loader

रातों-रात बदले पंजाब कांग्रेस के समीकरण? माजरा क्या है?

पंजाब कांग्रेस में अचानक और आश्चर्यजनक रूप से समीकरण बदल रहे हैं। एक दिन पहले अपनी ही सरकार पर हमलावर होने वाले प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने एक साथ केदारनाथ धाम की यात्रा की तथा उसी शाम चंडीगढ़ में एक बैठक में बाक़ायदा यह संदेश दिया कि 'हम साथ साथ हैं!' 

ठीक इसी दिन पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी 'पंजाब लोक कांग्रेस' की घोषणा कर दी। 

हालांकि राजनीतिक तौर पर कैप्टन के हाथ फिलहाल खाली हैं। फौरी तौर पर कोई विधायक या सांसद उनके साथ नहीं आया है। 

करीब अस्सी साल के होने को आए दिग्गज नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी की बैसाखियों के सहारे नई पार्टी का एलान किया है, इस तथ्य से सभी वाकिफ हैं।

सूबे में ज्यादा चर्चा इसे लेकर है कि आखिर नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी की ताजा 'मिलनी' के पीछे क्या है? रातों-रात ऐसा क्या हुआ कि सिद्धू के तेवर ढीले पड़ गए और मुख्यमंत्री भी नरम। 

सूत्रों के मुताबिक़, कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी ने दोनों के बीच विशेष बैठक करवाई और इसमें फैसला हुआ कि चन्नी प्रशासनिक स्तर पर पूरा जोर लगाएं और सिद्धू संगठन को ज्यादा से ज्यादा मजबूत करें। 

ताज़ा ख़बरें

चन्नी-सिद्धू में समझौता! 

एक 'समझौता' हुआ। जिसके तहत तय हुआ कि अगर पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बहुमत में आती है तो ढाई साल चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री रहेंगे और बाद में नवजोत सिंह सिद्धू। पंजाब के एक वरिष्ठ मंत्री और नेता ने नाम न छापने की शर्त पर इस बात की पुष्टि की। 

बताया जाता है कि केदारनाथ धाम की यात्रा के बाद जब दोनों पंजाब प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रभारी हरीश रावत से देहरादून में मिले तो उन्होंने भी इस पर अपनी सहमति दी। 

Navjot sidhu channi meet in Punjab Congress - Satya Hindi

सिद्धू की शिकायत 

हालांकि मीडिया में खबरें यह भी हैं कि पहले हरीश रावत से आधे घंटे की अलग मुलाकात में मुख्यमंत्री ने सिद्धू की जमकर शिकायत की। सूत्रों के मुताबिक रावत ने चन्नी को आश्वस्त किया कि वह पूरा मामला आलाकमान के आगे रखेंगे। उसके बाद उन्होंने सिद्धू से बात की। फिर तीनों और हरीश चौधरी बैठे।   

                              

इसके बाद नवजोत सिंह सिद्धू के तेवर बिल्कुल बदल गए। उन्होंने केदारनाथ धाम यात्रा की तसवीरें ट्विटर पर डालते हुए टिप्पणी की, 'जिंदगी नाजुक है, अरदास से इसे संभालिए।' दूसरी तरफ चरणजीत सिंह चन्नी ने ट्वीट किया, 'उत्तराखंड के केदारनाथ तीर्थ स्थल पर मत्था टेका और पंजाब की तरक्की तथा लोगों की खुशहाली की अरदास की।' यानी दोनों के ट्वीट में तल्खी भरा कुछ नहीं था। 

राज्य के सियासी गलियारों में हैरानी प्रकट की जा रही है कि कल तक चन्नी की घेराबंदी करने वाले सिद्धू आज उनके साथ प्रेमालाप भरी फोटो शेयर कर रहे हैं।

सिद्धू-चन्नी ने ली बैठक

केदारनाथ वापसी के फौरन बाद पंजाब में बैठक हुई। इसमें नवजोत सिंह सिद्धू ने भी शिरकत की। बैठक के बाद सिद्धू ने कहा, 'सब अच्छा है!' इस बैठक में प्रभारी हरीश चौधरी विशेष रूप से शामिल थे। हालांकि यह बैठक इसलिए भी बुलाई गई कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद के घटनाक्रम का विश्लेषण किया जाए। पार्टी के लगभग तमाम विधायक इस बैठक में पहुंचे।                                    

दरअसल, कैप्टन का नया क़दम चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू, दोनों के लिए एक समान राजनीतिक चुनौती है। 

पंजाब से और ख़बरें

टिकट बंटवारे में होगा घमासान 

हाल-फिलहाल कैप्टन के साथ राज्य कांग्रेस का कोई बड़ा नेता, विधायक या सांसद खुलकर नहीं है लेकिन टिकट वितरण के दौरान आलम बदल सकता है। तब कांग्रेस में बड़ी बगावत की आशंका है। न्यूनतम ताकत होने के बावजूद कैप्टन ने चन्नी और सिद्धू के सियासी वजूद को जबरदस्त चुनौती तो दे ही दी है। 

कहा नहीं जा सकता कि सिद्धू-चन्नी की नई जुगलबंदी कितनी दूर तक जाएगी लेकिन राज्य कांग्रेस के भीतर से ही कुछ वरिष्ठ नेताओं की भौंहें तन गईं हैं।

जाखड़ का तंज 

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील कुमार जाखड़ ने ट्वीट करके तंज कसा, "कुछ राजनीतिक श्रद्धालु हर देवता को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं।" साफ तौर पर उनकी टिप्पणी मुख्यमंत्री तथा नवजोत सिंह सिद्धू की हरीश रावत से मुलाकात पर है। 

वहीं, लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने ट्वीट किया कि कांग्रेस के जो चेहरे उत्तराखंड में इकट्ठे दिखाई दे रहे हैं, वे पंजाब में क्यों दिखाई नहीं देते!' 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
अमरीक
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

पंजाब से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें