असम में एनआरसी का विरोध (फ़ाइल फ़ोटो)।
अब प्रधानमंत्री मोदी के जिगरी यार डोनल्ड ट्रम्प के देश से भी कड़ी टिप्पणी आ गई है। अमेरिकी संस्था यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ़्रीडम ने अपनी रिपोर्ट में भारत में मुसलमानों के उत्पीड़न पर चिंता ज़ाहिर की है।
कमीशन के मुताबिक़ सरकार ने अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा की इजाज़त दे दी और उनके धार्मिक स्थलों की तोड़-फोड़ पर भी वह चुप रही है। उसने हेट स्पीच को रोकने की भी कोई कोशिश नहीं की है। गो हत्या के संदेह में मॉब लिंचिंग का सिलसिला भी जारी है।
कमीशन ने ट्रंप प्रशासन से भारत सरकार की एजेंसियों और अधिकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने को कहा है। उसने सुझाव दिया है कि उन पर सख़्त पाबंदियाँ लगाई जाएँ, उनकी संपत्ति ज़ब्त करके और उनके अमेरिका में आने पर रोक लगा दी जाए।
मीडिया और पूरी दुनिया की आँखें सरकार के रंग-ढंग पर लगी हुई हैं और वे देख रही हैं कि हिंदुस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता के साथ किस तरह का खिलवाड़ हो रहा है। दिल्ली दंगों के दौरान और उसके बाद मुसलमानों को निशाना बनाने की ख़बरें आए दिन आ रही हैं।फिर जिस तरह से कोरोना संकट को सांप्रदायिक रंग देकर मुसलमानों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया जा रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। न ही यह छिपा है कि सरकार उसे रोकने के लिए कुछ भी नहीं कर रही है।