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बादल परिवार से ‘मिलीभगत’ को लेकर भिड़े अमरिंदर सिंह और चन्नी 

बादल परिवार पर हमला बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी आमने-सामने आ गए हैं। बादल परिवार से मतलब पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल से है। पहले चन्नी ने कहा कि अमरिंदर सिंह की बादल परिवार से मिलीभगत है तो अमरिंदर ने भी यह कहकर इसका जवाब दिया कि चन्नी ने अपने भाई को लुधियाना सिटी सेंटर मामले से बचाने के लिए बादल परिवार का समर्थन किया था। 

अमरिंदर सिंह का कहना है कि यह उस वक़्त की बात है जब चन्नी निर्दलीय विधायक थे। 

इससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू ने अमरिंदर सिंह पर मुख्यमंत्री रहते हुए जब हमला बोला था तो उन्होंने भी बादल परिवार का सहारा लिया था और कहा था कि अमरिंदर सिंह बेअदबी मामले में इस परिवार को बचाने का काम करते रहे। 

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चन्नी ने मंगलवार को ये तक कह दिया कि अमरिंदर ने नई पार्टी शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए बनाई है। जबकि अमरिंदर का कहना है कि उन्होंने 2002 में बादल परिवार को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया था और इसके बाद इस परिवार ने उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा किया था, जिसे वह 13 साल तक लड़ते रहे। 
Amarinder singh and Channi fight on Badal family - Satya Hindi

मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटने के बाद ऐसा नहीं देखा गया था कि चन्नी और अमरिंदर ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ कुछ बोला हो। लेकिन चन्नी का अमरिंदर पर हमला बोलना इस बात को दिखाता है कि कांग्रेस को इस बात का अंदेशा है कि अमरिंदर अपनी नई पार्टी के जरिये उसे सियासी नुक़सान पहुंचा सकते हैं। बीते दिनों में उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और कैबिनेट मंत्री अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने पाकिस्तानी पत्रकार अरूसा आलम के साथ दोस्ती को लेकर कैप्टन को घेर लिया था। लेकिन कैप्टन ने भी इसका जोरदार जवाब दिया था। 

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सिद्धू भी बने मुसीबत 

कांग्रेस हाईकमान की चिंता इस बात को लेकर है कि क्या कांग्रेस के कुछ विधायक, मंत्री अमरिंदर सिंह के साथ जा सकते हैं। राज्य में साढ़े तीन महीने के भीतर विधानसभा के चुनाव होने हैं और बीते एक साल से कांग्रेस में घमासान चल रहा है। अमरिंदर सिंह के अलावा प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन गए हैं। पहले अमरिंदर सिंह से भिड़ने वाले सिद्धू अब चन्नी को घेरने में जुटे हैं।

सिद्धू को मनाने के लिए ही  एडवोकेट जनरल एपीएस देओल को राज्य सरकार ने हटा दिया लेकिन सिद्धू के तेवर कम होते नहीं दिख रहे हैं। सिद्धू के मन में इस बात की टीस है कि उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया और वे आए दिन चन्नी सरकार के फ़ैसलों पर सवाल उठाते रहते हैं। 
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