पंजाब के मानसा में नशे के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद बवाल हो गया। ग़ुस्साई भीड़ ने हत्या के आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार की दुकान में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। अश्विनी कुमार का घर प्रशासन ने बुलडोजर से ढहा दिया। प्रशासन ने इसे अवैध निर्माण के ख़िलाफ़ कार्रवाई बताया है। इलाक़े में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के कारण तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस बीच आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया गया है।
अश्विनी कुमार पर आरोप है कि उसने अपने मेडिकल स्टोर पर कथित तौर पर ड्रग्स की बिक्री को लेकर हुए विवाद के दौरान परविंदर झोटा को गोली मार दी थी। पुलिस ने आरोपी को बुधवार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। इस घटना ने पंजाब में नशे के कारोबार और क़ानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद तेज़ कर दिया है। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल समेत विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, आप ने हत्या की निंदा करते हुए दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

क्या है पूरा मामला?

परविंदर सिंह झोटा पंजाब में नशे के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले एक्टिविस्ट के रूप में जाने जाते थे। वह नशे के दुरुपयोग और मेडिकल स्टोरों पर कथित तौर पर ड्रग्स की अवैध बिक्री के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे थे।
ताज़ा ख़बरें
घटना वाले दिन झोटा अपने कुछ समर्थकों के साथ मानसा में अश्विनी कुमार के मेडिकल स्टोर पर पहुँचे थे। बताया गया है कि उन्होंने एक व्यक्ति को कुछ ड्रग्स बेचे जाने को लेकर स्टोर संचालक से सवाल किया। इसी बात पर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया। विवाद के दौरान हुई बातचीत का वीडियो भी सामने आया है। करीब पांच मिनट 49 सेकंड के इस वीडियो में झोटा को यह कहते सुना जा सकता है कि मेडिकल स्टोर संचालक ने पिस्तौल निकाल ली है। वीडियो में झोटा कथित तौर पर आरोपी को गोली चलाने की चुनौती देते हुए भी सुनाई देते हैं। 
एक अन्य वीडियो में अश्विनी कुमार को हथियार लेकर दुकान से बाहर निकलते और भाग रहे झोटा का पीछा करते हुए देखा गया। बाद में झोटा पास की एक दुकान में खून से लथपथ हालत में मिले। पुलिस के मुताबिक़ उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के वीडियो सामने आने के बाद इलाक़े में ग़ुस्सा बढ़ गया।

राजस्थान से गिरफ्तार हुआ आरोपी

पुलिस ने हत्या के आरोपी अश्विनी कुमार को बुधवार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। उस पर आरोप है कि उसने मेडिकल स्टोर पर हुए विवाद के दौरान झोटा को गोली मारी थी। हत्या के बाद आरोपी की दुकान और घर को लेकर भी घटनाक्रम तेजी से बदला। मानसा में गुस्साई भीड़ ने उसकी दुकान में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। इसके बाद प्रशासन ने आरोपी के घर को बुलडोजर से ढहा दिया।
मानसा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव चौधरी ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि पुलिस क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौक़े पर मौजूद थी। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही थी और पुलिस को इसकी सूचना मिली थी। एसएसपी के मुताबिक़ प्रशासन को निर्माण में कथित अवैधता से जुड़ी जानकारी मिली थी और उसी संबंध में कार्रवाई की जा रही थी।

आरोपी की दुकान में भीड़ ने लगाई आग

परविंदर झोटा की हत्या के बाद मानसा में ग़ुस्सा इतना बढ़ा कि भीड़ ने आरोपी के मेडिकल स्टोर को निशाना बनाया। दुकान में तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी गई। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस और प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी। अधिकारियों के सामने एक तरफ़ हत्या की जांच और आरोपी के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की ज़िम्मेदारी है तो दूसरी तरफ हिंसा और किसी तरह की नई अप्रिय घटना को रोकने की चुनौती भी है।

हत्या के बाद लोगों में नाराज़गी की वजह झोटा का नशे के ख़िलाफ़ सक्रिय रहना भी बताई जा रही है। उनके समर्थकों और स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर ग़ुस्सा है।

