loader

टूलकिट मामला: निकिता को राहत, गिरफ़्तारी पर तीन हफ़्ते तक लगी रोक 

मुंबई की वकील निकिता जैकब को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने बुधवार को निकिता की गिरफ़्तारी पर तीन हफ़्ते तक की रोक लगा दी है। पुलिस ने सोमवार को निकिता जैकब और पुणे के इंजीनियर शांतनु के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किया था। दोनों के ख़िलाफ़ दर्ज केस में उन पर ग़ैर जमानती धाराएं लगाई गई हैं। 

सूत्रों के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम 11 फ़रवरी को निकिता जैकब की खोज में उनके घर पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक़, निकिता ने कहा था कि वह जांच में शामिल होंगी लेकिन वह अंडरग्राउंड हो गयीं। इसके बाद निकिता ने पुलिस की कार्रवाई से राहत के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। 

ताज़ा ख़बरें

पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ़्तारी के बाद से ही दिल्ली पुलिस निकिता जैकब और पुणे के इंजीनियर शांतनु की तलाश कर रही है। पुलिस ने कहा है कि दिशा ने निकिता जैकब और पुणे के इंजीनियर शांतनु के साथ मिलकर एक टूलकिट तैयार की थी। इस टूलकिट को स्वीडन की पर्यावरणविद् ग्रेटा तनबर्ग (थनबर्ग) ने ट्वीट किया था। 

पुलिस का दावा है कि इस टूलकिट के पीछे खालिस्तानी अलगाववादी संगठन पोएटिक जस्टिस फ़ाउंडेशन का हाथ है। इस संगठन ने निकिता जैकब से भी संपर्क किया था और कहा था कि वह गणतंत्र दिवस के दिन हुई किसानों की रैली से पहले ट्वीट करें। 

दिशा रवि को शनिवार को गिरफ़्तार किया गया था, इसके बाद उसे दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया और पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। दिशा पर आरोप है कि उसने इस टूलकिट को तैयार करने और इसे सोशल मीडिया पर आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। 

महाराष्ट्र से और ख़बरें

दिशा पर राजद्रोह का मुक़दमा 

3 फरवरी को ग्रेटा तनबर्ग ने किसानों के समर्थन में इस टूलकिट को ट्वीट किया था। लेकिन बाद में उन्होंने इसे डिलीट कर अपडेटेड टूलकिट को ट्वीट किया था। दिशा पर राजद्रोह, आपराधिक साज़िश रचने सहित कई गंभीर मुक़दमे दर्ज किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि दिशा ने एक वॉट्सऐप ग्रुप भी बनाया था और इस टूलकिट को बनाने में सहयोग किया था। 

दिशा रवि ने अदालत को बताया कि उसने इस  टूलकिट को नहीं बनाया है और वह सिर्फ़ किसानों का समर्थन करना चाहती है। दिशा के मुताबिक़, 3 फ़रवरी को उसने इस टूलकिट की दो लाइनों को एडिट किया था। 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

महाराष्ट्र से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें