अरविंद केजरीवाल पर अदालत का फ़ैसला आने के बाद विपक्षी नेताओं के ख़िलाफ़ एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर विपक्ष ने एक सुर में बीजेपी पर बड़ा वार किया है। यह फ़ैसला बीजेपी के लिए कितना बड़ा झटका है?
बीजेपी पर हमलावर विपक्षी नेता
दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को अदालत से बरी होने के बाद विपक्ष बीजेपी पर टूट पड़ा है। विपक्षी नेताओं के ख़िलाफ़ केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग पर विपक्ष एकजुट नज़र आ रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे भाजपा के लिए 'नैतिक मृत्युदंड' बताया, जबकि कांग्रेस के पवन खेड़ा ने बीजेपी को 'इच्छाधारी नाग' कहा। शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने सीबीआई को 'सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इमेजिनेशन' करार दिया। राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव ने तो दिल्ली में दोबारा चुनाव की मांग कर दी। विपक्ष का कहना है कि बीजेपी ने जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग कर राजनीतिक साज़िश रची, लेकिन सच्चाई सामने आ गई। चौतरफ़ा घिरी बीजेपी ने बचने का रास्ता ढूंढा और वह रास्ता भी सीबीआई वाला ही है।
विपक्षी दलों ने इस फ़ैसले पर क्या कहा और बीजेपी ने जवाब में क्या सफाई दी है, वह जानने से पहले यह जान लें कि आख़िर दिल्ली शराब नीति मामले में फ़ैसला क्या आया है।
दरअसल, राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली शराब नीति घोटाले से जुड़े मामले में सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि साजिश का कोई सबूत नहीं है। कोर्ट ने जाँच में खामियां बताईं और जांच अधिकारी पर विभागीय जांच के आदेश दिए। अदालत ने मनीष सिसोदिया पर 'कोई आपराधिक इरादा' न होने और केजरीवाल पर 'संवैधानिक पद वाले व्यक्ति के खिलाफ साजिश का सिद्धांत न टिकने' जैसी टिप्पणियां कीं।
सीबीआई अदालत के इस फ़ैसले के बाद अरविंद केजरीवाल ने इसे 'सच्चाई की जीत' और 'भारत के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक साज़िश' बताया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यह दिन देश की राजनीति के लिए अहम है। मनीष सिसोदिया ने कहा, "यह देश की राजनीति के लिए अहम दिन है। नरेंद्र मोदी जी ने ईडी और सीबीआई की ताक़त से सत्ता में बने रहने की साज़िश रची थी, लेकिन वह नाकाम हो गई। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका था कि मामला टिक नहीं पाएगा। आज जज ने भी यही कहा। सीबीआई अधिकारी पर जांच बैठाई गई है। भाजपा को मान लेना चाहिए कि वे झूठ बोल रहे थे।'
भाजपा समर्थक शर्म से डूबे होंगे: अखिलेश
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट लिखकर केजरीवाल का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'आज दिल्ली के लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी के साथ सत्य और न्याय दोनों खड़े हैं। आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता कि वो सच को ढक ले।' उन्होंने कहा, आज हर ईमानदार आशा भरी साँस लेगा और भाजपा के समर्थक शर्म के मारे घोर आत्म-लज्जित हो रहे होंगे। भाजपा ने दिल्ली के निवासियों से विश्वासघात किया है।
अखिलेश ने कुछ धार्मिक हस्तियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'जो कपटजीवी सनातनी शंकराचार्य जी, साधु, संतों, संन्यासियों तक पर झूठे आरोप लगाने का महापाप करते हैं, वो भला किसी सरकार, दल या किसी व्यक्ति को बदनाम करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं, इसकी कल्पना कोई शरीफ आदमी कर ही नहीं सकता।'
उन्होंने भाजपा की विचारधारा को आजादी से पहले के 'देशद्रोहियों' से जोड़ा। अखिलेश ने लिखा, "आजादी से पहले, वर्तमान सत्ता के जो 'संगी-साथी' देश के दुश्मनों से मिले हुए थे और स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी के फंदों तक पहुंचाने के लिए आजादी के दीवानों के खिलाफ मुखबिरी जिनका काम रहा है और जो देश को गुलाम बनाने वाले साम्राज्यवादियों के माफी-वजीफे पर रहकर अपनी भूमिगत भूमिका निभाते रहे हैं, छल-छलावे के वो विचारवंशी भाजपाई, आज किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं। भाजपा के लिए ये समाचार किसी 'नैतिक मृत्युदंड' से कम नहीं है।"
