राहुल गांधी ने TMC की हार पर कांग्रेस नेताओं को चेताया और कहा है कि असम और पश्चिम बंगाल में मैनडेट की 'चोरी' हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'बीजेपी भारतीय लोकतंत्र को तबाह करने के मिशन पर है'।
राहुल गांधी और ममता बनर्जी
राहुल गांधी ने बंगाल में टीएमसी की हार पर कांग्रेस के नेताओं और अन्य लोगों को चेताया है कि वे इस पर खुश नहीं हों। उन्होंने साफ़ शब्दों में लोगों से कह दिया कि टीएमसी की हार पर खुशी मनाना बंद करें। राहुल ने कहा कि यह छोटी-मोटी राजनीति का समय नहीं है, बल्कि देश के लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है।
राहुल गांधी ने कहा, 'कांग्रेस के कुछ लोग और दूसरे भी टीएमसी की हार पर खुशी मना रहे हैं। उन्हें यह बात साफ समझ लेनी चाहिए कि असम और बंगाल में जनता का वोट चुराना बीजेपी के लिए भारत के लोकतंत्र को तबाह करने के मिशन में एक बड़ा क़दम है। छोटी राजनीति को एक तरफ़ रखिए। यह किसी एक पार्टी की बात नहीं है, यह भारत की बात है।'
ममता को राहुल का साथ!
यह 24 घंटे के अंदर दूसरी बार है जब राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ दिया। इससे पहले सोमवार को उन्होंने कहा था, 'हम ममता जी से सहमत हैं। बंगाल में 100 से ज्यादा सीटें चुराई गई हैं।' राहुल ने एक्स पर पोस्ट कर कहा था, 'असम और बंगाल, ये साफ़ उदाहरण हैं कि कैसे बीजेपी ने चुनाव आयोग के सहयोग से चुनाव चुराया है। हम ममता जी से सहमत हैं। बंगाल में 100 से ज़्यादा सीटें चुराई गईं। हमने यह तरीका पहले भी देखा है। मध्य प्रदेश। हरियाणा। महाराष्ट्र। लोकसभा 2024, आदि। चुनाव चोरी, संस्था चोरी- अब और चारा ही क्या है!'
राहुल का यह बयान ऐसे समय आया है जब बीजेपी ने बंगाल में बेहतरीन प्रदर्शन किया और टीएमसी को बड़ा झटका लगा है। चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटें जीती हैं, जबकि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई है। इस बार पार्टी को 100 से ज़्यादा सीटों का नुक़सान हुआ है।
ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव में बीजेपी की इस जीत को 'लूट' क़रार दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि 'भाजपा ने 100 से ज्यादा सीटें लूट ली हैं'। उन्होंने इस जीत को अनैतिक बताया है और कहा है कि तृणमूल कांग्रेस भविष्य में वापसी करेगी। लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर विपक्ष के कुछ लोगों द्वारा टीएमसी की हार की 'खुशी' मनाए जाने की ख़बरें आईं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने भी बताया शर्मनाक
शिवसेना यूबीटी की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी विपक्षी दलों में हो रही खुशी को शर्मनाक बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'इंडिया गठबंधन के अंदर टीएमसी और डीएमके की हार पर जो खुशी दिखाई जा रही है, वह देखकर शर्म आती है। जब अरविंद केजरीवाल, तेजस्वी यादव हारे या आप के अंदर टूट हुई, तब भी इसी तरह की बातें हुईं। अब अखिलेश यादव पर निशाना साधा जा रहा है। ये फूट वोटर पसंद नहीं करते और भाजपा इसका फायदा उठाती है।' प्रियंका ने याद दिलाया कि 2024 के चुनाव में सभी विपक्षी दलों के साथ मिलकर काम करने से अच्छे नतीजे आए थे। अधीर रंजन चौधरी का तीखा हमला
दूसरी तरफ़, कांग्रेस के बंगाल प्रभारी अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'ममता बनर्जी ने भाजपा के लिए रेड कार्पेट बिछाया और दावत दी। अब टीएमसी को इसका नुकसान भुगतना पड़ रहा है।' अधीर रंजन ने आगे कहा, 'बंगाल में भगवा लहर आई है। लोग बदलाव चाहते थे, लेकिन टीएमसी का इस तरह गायब हो जाना हमारी कल्पना से परे था।' उन्होंने कहा कि बंगाल अब दो दलों का राज्य बन गया है और दोनों ही ध्रुवीकरण का फायदा उठाते रहे, लेकिन अपनी चालाकी के कारण अब नुकसान उठा रहे हैं।
टीएमसी की हार पर कैसी-कैसी प्रतिक्रियाएं?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद विपक्षी दलों में टीएमसी की हार को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ नेता इसे बीजेपी की साज़िश और वोट चोरी बताते हैं, तो कुछ इसे ममता बनर्जी की ग़लत नीतियों का नतीजा मानते हैं।
सोशल मीडिया पर कुछ लोग राहुल गांधी को यह याद दिला रहे हैं कि चुनाव के दौरान उन्होंने खुद भी टीएमसी और ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ हमला किया था। दरअसल, चुनाव में कांग्रेस और टीएमसी एक दूसरे की वरोधी पार्टियां थीं। कांग्रेस ने सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा और टीएमसी के खिलाफ सीधा मुकाबला किया। इस वजह से चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने टीएमसी पर 'भ्रष्टाचार और खराब शासन' का आरोप लगाया था। राहुल ने टीएमसी सरकार को 'भ्रष्ट' बताया था। उन्होंने टीएमसी पर हमला करते हुए 'गुंडा टैक्स', बेरोजगारी, विकास की कमी और आर.जी. कर अस्पताल कांड जैसे मुद्दों का ज़िक्र किया था। उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी ने साफ-सुथरी सरकार नहीं चलाई जिससे बीजेपी को मौक़ा मिला। उन्होंने कहा था कि टीएमसी बीजेपी से नहीं लड़ सकती, सिर्फ कांग्रेस लड़ सकती है। राहुल ने ममता सरकार पर विरोधी आवाज दबाने और 'गुंडाराज' चलाने के आरोप भी लगाए।
बहरहाल, अब राहुल गांधी और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे नेता मानते हैं कि इस समय विपक्ष को एकजुट रहना चाहिए और बीजेपी की 'लोकतंत्र विरोधी' रणनीति के ख़िलाफ़ एक साथ लड़ना चाहिए, बजाय एक-दूसरे की हार पर खुश होने के।
राहुल के बयान का मतलब
राहुल का ताज़ा बयान INDIA गठबंधन को मज़बूत करने और विपक्षी एकता का संदेश देने की कोशिश लगता है। प्रियंका चतुर्वेदी जैसे कुछ नेता भी इसी लाइन पर बोले। खासकर, वोट चोरी को लेकर आप नेता संजय सिंह जैसे कई नेता साथ आते दिख रहे हैं। लेकिन चुनौती यह है कि पहले से दरारें काफी ज़्यादा हैं। चुनाव के दौरान कांग्रेस ने टीएमसी के खिलाफ स्वतंत्र लड़ाई लड़ी और राहुल गांधी ने खुद ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। अधीर रंजन चौधरी जैसे कांग्रेस नेता खुलकर टीएमसी की आलोचना कर रहे हैं। टीएमसी ने भी INDIA को नजरअंदाज किया था।
इसके बावजूद इतना तो साफ़ है कि राहुल का बयान लोकतंत्र और संस्थाओं पर चिंता करने वाले कुछ नेताओं को सोचने पर मजबूर कर सकता है।