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महाराष्ट्र में चल रहीं ताबड़तोड़ बैठकें, क्या ख़तरे में है उद्धव सरकार?

क्या महाराष्ट्र में एक बार फिर कोई बड़ा सियासी उलटफेर होने जा रहा है। बीते दो दिनों से महाराष्ट्र में ताबड़तोड़ बैठकों का दौर चल रहा है। इसके बाद से ही सियासी गलियारों में यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या राज्य की उद्धव ठाकरे सरकार ख़तरे में है। 

कोश्यारी से मिले राणे

सोमवार को राज्य के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री नारायण राणे ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद राणे ने पत्रकारों को बताया था कि उन्होंने मांग की है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाना चाहिए। राणे ने कहा था कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाडी सरकार कोरोना संकट से निपटने में पूरी तरह फ़ेल रही है। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर हमला बोला था और उन्हें प्रशासन चलाने में नाकाम बताया था। 

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राज्यपाल से मिले पवार 

सोमवार को ही एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने राज्यपाल कोश्यारी से मुलाकात की। कोश्यारी से मुलाकात के बाद पवार ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ बैठक की। दोनों के बीच डेढ़ घंटे तक बात हुई। कोरोना से जूझ रहे महाराष्ट्र में सियासी दिग्गजों के बीच लगातार बैठकों के बाद राज्य का सियासी तापमान बढ़ गया है। 

पवार और ठाकरे की मुलाकात को लेकर मंगलवार को शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह मजबूत है और सरकार को कोई ख़तरा नहीं है। एनसीपी की ओर से कहा गया कि यह मुलाक़ात राज्यपाल कोश्यारी के निमंत्रण पर हुई थी। 

राजभवन-सरकार के रिश्ते तल्ख

जब राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत करने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था, उसके बाद से ही राजभवन और सरकार के रिश्तों में तल्खी आ गई है। तब बीजेपी के एक नेता ने ठाकरे को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को अदालत में चुनौती तक दी थी। संजय राउत ने तब भी चेताया था कि राजभवन षड्यंत्र का केंद्र नहीं बने और याद रखिये इतिहास उन्हें कभी नहीं छोड़ता जो असंवैधानिक काम करते हैं।

ठाकरे सरकार के राजभवन के साथ चल रहे तनाव के बीच कोश्यारी ने पवार को मिलने क्यों बुलाया, इसे लेकर लोगों के कान खड़े हो गए हैं।

जबकि कुछ दिन पहले ही पवार खुलकर कोश्यारी की आलोचना कर चुके हैं। पवार ने कहा था कि कोश्यारी राज्य के कामकाज में दखल दे रहे हैं। ऐसे में अचानक दोनों की मुलाक़ात को लेकर सवाल खड़े होने लाजिमी हैं। 

फडणवीस खासे सक्रिय 

हाल ही में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल से मिलकर ठाकरे सरकार की शिकायत की थी। फडणवीस ने कहा था कि राज्य सरकार कोरोना संकट से निपट पाने में फ़ेल साबित हो रही है। इस मुद्दे को लेकर फडणवीस लगातार ठाकरे सरकार पर हमलावर हैं। बीते कुछ समय से फडणवीस की राजभवन में आवाजाही भी बढ़ी है। 

इन बैठकों से छह माह पहले राज्य में रात को ही किस तरह राष्ट्रपति शासन लगाया गया, रातों-रात इसे कैसे हटाया गया, कैसे फडणवीस और अजित पवार ने शपथ ली और कैसे वह सरकार गिर गयी, उसकी यादें ताजा होती हैं।

‘ऑपरेशन लोटस’ की तैयारी?

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या महाराष्ट्र में एक बार फिर राज्यपाल की भूमिका को केंद्र में रखकर बीजेपी सरकार बनाने की कोशिश कर रही है। ठाकरे के विधान परिषद का सदस्य मनोनीत होने को लेकर चले घमासान के दौरान ही यह सवाल उठा था कि क्या मध्य प्रदेश, कर्नाटक की तरह यहां भी ‘ऑपरेशन लोटस’ को अंजाम दिए जाने की तैयारी चल रही है। 

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ये ताबड़तोड़ बैठकें ऐसे समय में हो रही हैं, जब देश कोरोना का संकट झेल रहा है और महाराष्ट्र में इस वायरस का कहर सबसे ज़्यादा है। महाराष्ट्र में किसी भी तरह की राजनीतिक अस्थिरता देश के लोगों को सीधा संदेश देगी कि नेताओं को कुर्सी से दूरी बर्दाश्त नहीं है और वे महामारी से लड़ने के बजाय सिर्फ़ सत्ता बनाए रखने की लड़ाई लड़ रहे हैं। 

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