महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस. चोक्कलिंगम ने चुनाव आयोग से ECINET पर निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (ERO) को अधिक विवेकाधिकार (discretion) देने की मांग की है। यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब महाराष्ट्र में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया चल रही है और ECINET की भूमिका को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी सवाल उठ चुके हैं।

ERO को फैसला लेने की सुविधा चाहिए

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के CEO ने चुनाव आयोग से ECINET में ऐसा विकल्प उपलब्ध कराने को कहा था, जिससे ERO/AERO हर मामले में खुद तय कर सकें कि किसी मतदाता की व्यक्तिगत सुनवाई जरूरी है या नहीं। महाराष्ट्र में SIR के दौरान जिन मतदाताओं के नाम को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है जिनमें पुराने रिकॉर्ड से नाम का मिलान नहीं हो पाया या मतदाता के रिकॉर्ड में कोई तार्किक विसंगति पाई गई। इतनी बड़ी संख्या में लोगों को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए बुलाना व्यावहारिक समस्या पैदा कर सकता है।
महाराष्ट्र CEO ने ECINET में ERO के लॉगिन पर एक अतिरिक्त विकल्प देने का सुझाव दिया था, जिसके जरिए अधिकारी किसी मामले को व्यक्तिगत सुनवाई से मुक्त (exempted from hearing) कर सकें। प्रस्ताव के अनुसार व्यक्तिगत सुनवाई केवल तब जरूरी होनी चाहिए जबः जमा किए गए दस्तावेज पर्याप्त न हों, दस्तावेज संतोषजनक न हों, या मतदाता ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न कराए हों।
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महाराष्ट्र CEO की पहल के बाद चुनाव आयोग ने SIR नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाता के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकते हैं और उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे। इसके बाद ERO दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेगा। सामान्य परिस्थितियों में मतदाता को ERO या AERO के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी। सुनवाई केवल असाधारण परिस्थितियों में होगी और जहां संभव हो, उसे ऑनलाइन कराया जाएगा। मतदाता जरूरत पड़ने पर अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को भी अपनी ओर से सुनवाई के लिए अधिकृत कर सकता है।

ERO की कानूनी भूमिका क्या है?

यह पूरा विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मौजूदा चुनावी कानून के तहत मतदाता सूची तैयार करने और उसमें नाम जोड़ने, हटाने अथवा दावों-आपत्तियों पर निर्णय लेने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ERO की होती है। 1950 के जनप्रतिनिधित्व कानून और 1960 के Registration of Electors Rules के तहत ERO को निर्धारित वैधानिक शक्तियां प्राप्त हैं। लेकिन ECINET जैसे सेंट्रलाइज्ड डिजिटल सिस्टम में इन अधिकारियों को कौन-कौन से विकल्प और तकनीकी अधिकार उपलब्ध होंगे, यह विवाद का विषय बना हुआ है।

दो चुनाव आयुक्त भी उठा चुके हैं सेंट्रलाइज्ड सूची का मुद्दा

ECINET को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरें पिछले दिनों सामने आई थीं। इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई मौकों पर यह चिंता जताई थी कि मतदाता सूची से संबंधित IT सिस्टम में बढ़ता केंद्रीकरण ERO, DEO और CEO की वैधानिक शक्तियों को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2025 में ही चुनाव आयोग के अधिकारियों के बीच यह चिंता सामने आई थी कि IT सिस्टम को इस तरह बनाया जाना चाहिए कि ERO की वैधानिक भूमिका और निर्णय लेने की स्वतंत्रता सीमित न हो।

जनवरी 2026 में SIR के दौरान भी IT सिस्टम में ERO के विवेकाधिकार को प्रतिबंधित न करने की बात कही गई थी। इसके कुछ ही सप्ताह बाद 22 जनवरी को ECINET लॉन्च किया गया।

ECINET क्या है?

ECINET चुनाव आयोग का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे 22 जनवरी 2026 को लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य चुनाव आयोग के 40 से अधिक ऐप और पोर्टल को एक ही डिजिटल व्यवस्था में लाना है। ECINET में मतदाता सूची प्रबंधन से जुड़े सिस्टम भी शामिल हैं। इसी कारण यह प्लेटफॉर्म देश के करीब 100 करोड़ मतदाताओं से जुड़ी चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण तकनीकी आधार बन गया है। विवाद का मुख्य प्रश्न यह है कि क्या डिजिटल सिस्टम केवल ERO के वैधानिक फैसले को लागू करने का माध्यम है या सिस्टम में मौजूद तकनीकी विकल्प ही यह तय कर सकते हैं कि ERO क्या कर सकता है और क्या नहीं।

गोवा के 97 मतदाताओं का मामला बना उदाहरण

ECINET को लेकर चिंता को समझने के लिए गोवा का मामला भी महत्वपूर्ण है। इंडियन एक्सप्रेस की जांच में सामने आया कि SIR के दौरान 97 ऐसे मतदाता थे जिनके पक्ष में स्थानीय ERO ने निर्णय दिया था, लेकिन उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए। रिपोर्ट के मुताबिक समस्या यह थी कि ECINET में ERO के लिए पहले से दर्ज निर्णय को 'रोल बैक' या वापस लेने का विकल्प मौजूद नहीं था। गोवा के CEO कार्यालय ने इस समस्या को दूर करने के लिए चुनाव आयोग को कई ई-मेल भेजे, लेकिन सिस्टम में जरूरी सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
इस मामले ने यह सवाल उठाया कि यदि ERO कानून के तहत कोई फैसला कर चुका है लेकिन सॉफ्टवेयर में उस फैसले को सुधारने या वापस लेने का विकल्प ही उपलब्ध नहीं है, तो अंतिम नियंत्रण किसके पास है- कानूनन अधिकृत अधिकारी के पास या IT सिस्टम के पास?

ECINET की समीक्षा के लिए समिति बनाई

इन विवादों के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को ECINET की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया। समिति की अध्यक्षता एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त (Senior Deputy Election Commissioner) करेंगे और इसमें IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।
समिति यह जांचेगी कि ECINET संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं। आयोग ने कहा है कि फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुरूप role-based access दिया गया है और जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त तकनीकी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। आयोग ने यह भी तय किया है कि भविष्य में IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहल पहले अधिकारियों की समिति के सामने रखी जाएगी और उसके बाद आयोग के समक्ष मंजूरी के लिए लाई जाएगी।

महाराष्ट्र में SIR की समयसीमा भी बढ़ाई गई

ECI ने महाराष्ट्र में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 12 अक्टूबर 2026 कर दी है। दावों और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा भी बढ़ाकर 10 नवंबर कर दी गई है, जबकि अंतिम मतदाता सूची अब 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है। यह बदलाव महाराष्ट्र CEO की मांग और बड़ी संख्या में नोटिस जारी होने की पृष्ठभूमि में आया है।
अब ECINET की प्रस्तावित विशेषज्ञ समीक्षा से यह स्पष्ट होना है कि मौजूदा डिजिटल व्यवस्था Representation of the People Act और Registration of Electors Rules के तहत ERO को मिले अधिकारों के साथ पूरी तरह कैसे तालमेल बैठाती है।