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पंजाब में 15 मंत्रियों ने ली शपथ, अमरिंदर सरकार के कई लोग शामिल

पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी मंत्रिमंडल के 15 सदस्यों ने रविवार की शाम शपथ ले ली। राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने उन्हें पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें से सात नए लोग हैं।

चन्नी मंत्रिमंडल पर एक नज़र डालने से यह साफ हो जाता है कि केंद्रीय नेतृत्व ने संतुलन बनाने की भरपूर कोशिश की है। मंत्रिमंडल में कैप्टन अमरिंदर के विरोधियों को शामिल किया गया है तो उन लोगों को भी जगह दी गई है जो उनके नजदीक थे। अमरिंदर सिंह सरकार के कई लोग चरणजीत सिंह चन्नी सरकार में भी हैं।

इसी तरह संतुलन कायम रखने के लिहाज से ही दलितों को सरकार में शामिल किया गया है तो जाटों और ओबीसी को भी। सिर्फ एक मुसलमान को मंत्री बनाया गया है। चन्नी सरकार में सिर्फ दो महिला मंत्री हैं।

ब्रह्म मोहिंद्रा ने सबसे पहले शपथ ली। वे पटियाला देहात से विधायक हैं, राज्य के बड़े हिन्दू नेता माने जाते हैं, वे छह बार विधानसभा सदस्य चुने गए। वे इसके पहले भी पंजाब सरकार में मंत्री रह चुके हैं। 

मनप्रीत बादल 2007 से 2010 तक वित्त मंत्री थे। साल 1995 में पहली बार विधायक बने बादल अब तक पाँच बार विधायक चुने जा चुके हैं। वे अमरिंदर सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। 

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तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने भी पद व गोपनीयता की शपथ ली। वे उन लोगों में से हैं, जिन्होंने सरकार में रहते हुए कैप्टन अमरिेंदर सिंह का विरोध किया था। 
अरुणा चौधरी दीना नगर से विधायक हैं, वे तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं। वे पंजाब महिला कांग्रेस का प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं। 
सुखबिन्दर सिंह सरकारिया कैप्टन अमरिेंदर सिंह के प्रमुख विरोधियों में से हैं, उन्होंने सबसे पहले बग़ावत का बिगुल फूंका था। वे राजा सांसी से विधायक हैं। वे 2007, 2012 और 2017 में इस सीट से विधायक बने। 

राणा गुरजीत सिंह ने तमाम विरोधों के बीच पद व गोपनीयता की शपथ ले ली। वे जालंधर से सांसद चुने गए थे। बाद में विधायक भी बने। 

शपथ ग्रहण के कुछ घंटे पहले छह विधायकों ने पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू को एक चिट्ठी लिख कर राणा गुरजीत सिंह को मंत्री बनाए जाने के फ़ैसले का विरोध किया था।

सिद्धू को चिट्ठी

इन विधायकों ने चिट्ठी में लिखा था कि एक बालू खनन घोटाले में गुरजीत सिंह और उनके परिवार के लोगों के नाम आने के बाद गुरजीत सिंह को जनवरी 2018 में अमरिेंदर सिंह सरकार से निकाल दिया गया था। इस घोटाले में राज्य सरकार को 25 करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ था।  

इस चिट्ठी में कहा गया था कि गुरजीत सिंह को सरकार में शामिल न किया जाए। लेकिन उन्हें सरकार में शामिल किया गया है। 

