पूर्वोत्तर के दो महत्वपूर्ण राज्यों नागालैंड और मेघालय में कल सोमवार 27 फरवरी को मतदान है। इनके नतीजे त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के साथ 2 मार्च को आएंगे। जानिए आखिर नागालैंड और मेघालय के चुनाव को बीजेपी और कांग्रेस इतनी गंभीरता से क्यों ले रहे हैं।
आखिर प्रदेश अध्यक्ष को ऐसी सफाई देने की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, तमाम क्षेत्रीय पार्टियां उस पर ईसाई-विरोधी होने का आरोप लगाती रही हैं. इसके साथ ही यह कहा जा रहा है कि सत्ता में आने की स्थिति में पार्टी बीफ पर पाबंदी लगा देगी. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस राज्य में बीफ का सेवन लोगों के लिए भावनात्मक मुद्दा है. इसी वजह से अबकी इलाके के बाकी राज्यों की तरह यहां भी सरकार बनाने का सपना देख रही पार्टी इस मुद्दे पर कोई खतरा नहीं उठाना चाहती.
उधर, नागालैंड में पिछली बार नेफ्यू रियो के नेतृत्व वाली नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) गठबंधन सरकार में शामिल भाजपा ने इस बार भी अपनी जमीनी ताकत के लिहाज से गठबंधन को बरकरार रखा है. तालमेल के तहत वह महज 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. उसका एक उम्मीदवार निर्विरोध चुना जा चुका है. लेकिन पार्टी ने यहां भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसी सप्ताह मेघालय के अलावा राज्य के दीमापुर में चुनावी रैली कर चुके हैं. पार्टी के दूसरे नेता भी राज्य में चुनाव प्रचार कर चुके हैं.