ममता बनर्जी ने SIR विवाद पर बीजेपी और चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और विपक्ष की आगे की रणनीति तय करने के लिए दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक होगी। उन्होंने कहा है कि राहुल को उन्होंने संदेश भेजा है।
नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने एसआईआर विवाद के बीच चुनाव आयोग और बीजेपी को चेतावनी दी है कि 'आपने बंगाल लिया, हम दिल्ली ले लेंगे।' ममता ने एसआईआर विवाद पर विपक्षी एकता की अपील दोहराई और कहा कि इस मुद्दे पर दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक होने वाली है। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संदेश भेजा है। उन्होंने राहुल से कहा कि विपक्षी दलों को एक साथ बैठकर चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर अपनी रणनीति तय करनी चाहिए। एक दिन पहले ही यह पहली बार हुआ है कि धुर विरोधी वाम मोर्चा और ममता बनर्जी के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हुई है और साझा मोर्चा खोलने की तैयारी है।
हुगली जिले के सेरामपुर में शनिवार को एक रैली को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, 'मैंने राहुल गांधी को संदेश भेजा है और कहा है कि हमें एक साथ बैठना चाहिए। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 30 सितंबर को इंडिया गठबंधन की बैठक होने की पूरी संभावना है।' यह बैठक चुनाव आयोग, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर केंद्रित होने वाली है। देशभर में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं।
ममता ने जोर देकर कहा कि जब आम लोगों के मुद्दों पर लड़ाई हो तो दलों को विचारधारा के अंतर को बीच में नहीं आने देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'लाल, नीला या पीला देखने की ज़रूरत नहीं है। हम मुद्दे को देखेंगे, पार्टी की पहचान को नहीं।' उन्होंने आगे कहा, 'हमारा संघर्ष अधिकारों, आजादी और गरिमा के लिए है। जो भी पार्टी लोगों के अधिकारों के लिए लड़ेगी, हम उसके साथ खड़े रहेंगे।'
ममता, सीपीएम के बीच बातचीत
एसआईआर और चुनाव आयोग के इस मुद्दे पर ममता खेमेे की तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम के बीच भी बातचीत शुरू हुई है। दोनों दल लंबे समय से एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी और सीपीएम महासचिव एमए बेबी ने शुक्रवार को फोन पर बात की। इससे पहले दोनों ने एक दूसरे को चिट्ठियाँ भेजी थीं।
बेबी ने विपक्षी दलों से चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर एकजुट होने की अपील की थी। ममता ने भी सहमति जताई कि समन्वित जवाब देने की ज़रूरत है और इंडिया गठबंधन को जल्द से जल्द बैठना चाहिए। बेबी ने अन्य विपक्षी नेताओं को भी पत्र लिखकर चर्चा की मांग की है। 30 सितंबर की प्रस्तावित बैठक कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से एक दिन पहले हो सकती है।
INDIA गठबंधन की पुरानी मुश्किलें भी सामने
INDIA गठबंधन का गठन 2023 में 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले हुआ था। अलग-अलग विचारधारा और क्षेत्रीय हितों वाली कई पार्टियां इस गठबंधन में शामिल हुई थीं। जून 2023 में पटना में गठबंधन की पहली बैठक हुई थी। इसके बाद जुलाई 2023 में बेंगलुरु में बैठक हुई, जहां गठबंधन को औपचारिक रूप से INDIA नाम दिया गया।इंडिया गठबंधन के भीतर चुनावी रणनीति, सीट बंटवारे और राज्यों में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर मतभेद भी सामने आते रहे हैं। पश्चिम बंगाल में इसका एक उदाहरण 2024 का लोकसभा चुनाव था। टीएमसी और कांग्रेस ने राज्य में अलग-अलग चुनाव लड़ा, जबकि सीपीएम के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा भी अलग चुनाव मैदान में था।
इसी पृष्ठभूमि में एसआईआर जैसा संस्थागत मुद्दा विपक्षी दलों को साझा मंच पर लाने की कोशिश का आधार बन रहा है।
SIR विवाद ने विपक्षी दलों को साझा मुद्दा दिया
एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ अलग-अलग राज्यों में सामने आती रही हैं। उनका मुख्य सवाल यह है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम न छूटें और नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया बाधित न हो।
इसी संदर्भ में चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से एसआईआर और मतदाता सूची प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर कथित रूप से दर्ज की गई आपत्तियों की खबरें भी सामने आई हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार अलग-अलग मुद्दों पर आपत्ति या सुझाव दर्ज किए थे। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म 6 और मतदाता डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल थे।हालांकि चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और निर्णय सर्वसम्मति से हुए। आयोग ने अलग-अलग सुझावों और आपत्तियों को संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताया है।
रैली में हमले और रुकावट डालने का आरोप
बहरहाल, ममता बनर्जी ने रैली स्थल पहुंचने के दौरान तृणमूल नेता कुणाल घोष पर कथित बीजेपी कार्यकर्ताओं के हमले की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके गुट के नेताओं को घर में नजरबंद रखा गया ताकि वे सेरामपुर की रैली में शामिल न हो सकें। उन्होंने कहा कि उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। ममता ने उत्तरपाड़ा के बजाय दनकुनी और दिल्ली रोड से वैकल्पिक रास्ता अपनाया। उनके काफिले के साथ पुलिस का एक वाहन भी था। उन्होंने आरोप लगाया, 'रैली स्थल के रास्ते पर बीजेपी के गुंडों ने कब्जा कर लिया है। वहां पुलिस कर्मी नहीं हैं।'
नंदीग्राम उपचुनाव और अन्य मुद्दे
ममता ने कांग्रेस के नंदीग्राम उपचुनाव उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाया। यह गिरफ्तारी 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में हुई है। तृणमूल के ममता गुट के उम्मीदवार ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद चुनाव से नाम वापस ले लिया था, जिसके बाद ममता ने मिलन प्रधान को समर्थन दिया था। इससे पहले ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी और एसआईआर से पहले की मतदाता सूची पर नए विधानसभा चुनाव कराने की बात कही थी।ममता की हार के बाद बंगाल में बवाल
पश्चिम बंगाल में 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद तृणमूल कांग्रेस हार गई और बीजेपी सत्ता में आई है। 2011 में खुद तृणमूल ने ही वाम मोर्चे के 34 साल के शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की थी।
बहरहाल, इंडिया गठबंधन का गठन 2023 में 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले हुआ था। इसमें अलग-अलग विचारधारा वाले दल शामिल हैं। बंगाल में 2024 के चुनाव में तृणमूल, कांग्रेस और वाम दल अलग-अलग लड़े थे। ऐसे में ममता का अब एकजुटता का आह्वान खास माना जा रहा है।
चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण इसकी शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। संस्थागत प्रक्रिया में मतभेद सामान्य बात है। ममता बनर्जी की इस रैली और बयान से साफ है कि एसआईआर विवाद को लेकर विपक्ष एक मंच पर आने की कोशिश कर रहा है। दिल्ली में प्रस्तावित बैठक में आगे की रणनीति तय होने की उम्मीद है।