भाजपा इच्छाधारी नाग, एजेंसियां चुनावी हथियार: कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक्स पर केजरीवाल और सिसोदिया को बरी करने वाली ख़बर साझा करते हुए बीजेपी की तुलना 'इच्छाधारी नाग' से की। उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि आकार बदलने वाला सांप है, जो सिर्फ 'कांग्रेस मुक्त भारत' के लिए कुछ भी कर सकती है। खेड़ा ने लिखा, 'बीजेपी राजनीतिक पार्टी नहीं है। यह आकार बदलने वाली, इच्छाधारी नाग है। वह एक जुनूनी लक्ष्य के लिए किसी भी स्तर पर गिर सकती है: कांग्रेस को हराना - कांग्रेस मुक्त भारत। 12 साल तक उन्होंने टीएमसी पर जहर उगला। और अब? नरेंद्र मोदी खुद टीएमसी की तारीफ कर रहे हैं - सम्मान से नहीं, बल्कि कांग्रेस पर सस्ता वार करने के लिए।'
उन्होंने चुनावों के करीब आने पर कांग्रेस नेताओं पर मामले बढ़ने की भविष्यवाणी की। खेड़ा ने पी. चिदंबरम का उदाहरण दिया और कहा, 'चुनाव आ रहे हैं। स्क्रिप्ट तय है। कांग्रेस नेताओं पर मामले अचानक तेज होंगे - पी. चिदंबरम को फिर घसीटा जा रहा है क्योंकि तमिलनाडु में चुनाव हैं। वहीं, आप और अन्यों पर मामले गुजरात और पंजाब चुनावों के चलते चुपचाप गायब हो जाएंगे।'
खेड़ा ने बीजेपी की रणनीति पर कहा,
यही भाजपा का असली खेल है: प्रतिशोध को शासन बनाना और जांच एजेंसियों को चुनावी औज़ार की तरह इस्तेमाल करना। पवन खेड़ा
कांग्रेस प्रवक्ता
सीबीआई अब सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इमेजिनेशन: प्रियंका चतुर्वेदी
शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सीबीआई पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, 'सीबीआई - भारत की प्रमुख एजेंसी को अब रीब्रैंड कर देना चाहिए: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इमेजिनेशन ~ भाजपा की प्रमुख एजेंसी। क्या गिरावट है!'
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, 'उन्होंने झूठ, प्रोपेगैंडा, ज़हरीले पॉलिटिकल एजेंडा का मुकाबला किया और पक्का किया कि सच और इंसाफ़ की जीत हो। बहुत बढ़िया अरविंद केजरीवाल जी और मनीष सोसिदिया जी!'
दिल्ली में दोबारा चुनाव हों: तेजस्वी यादव
आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में दिल्ली में नए चुनाव की मांग की। उन्होंने कहा, 'राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले ने साबित कर दिया कि शराब घोटाले के आरोप झूठे थे। केंद्र सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से विपक्षी नेताओं के खिलाफ संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया। दिल्ली चुनाव शराब घोटाले के मुद्दे पर लड़ा गया था और अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाकर जनता की राय बदलने की कोशिश की गई। अब जब आरोप झूठे साबित हो गए, तो दिल्ली में असली मुद्दों पर दोबारा चुनाव होने चाहिए।'
उन्होंने कहा, 'इस झूठे मामले की वजह से अरविंद केजरीवाल चुनाव हारे। इसका मुआवजा कौन देगा? मैं दिल्ली में असली मुद्दों पर दोबारा चुनाव की मांग करता हूं।'
तेजस्वी ने सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी और लालू प्रसाद यादव जैसे नेताओं का उदाहरण दिया। आईआरसीटीसी लैंड-फॉर-जॉब्स मामले पर कहा, 'सीबीआई ने तीन बार जांच की और केस बंद कर दिया। फिर भी दोबारा केस खोला गया। यही भाजपा की राजनीति है।'
बीजेपी का जवाब और सीबीआई की अपील
चौतरफ़ा घिरी बीजेपी से अब जवाब देते नहीं बन रहा है। जवाब भी दिया तो सीबीआई की आड़ में। बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने बचाव में कहा, 'अदालत ने सबूतों की कमी के कारण बरी किया है। यह तकनीकी मुद्दा है। सीबीआई अगला कदम उठाएगी। पार्टी फैसले का विस्तार से अध्ययन कर जवाब देगी। सोचिए - अगर आरोप निराधार थे, तो चार्ज कैसे फ्रेम हुए?'
मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सीबीआई ने कहा कि वह दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करेगी। हालाँकि एजेंसी की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक असर क्या होगा?
यह फ़ैसला आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी राहत है, लेकिन विपक्ष इसे बीजेपी के खिलाफ बड़ा हथियार बना रहा है। कई राज्यों में आने वाले चुनावों से पहले जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे राजनीतिक जवाबदेही और एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। विपक्ष का हमला जारी है, जबकि बीजेपी एक तरह से चुप्पी साधे हुए है।