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कांग्रेस को ज़्यादा तोड़ना देश के हित में नहीं होगा: शिवसेना

ममता बनर्जी के कांग्रेस में तोड़फोड़ का क्या असर होगा, इस पर शिवसेना नेता संजय राउत ने खरी-खरी बात कही है। कांग्रेस नेताओं के तृणमूल में शामिल होने के एक सवाल के जवाब में संजय राउत ने कहा कि ममता बनर्जी ने गोवा, त्रिपुरा और मेघालय जैसे राज्यों में कांग्रेस से तोड़कर नेताओं को टीएमसी में शामिल किया है और ये छोटे राज्य हैं। उन्होंने कहा कि इससे टीएमसी को कुछ ज़्यादा हासिल नहीं होने वाला है। इसके साथ ही राउत ने यह भी कहा कि ऐसी हालत में कांग्रेस को ज़्यादा तोड़ना देश के हित में नहीं होगा। 

इस सवाल पर कि क्या उन्होंने यह बात ममता बनर्जी से कही तो संजय राउत ने कहा कि हमारी राय उन्हें मालूम है। क्या ममता बनर्जी के इस काम से बीजेपी मज़बूत होगी, इस सवाल पर शिवसेना नेता ने कहा कि ज़रूर बीजेपी मज़बूत होगी और विपक्षी एकता को नुक़सान होगा। उन्होंने 'सत्य हिंदी' के फाउंडर एडिटर आशुतोष के साथ एक इंटरव्यू में ये बातें कहीं। 

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राहुल से मुलाक़ात को लेकर शिवसेना नेता ने कहा, ‘राहुल गांधी से मेरी मुलाक़ात हमेशा होती है। इसलिए कि महाराष्ट्र में सरकार में हम साथ हैं। जब भी मैं दिल्ली में आता हूं तो उनसे अक्सर मुलाक़ात होती है। गठबंधन सरकार ऐसी ही चलती है और ऐसे ही चलानी चाहिए।’ उन्होंने राहुल गांधी को संवेदनशील नेता बताया। उन्होंने कहा कि राहुल से उनके अच्छे रिश्ते हैं। 

जिस तरह से ममता बनर्जी ने पिछले दिनों शरद पवार से मुलाक़ात की, उससे कई तरह की अटकलें सामने आईं और जो ममता बनर्जी ने कांग्रेस पर हमला किया, राहुल गांधी पर हमला किया, क्या आप उसे सही मानते हैं? 

इस सवाल के जवाब में संजय राउत ने कहा, 'नहीं। मैं सही नहीं मानता हूँ। ममता बनर्जी की अपनी एक राय हो सकती है। मैं ममता जी का आदर करता हूँ क्योंकि जिस तरह से उस अकेली महिला ने, अकेली नेता ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी से लड़ाई की और युद्ध जीत लिया तो उसका तो स्वागत ही करना चाहिए। देखिए, मुंबई में कोई भी बड़ा नेता आता है तो दो लोगों से मिलता है। एक तो शरद पवार से और दूसरे ठाकरे साहब।'

उन्होंने आगे कहा कि ममता बनर्जी मुंबई में बड़े-बड़े बिजनेसमैन व दूसरे लोगों से मिल रही थीं तो हमसे भी मुलाक़ात की। उन्होंने कहा, 'ममता बनर्जी कुछ कोशिश कर रही हैं अलग से गठबंधन बनाने की। ऐसी ही बात हुई। मेरे साथ आदित्य ठाकरे भी थे। लेकिन हमने वहाँ भी उनको बता दिया कि अगर हमको भारतीय जनता पार्टी से निर्णायक लड़ाई लड़नी है और जीत भी हासिल करनी है तो दो-तीन फ्रंट बनाकर ये लड़ाई हम नहीं लड़ सकते।'

संजय राउत ने कहा कि एक ही फ्रंट बनाना चाहिए और कांग्रेस को दूर रखकर इस प्रकार से कोई भी फ्रंट नहीं बन सकता है।

उन्होंने कहा, "यह ज़रूर है कि कांग्रेस थोड़ी कमजोर है कुछ राज्यों में। लेकिन कुछ बड़े राज्यों में कांग्रेस का अस्तित्व आज भी है। जैसे महाराष्ट्र में कांग्रेस है और रहेगी। कांग्रेस का पुराना गढ़ रहा है। गुजरात में कांग्रेस रहेगी। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान में रहेगी। आप वहाँ कांग्रेस को दूर नहीं कर सकते।'

शिवसेना नेता ने कहा, 

पूरे देश में कांग्रेस ऐसी पार्टी है, चाहे वह सत्ता में रहे या नहीं रहे, हर गांव में कांग्रेस का कार्यकर्ता है। कांग्रेस का संगठन है। तो यह सब विचार करके कांग्रेस को साथ देना चाहिए और कांग्रेस के साथ ही एक विकल्प देना चाहिए।


संजय राउत, शिवसेना नेता

ममता जिस तरह कांग्रेस को कमजोर करने पर तूली हैं उससे विपक्ष मज़बूत होगा या कमजोर होगा? इस सवाल पर राउत ने कहा, 'विपक्ष कमजोर होगा। हम सबकी ज़िम्मेदारी यह है कि हम सबको मिलकर कांग्रेस को थोड़ी ताक़त देनी चाहिए। कांग्रेस को बीजेपी ने नहीं ख़त्म किया, कांग्रेस को विपक्ष ने ख़त्म किया है। हर स्टेट में वहाँ की लोकल पार्टी यानी विपक्ष उनकी स्पेस ले रही हैं, उसमें कांग्रेस ख़त्म हो जाएगी तो देश में कोई नेशनल पार्टी विपक्ष में नहीं रहेगी जो कांग्रेस का स्थान रहा है।'

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मुंबई में शरद पवार के साथ ममता की मुलाक़ात।

उन्होंने कहा कि विपक्ष में एक पार्टी ऐसी होनी चाहिए जो 100 के ऊपर सीट लेकर आए तो ही कुछ नया प्रयोग बन सकता है। उन्होंने कहा, "इससे काम नहीं बनेगा कि किसी को 10 सीट मिल गई, किसी को 20 सीट मिल गई। जब तक कांग्रेस पार्टी कम से कम 125-130 सीट लेकर नहीं आती तब तक कोई 'खेला नहीं होबे'।"

एक सवाल के जवाब में कि क्या वह किसी ब्लैकमेलिंग जैसे दबाव में आ गई हैं और इसलिए कांग्रेस के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है तो राउत ने कहा कि ममता बनर्जी किसी दबाव में आने वाली नेता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह संघर्ष करने वाली नेता हैं और वह ऐसे किसी दबाव में नहीं आ सकती हैं। 

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बता दें कि संजय राउत ने मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाक़ात की थी। मुलाक़ात के बाद राउत ने पत्रकारों से कहा, “विपक्ष को कैसे साथ रखना है, इस बारे में चर्चा हुई है। हमने पहले भी कहा है कि अगर कोई फ्रंट बनता है तो वह कांग्रेस के बिना संभव नहीं है। कोई अगर अलग फ्रंट बनाएगा तो कांग्रेस के नेतृत्व वाला फ्रंट तो अपना काम करेगा ही।” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जल्द ही मुंबई आने वाले हैं और मुलाक़ात के दौरान पांच राज्यों के चुनाव पर भी बात हुई है। 

उन्होंने कहा था कि विपक्ष का एक ही फ्रंट होना चाहिए और ज़्यादा फ्रंट का कोई मतलब नहीं है। शिवसेना नेता ने कहा कि वह इसे लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को जानकारी देंगे।

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