिन यह भाजपा का एजेंडा नहीं है।
रैलियों के बारे में नाम न छापने की शर्त पर बोलते हुए, एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने इंडिन एक्सप्रेस को बताया कि “पिछले साल जून में राज्य की सत्ता में आने के लिए शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट के साथ हाथ मिलाने के बाद से बदली हुई परिस्थितियों को जिम्मेदार बताया।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए एकनाथ शिंदे ने हिंदुत्व को प्रमुख कारण बताया था। अब यह संदेश देने की कोशिश है कि नई सरकार हिंदुओं को न्याय देगी, कि वह हिंदुओं की सुनती है और हिंदुओं के लिए काम करती है।
इन सभाओं में नफरत फैलाने वाले भाषणों के बारे में पूछे जाने पर, कंकावली के भाजपा विधायक नितेश राणे, जो 12 मार्च को मीरा रोड कार्यक्रम में मौजूद थे, ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वह मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार के आह्वान से सहमत हैं।
नीतिश राणे ने कहा मुसलमान कमाए गये पैसे का इस्तेमाल वे हिंदू समुदाय के खिलाफ करते हैं। यदि उसे समुदाय की समृद्धि के लिए प्रयोग किया जाए तो, किसी को कोई समस्या नहीं है। लेकिन वे आतंकवाद, लव जिहाद और बहुत सी अन्य चीजों के नाम पर हिंदुओं के खिलाफ पैसे का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए हमें उनकी आर्थिक समृद्धि को रोकने के लिए आह्वान करना पड़ा।
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मोर्चा की रैलियों के अलावा, पूरे महाराष्ट्र में इसी तरह की रैलियां हुई हैं, जिनमें 'हिंदू राष्ट्र' की स्थापना के उद्देश्य से गोवा स्थित संगठन हिंदू जनजाग्रति समिति द्वारा आयोजित 'हिंदू राष्ट्र जागृति सभा' भी शामिल है। इन रैलियों में भी भड़काऊ खूब भाषण दिये जाते हैं। हालांकि दोनों सभाओं के आयोजक अलग-अलग हैं, लेकिन बुलाए गए वक्ता एक ही हैं - टी राजा सिंह, कालीचरण महाराज और काजल हिंदुस्तानी, अन्य।
सरकार के साथ ही राज्य के विपक्षी दलों ने भी सकल हिंदू समाज की इन रैलियों पर चुप्पी साध रखी है। जबकि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बार बार कहा कि भड़काऊ भाषण वाली रैलियों को तभी इजाजत दी जाए जब उनमें किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नफरत न फैलाई जाए।
विपक्ष की तरफ से कहा जा रहा है कि ये रैलियां महंगाई, बेरोजगारी के वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए आयोजित की जा रही हैं। हमें दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा निर्धारित एजेंडे में क्यों शामिल होना चाहिए?  इसलिए हमने इन रैलियों पर प्रतिक्रिया नहीं देने का फैसला किया है क्योंकि हम अर्थव्यवस्था से संबंधित मुद्दों से ध्यान नहीं भटकाना चाहते हैं।
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