महाराष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल के अंत तक योजना में लाभार्थियों की संख्या 2.4 करोड़ से घटकर लगभग 1.7 करोड़ रह गई है। सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल ने आरोप लगाया कि सरकार ने वित्तीय संकट के कारण नाम हटा दिए।
महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने पिछले विधानसभा चुनाव से ऐन पहले जिस लाडकी बहिन योजना शुरू कर फटाफट महिला लाभार्थियों के खातों में पैसे डाले थे, उस योजना से अब 80 लाख महिलाओं के नाम हट गए हैं। सरकार का कहना है कि ई-केवाईसी की आखिरी तारीख़ 30 अप्रैल के बाद करीब 80 लाख महिलाएं योजना के लिए अयोग्य हो गई हैं। लेकिन विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि सरकार का खजाना खाली है और उसके सामने आर्थिक संकट है तो वह लाभार्थियों के नाम हटा रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवाईसी के बहाने योजना को बंद करने की तैयारी में है।
विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को चुनावी जुमले और आर्थिक संकट से जोड़कर देखा है। एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल ने कहा कि यह योजना 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले महायुति गठबंधन के लोकसभा में खराब प्रदर्शन के बाद शुरू की गई थी ताकि विधानसभा चुनाव में फायदा हो। पाटिल ने कहा कि अब 80 लाख महिलाओं को हटाना महिलाओं के साथ धोखा है। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, 'केंद्र के बाद राज्य सरकार भी बड़े वित्तीय संकट का सामना कर रही है। पहले झटका हमारी लाडकी बहिनों पर पड़ा है।'
पूरी योजना बंद करने की तैयारी: रोहित पवार
एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया कि सरकार चरणबद्ध तरीके से लाभार्थियों को हटा रही है ताकि अंत में पूरी योजना बंद की जा सके। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले 2.47 करोड़ लाभार्थी थे, अब 81 लाख नाम हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि केवाईसी सिर्फ बहाना है। असली मकसद योजना बंद करना है।
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि सरकार ने सिर्फ वोट के लिए योजना शुरू की और अब महिलाओं से मुंह मोड़ लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाओं को निराश करने की कीमत महायुति को चुकानी पड़ेगी।
एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने एक्स पर लिखा कि योजना चुनाव के समय बिना सही जांच के हड़बड़ी में शुरू की गई। उन्होंने कहा, 'डेढ़ साल बाद अचानक 80 लाख महिलाएं अयोग्य कैसे हो गईं? यह राजनीतिक, प्रशासनिक और क्रियान्वयन स्तर पर सामूहिक असफलता है।' सुले ने मांग की कि हर पात्र महिला को नियमित लाभ मिलना चाहिए। समय पर केवाईसी न कर पाने के कारण किसी को भी वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने सरकार पर बोगस स्कीम चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं को मासिक सहायता बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन उल्टा 80 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को अयोग्य घोषित कर दिया।
'लाभार्थी 2.4 करोड़ से घटकर 1.7 करोड़ रहीं'
रिपोर्टों में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि अप्रैल के अंत तक योजना में लाभार्थियों की संख्या 2.4 करोड़ से घटकर लगभग 1.7 करोड़ रह गई है। अधिकारी ने सोमवार को कहा कि यह सिर्फ ई-केवाईसी न करने की वजह से नहीं हुआ है, बल्कि कई महिलाएं पात्रता शर्तें पूरी नहीं करती थीं।
सरकार ने लाभार्थियों को ई-केवाईसी पूरा करने के लिए 8 महीने का समय दिया था। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी ने कहा कि 50 से 55 लाख महिलाएं पूरी प्रक्रिया ही पूरी नहीं कर पाईं और 2 से 3 लाख महिलाओं ने गलतियां सुधार लीं। उन्होंने कहा है कि क़रीब 12 लाख महिलाएं इनकम टैक्स भरने वाली हैं और उनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 4.5 लाख से ज्यादा महिलाएँ 65 साल की उम्र पार कर चुकी हैं। 5 लाख महिलाएं पहले से ही नमो शेतकरी योजना का फायदा ले रही थीं।अधिकारी ने साफ़ किया कि 80 लाख महिलाओं को सिर्फ ई-केवाईसी न करने के आधार पर नहीं हटाया गया। कुछ शिकायतें आई हैं कि जिन्होंने केवाईसी कर लिया था, उन्हें भी किस्त नहीं मिली। अधिकारी ने कहा, 'असली लाभार्थियों की अंतिम संख्या एक हफ्ते में साफ हो जाएगी। सभी शिकायतों की जांच हो रही है।'
योजना क्या है?
लाडकी बहिन योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाते हैं। योजना का मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। हर महीने सरकार 3700 करोड़ रुपये के आसपास लाभार्थियों को बांटती है। 2025-26 में योजना पर 36000 करोड़ रुपये का बजट था। 2026-27 में बजट घटाकर 26000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
योजना पर क्या क्या हुए हैं विवाद?
यह योजना शुरू होने के कुछ समय बाद ही बड़े विवाद में फँस गई थी जिसमें अपात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ दे दिया गया था। इसमें 14000 से ज़्यादा पुरुषों को महिलाओं के लिए बनी योजना का लाभ मिला। उन्होंने फर्जी दस्तावेज से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था। रिपोर्टों के अनुसार अक्टूबर 2025 में आरटीआई से खुलासा हुआ था कि 12431 पुरुषों को 13 महीने तक 1500 प्रति माह माह मिले और क़रीब 24 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा 77980 अपात्र महिलाओं को 140 करोड़ रुपये दिए गए। 26.34 लाख अपात्र लाभार्थी पाए गए, जिनमें सरकारी कर्मचारी भी शामिल थीं।
लगातार सवाल उठने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पहले ही साफ कहा था कि लाडकी बहिन योजना बंद नहीं होगी। सरकार ने फैसला लिया है कि जिन्हें गलती से फायदा मिल गया था, उनसे पैसे वापस नहीं लिए जाएंगे। सरकार का कहना है कि सिर्फ सही और योग्य महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलना चाहिए, ताकि सरकारी पैसे का सही इस्तेमाल हो।
बहरहाल, विपक्ष का कहना है कि चुनाव जीतने के लिए योजना लाई गई, लेकिन अब आर्थिक दबाव में इसे कमजोर किया जा रहा है। सरकारी अधिकारी ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि सिर्फ पात्र महिलाओं को ही लाभ दिया जाएगा। अंतिम आंकड़े जल्द सामने आएंगे। यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में गरमा गया है। महिलाओं के बीच नाराजगी बढ़ रही है।