रजिया सुलताना कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में मंत्री थीं। उन्होंने 2018 में सरकार से इस्तीफ़ा दिया था। उनके पति मुहम्मद मुस्तफ़ा नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार हैं।
रजिया मलेर कोटला से विधायक हैं। वे तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं।  वे चन्नी सरकार की अकेली मुसलिम मंत्री हैं। 
अमरिंदर सिंह सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके विजय इंदर सिंह सिंगला तीन बार विधायक रह चुके हैं। वे पहली बार 2017 में संगरूर से विधायक चुने गए। वे गांधी परिवार के नज़दीक माने जाते हैं। 
भारत भूषण आशु लुधियाना पश्चिम से विधायक हैं। वे इसके पहले राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री रह चुके हैं। वे 2012 और 2017 में विधायक चुने गए। वे कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। 
रणदीप सिंह नाभा को फतेहगढ़ के अमलोह से लगातार चार बार विधायक चुना गया है। विधानसभा पुस्तकालय कमेटी के सदस्य हैं। वे पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माने जाते हैं। 
राजकुमार वेरका अमृतसर पश्चिम से विधायक हैं। वे राजनीति में आने से पहले पंजाबी फ़िल्मों में काम कर चुके हैं। वे पहली बार 2012 में विधायक चुने गए थे।
वे पंजाब कांग्रेस का दलित चेहरा हैं। उन्होंने औरों से हट कर शपथ ग्रहण में बाबा साहेब आंबेडकर का नाम लिया।
संगत सिंह गिलजियान को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वे कैप्टन अमरिेंदर सिंह के धुर विरोधी हैं और उन्होंने शुरू से ही उनका विरोध किया था। वे उरमार से 2017 में तीसरी बार विधायक चुने गए।  
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह को भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। वे 2012 में पहली बार विधायक चुने गए। वे जलंधर कैंट से विधायक हैं। परगट सिंह नवजोत सिंह सिद्धू के नज़दीक माने जाते हैं। वे पाँच दिन पहले ही पंजाब कांग्रेस के महासचिव नियुक्त किए गए थे। 
अमरिंदर सिंह राजा वडिंग छात्र राजनीति से विधानसभा तक पहुँचे हैं। वे गांधी परिवार के नजदीक समझे जाते हैं। वे कैबिनेट के सबसे युवा मंत्री हैं। उन्होंने 2019 में बठिंडा से चुनाव लड़ा था, हार गए थे। वे कैप्टन अमरिंदर सिंह के विरोधियों में से हैं और उनकी यही छवि थी। 
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पौत्र गुरकीरत कोटली को भी मंत्री बनाया गया है। वे पहली बार 2012 में विधायक चुने गए। वे यूथ कांग्रेस में थे। पंजाब कांग्रेस के युवा चेहरा माने जाते हैं। 
मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को शुरू से विरोध का सामना करना पड़ रहा है। छह विधायकों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को जो खत लिखा था, उसमें राणा गुरजीत सिंह का विरोध तो किया गया था ही, यह एक तरह से मुख्यमंत्री का भी विरोध था। इसे केंद्रीय नेतृत्व का भी विरोध समझा जा सकता है। 
कांग्रेस के छह विधायकों ने सिद्धू को लिखी चिट्ठी में सरकार में होने वाले फेरबदल पर ही सवाल उठाए थे। इसमें यह कहा गया था कि दोआबा इलाक़े से जाट सिखों और जाट ओबीसी नेताओं को मंत्री बनाया जा रहा है जबकि इस इलाक़े में दलित सिखों की संख्या ज़्यादा है। 

चिट्ठी का मतलब?

यह चिट्ठी अहम इसलिए भी है कि नए मंत्रियों के नाम केंद्रीय नेतृत्व के परामर्श के बाद ही तय किए गए हैं। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी खुद दिल्ली आए थे। कई घंटों तक चली बैठक में इन नामों पर अंतिम मुहर लगी थी। इन बैठकों में पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत के अलावा महासचिव अजय माकन भी मौजूद थे। खुद राहुल गांधी ने इन नामों पर अपनी सहमति दी थी। 

यह भी साफ है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने अमरिंदर सिंह का विरोध तो किया ही था, वे नए मुख्यमंत्री का भी विरोध कर रहे हैं और उन्हें अभी से ही चुनौती दे रहे हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि जिन लोगों ने यह चिट्ठी लिखी है, वे सिद्धू के करीबी समझे जाते हैं।
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