'नशे के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले ही सुरक्षित नहीं': विपक्ष

परविंदर झोटा की हत्या के बाद पंजाब की AAP सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है और नशे के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले लोगों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही।

कांग्रेस ने भगवंत मान सरकार को घेरा

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने झोटा की हत्या की निंदा की। उन्होंने इसे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सरकार की नाकामी से जोड़ते हुए सवाल उठाए। वडिंग ने कहा कि झोटा पंजाब में नशे की समस्या के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे थे, लेकिन उन्हें सरकार से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। उन्होंने दिनदहाड़े हुई हत्या को राज्य प्रशासन की गंभीर विफलता बताया।
पंजाब से और खबरें
कांग्रेस नेता ने सरकार के नशा विरोधी अभियान 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि अगर नशे के ख़िलाफ़ काम करने वाले लोगों को ही सुरक्षा नहीं मिलती, तो सरकार के अभियान की सफलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सुखबीर बादल ने अभियान को बताया 'दिखावा'

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी हत्या पर दुख और नाराज़गी जताई। उन्होंने पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए आप सरकार के नशा विरोधी अभियान को 'दिखावा' बताया। बादल ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य में नशे की समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं कर पा रही है। अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नशे के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।

परविंदर झोटा

बीजेपी ने भी सरकार पर हमला बोला पंजाब बीजेपी प्रमुख केवल सिंह ढिल्लों ने भी हत्या को लेकर आप सरकार की आलोचना की। उन्होंने राज्य की स्थिति को 'जंगलराज' बताते हुए सरकार पर निशाना साधा। इस तरह झोटा की हत्या ने पंजाब में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज़ कर दिया है।

आप ने की हत्या की निंदा, सख़्त कार्रवाई का भरोसा

आप नेता बलतेज पन्नू ने परविंदर झोटा की हत्या की निंदा की और दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

'युद्ध नशेआं विरुद्ध' अभियान पर फिर सवाल

पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चिंता का विषय रही है। राज्य सरकार ने इसके ख़िलाफ़ 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य नशे के कारोबार और नशे की लत पर लगाम लगाना बताया गया है। लेकिन परविंदर झोटा की हत्या के बाद विपक्ष ने अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का तर्क है कि अगर नशे के ख़िलाफ़ सक्रिय लोग सुरक्षित नहीं हैं और कथित अवैध बिक्री को लेकर विवाद हिंसक हो रहे हैं, तो सरकार को अपनी रणनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर जवाब देना चाहिए।

हत्या की जांच के साथ कानून-व्यवस्था भी बड़ी चुनौती

परविंदर झोटा की हत्या के बाद मानसा में हुए घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े किए हैं। पहला सवाल यह है कि नशे के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले एक्टिविस्ट की सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्था थी। दूसरा सवाल यह है कि कथित अवैध दवा बिक्री को लेकर हुए विवाद की निष्पक्ष जांच किस तरह आगे बढ़ेगी। तीसरा सवाल यह है कि हत्या के बाद दुकान में आग लगाने और घर ढहाने जैसी घटनाओं के बीच प्रशासन कानून के शासन को कैसे सुनिश्चित करेगा।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें
आरोपी की गिरफ्तारी हत्या के मामले में एक अहम कदम है, लेकिन आगे की जांच, उपलब्ध वीडियो और दूसरे सबूतों की पड़ताल तथा अदालत में आरोपों की पुष्टि अहम होगी। इसी तरह, घर को ढहाने की कार्रवाई के कानूनी आधार और प्रक्रिया की जानकारी भी सार्वजनिक महत्व रखती है। प्रशासन ने कार्रवाई को कथित अवैध निर्माण से जुड़ा बताया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में इसके विस्तृत आधार का ब्योरा नहीं है।
परविंदर झोटा की हत्या ने पंजाब में नशे की समस्या, सरकार के अभियान और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब पुलिस जांच के नतीजों के साथ यह भी अहम होगा कि प्रशासन हिंसा पर रोक लगाए, कार्रवाई में कानून का पालन सुनिश्चित करे और नशे के ख़िलाफ़ काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए।