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जेठमलानी के निधन पर मोदी, शाह समेत कई राजनेताओं ने जताया दुख

देश के बेहद प्रतिष्ठित और सबसे अनुभवी वकील राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में निधन हो गया है। जेठमलानी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई मंत्रियों, नेताओं ने शोक जताया है। जेठमलानी ने सुबह 7.45 बजे दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार शाम को 4 बजे लोधी रोड स्थित शवदाह गृह में किया जाएगा। जेठमलानी के परिवार में उनके बेटे महेश जेठमलानी और उनकी बेटी हैं। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर कहा,  ‘जेठमलानी के जाने से भारत ने शानदार वकील खो दिया है। देश की अदालत और संसद में उनका अहम योगदान था। वह हंसमुख थे, साहसी थे और अपने विचारों को मजबूती से रखने में घबराते नहीं थे।’ प्रधानमंत्री ने एक और ट्वीट कर कहा, ‘आपातकाल के काले दिनों के दौरान, लोगों की आज़ादी के लिए उनके द्वारा लड़ी गई लड़ाई को हमेशा याद किया जाएगा। ज़रूरतमंदों की मदद करना उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा था।’

गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया, वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम जेठमलानी के निधन पर बेहद दुखी हूँ। हमने केवल एक प्रतिष्ठित वकील ही नहीं बल्कि एक महान इंसान को भी खो दिया।’
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राम जेठमलानी के निधन पर दुख जताया है और ट्वीट कर कहा कि क़ानून के इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट कर दुख जताया और कहा, ‘पूर्व क़ानून मंत्री जेठमलानी की बुद्धिमता, वाकपटुता, सशक्त वकालत और क़ानून की जबरदस्त समझ क़ानूनी पेशे में हमेशा मिसाल बनी रहेगी।’ 

राम जेठमलानी देश के दिग्गज वकीलों में शुमार थे। उन्होंने अपने जीवन में कई बड़े मुक़दमे लड़े और जीते थे। वह दिग्गज वकील होने के साथ-साथ केंद्रीय क़ानून मंत्री भी रहे। बताया जाता है कि जेठमलानी पिछले दो हफ्ते से बीमार थे।

राम जेठमलानी का जन्म 14 सितंबर 1923 को अविभाजित भारत के सिंध प्रांत के शिकारपुर में हुआ था। इनका पूरा नाम राम बूलचंद जेठमलानी था। हज़ारों मुक़दमे लड़ने वाल जेठमलानी का पहला सबसे चर्चित केस 1959 में आया था, जब वह केएम नानावती बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में वकील थे। जेठमलानी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों का केस लड़ा था। स्टॉक मार्केट घोटाला मामले में उन्होंने हर्षद मेहता और केतन पारेख का भी मुक़दमा लड़ा था। जेठमलानी तब विवादों में घिर गये थे जब उन्होंने संसद पर हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरू का केस लड़ा था। उन्होंने जेसिकालाल हत्याकांड में मनु शर्मा का केस भी लड़ा था।
राम जेठमलानी ने भारतीय वकालत का सबसे लंबा सफ़र तय किया। सर्वोच्च न्यायालय के वकीलों के मुताबिक़, जेठमलानी कई बार न्यायाधीशों को यह तक बोल देते थे कि आपकी उम्र से ज़्यादा तो मेरा वकालत का अनुभव है लेकिन उनकी इस बात का कोई बुरा नहीं मानता था वह इसलिए क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के किसी भी न्यायाधीश के रिटायर होने की अधिकतम उम्र 65 साल है जबकि जेठमलानी को वकालत करने का लगभग 77 साल का अनुभव था।
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