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2024 पर है ममता की नज़र, प्रशांत किशोर के साथ बढ़ाया करार 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की टीम के साथ अपने करार को 2026 तक के लिए बढ़ा दिया है। जबकि प्रशांत किशोर ने कई टीवी इंटरव्यू के दौरान इस बात को कहा था कि वह बंगाल चुनाव के बाद चुनाव प्रबंधन और रणनीति बनाने का काम छोड़ देंगे। 

इसका सीधा मतलब है कि दीदी 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती, इसके अलावा 2026 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव भी होंगे। 

प्रशांत किशोर की कंपनी का नाम इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) है और यह कई राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति बना चुकी है। बताया गया है कि प्रशांत किशोर की कंपनी पहले की तरह ही पश्चिम बंगाल में काम करती रहेगी यानी वह फ़ील्ड और दफ़्तर दोनों जगह काम करेगी। 

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2019 से लिया सबक 

ममता बनर्जी जानती हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 18 सीटों पर जो जीत मिली थी, वह उनके अनुमान से कहीं ज़्यादा थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में वह शायद बीजेपी को उसके इस प्रदर्शन को नहीं दोहराने देंगी और उसे मिली बढ़त को कम करने की कोशिश करेंगी। 

2019 में टीएमसी को जबरदस्त सियासी नुक़सान हुआ था और वह 2014 में मिली 34 सीटों के मुक़ाबले 22 सीटों पर आकर रुक गई थी। ऐसे में ममता बनर्जी ने दूर की सोच रखते हुए ही प्रशांत किशोर की कंपनी के साथ अपने अनुंबध को विस्तार दिया है।

प्रशांत किशोर का जलवा 

प्रशांत किशोर ने बंगाल विधानसभा चुनाव में एक बार फिर अपने रणनीतिक कौशल का लोहा मनवाया और बीजेपी के पूरी ताक़त लगाने के बाद भी उसे उसके इरादों में क़ामयाब नहीं होने दिया। बंगाल के अलावा किशोर ने तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में भी रणनीति बनाने का काम किया और वहां भी डीएमके प्रमुख स्टालिन को जीत मिली। 

इसके अलावा भी वह 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम सहित 2015 में एनडीए महागठबंधन, 2020 में आम आदमी पार्टी सहित कई दलों के लिए काम कर चुके हैं। उनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। 

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पवार से की थी मुलाक़ात 

हाल ही में प्रशांत किशोर ने जब एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाक़ात की थी तो इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ग़ैर बीजेपी-ग़ैर कांग्रेसी दलों का गठबंधन बनाने की कवायद के तौर पर देखा गया था। हो सकता है कि प्रशांत किशोर आने वाले दिनों में पवार को विपक्ष का चेहरा बनाने या मज़बूत गठबंधन की रणनीति बनाते दिखाई दें। 

पवार ने इस साल मार्च में कहा भी था कि देश में थर्ड फ्रंट यानी तीसरे मोर्चे की ज़रूरत है और वह इस मामले में कई पार्टियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। 

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