पूर्वांचल की कम से कम 16 सीटों पर गठबंधन को 2014 में जो कुल वोट मिले थे वे बीजेपी को मिले वोटों से काफ़ी ज़्यादा थे। ग्यारह सीटों पर बीजेपी आगे थी। तो क्या बीजेपी की मुश्किल नहीं बढ़ेगी?
2019 का चुनावी समर कई मायनों में अलग है। इस बार नरेंद्र मोदी भले अपने नाम पर वोट माँग रहे हों, लेकिन पहले जैसी लहर नहीं नज़र आ रही है। इस बार मोदी के आलोचक सोशल मीडिया पर बढ़-चढ़ कर उनके ख़िलाफ़ मुखर हो रहे हैं। ऐसा 2014 में नज़र नहीं आ रहा था।
इन छोटे-बड़े जातीय समूहों से बीजेपी को जो समर्थन 2014 में मिला था वह इस बार नहीं मिल रहा है। इस परिप्रेक्ष्य में यदि देखें तो पूर्वांचल की कम से कम 16 सीटों पर गठबंधन को 2014 में जो कुल वोट मिले थे वे बीजेपी को मिले वोटों से काफ़ी ज़्यादा थे। ग्यारह सीटों पर बीजेपी आगे थी।