विदेश मंत्रालय में इमर्जेंसी मीटिंग शुरू होने जा रही है। कभी खुशी कभी ग़म का माहौल है। अफसरों के चेहरों से लग रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद से जो फ़ज़ीहत शुरू हुई थी उसके बाद अब जाकर उन्हें कुछ ऐसा हाथ लगा है जिससे वे राहत की साँस ले सकते हैं। वे गरमजोशी से एक दूसरे से हाथ मिला रहे हैं। आत्मविश्वास से भरी ऊँची आवाज़ में बातें कर रहे हैं।
विदेश मंत्री के कक्ष में प्रवेश करते ही सुई पटक सन्नाटा हो गया। सारे अफसर भक्ति-भाव से उनकी ओर मुख़ातिब हो गए। साल भर से झाड़ खा रहे अफ़सरों को लग रहा था कि आज तो उनकी पीठ ठोंकी जाएगी, उन्हें शाबाशी दी जाएगी।
विदेश सचिव ने विदेश मंत्री को ब्रीफिंग देना शुरू किया। सर, ये हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है। पूरी सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि हो सकती है।
विदेशमंत्री ने प्रश्नवाचक दृष्टि से उनकी ओर देखा।
ताज़ा ख़बरें
विदेश सचिव ने आगे बोलना शुरू किया- सर ये हमारे लिए गर्व की बात है। रूस के प्रेसीडेंट पुतिन का इंटरव्यू हमारे लिए टर्निंग पाइंट हो गया है सर। आप तो जानते ही हैं उस ऐतिहासिक इंटरव्यू के बाद रूस ने तेल के दामों में पांच डॉलर प्रति बैरल की छूट बढ़ा दी थी।
हाँ, हाँ, बिल्कुल। प्रधानमंत्री ने इसके लिए हमारे मंत्रालय को बधाई का संदेश भी भेजा था।
जी सर। मज़े की बात ये है कि अब बड़े-बड़े देशों से डिमांड आ रही है कि हमारे भी प्रेसीडेंट और प्राइम मिनिस्टर के ऐसे इंटरव्यू करवाइए।
गुड, वैरी गुड.....तो फिर परेशानी क्या है...
इसमें तो कोई परेशानी नहीं है सर। हमारे गोदी ऐंकरों की रेपुटेशन इतनी अच्छी है और वे ऐसे इंटरव्यू करने में इतने माहिर हैं कि ये काम तो हम सोते-सोते भी कर सकते हैं।
फिर समस्या कहाँ है....
समस्या ये है कि कई देश चाहते हैं कि उन्हें केवल इंटरव्यू ही नहीं, ऐसे ऐँकर भी चाहिए। वे उन्हें इंपोर्ट करना चाहते हैं और इसके लिए मुँहमांगी क़ीमत देने को तैयार हैं। हमारे ऐंकरों की ख्याति पूरे भूमंडल में गूँज रही है सर। तमाम देश उनके दीवाने हो गए हैं। जाने इन्होंने ऐसा क्या जादू किया है सब पर।

एक कनिष्ठ अधिकारी ने थोड़ा झिझकते हुए कहा- सर, दरअसल, हमारे ऐंकरों की ट्रेनिंग पिछले 12 सालों में बहुत अच्छी तरह से हुई है और ये उसी का परिणाम है। हमारे ऐंकरों का फोकस बहुत साफ़ रहता है। वे बड़े आत्मविश्वास से चापलूसी कर सकते हैं, झूठ बोल सकते हैं, प्रधानमंत्री की तारीफ़ निकलवा सकते हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने विदेश मंत्री को बताया कि वो इस्लामाबाद पर कब्ज़े और शाहबाज़ शरीफ़ के सरेंडर वाली ख़बर इन्होंने ही प्लांट करवाई थी। विदेश मंत्री ने उस अफसर की ओर प्रशंसा के भाव से देखते हुए कहा- गुड, कीप इट अप।
अधिकारी तारीफ़ से दोहरा हो गया....थैंक्यू सर, थैंक्यू सर....
लेकिन मुझे ये बताइए कि परेशानी कहाँ है.....ये तो अच्छा ही है। भारत का सॉफ्ट पॉवर बढ़ रहा है, वह विश्वगुरु बन रहा है, हम अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है तो चिंता किस बात की है....
सर एक्चुली में क्या है कि अब बहुत सारे देश मांग करने लगे हैं कि इंटरव्यू ही नहीं, हमें ऐसे ऐंकर भी चाहिए। वे भी हमारी तरह अपने देशों के मीडिया को मैनेज करना चाहते हैं।
अब देखिए ट्रम्प साहब ने तो बाकायदा ऐंकरों की सूची भेज दी है और कहा है कि ट्रेड डील में ये भी शामिल है। विदेश सचिव ने एक काग़ज़ विदेशमंत्री की ओर बढ़ाया।
काग़ज़ देखकर विदेश मंत्री ने कहा- अरे इसमें तो सारे प्राइम टाइम के ऐंकर हैं। इनको दे देंगे तो हमारा काम कैसे चलेगा...
विदेश सचिव- लेकिन सर, हम मना भी तो नहीं कर सकते। आप तो जानते ही हैं कि ट्रम्प पचास परसेंट टैरिफ ठोंक देगा।
विदेश मंत्री- हाँ ये तो ठीक है। ऐसा करो ये डिमांड पीएमओ भेज दो। प्रधानमंत्री को ही फ़ैसला करने दो।
जी सर, लेकिन समस्या यहीं ख़त्म नहीं हो रही। विदेश सचिव ने फ़ाइल आगे बढ़ाते हुए कहा कि इतने देशों ने डिमांड भेजी है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान....अकेले इस्राइल को ही 50 चाहिए। अब नेतन्याहू को तो मना नहीं कर सकेंगे न सर। प्रधानमंत्री के जिगरी यार हैं।
लेकिन इस्राइल को इतने ऐंकर क्यों चाहिए?
उसका कहना है कि मिसाइलों की संख्या सीमित होती है लेकिन नैरेटिव की लड़ाई चौबीस घंटे चलती है।
ठीक बात है।
लेकिन चीन ने कोई माँग नहीं भेजी?
क्यों?
सर, वह आत्मनिर्भरता में विश्वास करता है। उसने हमारे ऐंकरों के प्राइम टाइम शो का डेटा खरीद लिया है।
फिर?
कह रहा है कि छह महीने में ऐसा एआई मॉडल बना देगा जो एक साथ दस विरोधियों को देशद्रोही साबित कर सकेगा।
खतरनाक प्रतिस्पर्धा है। कल को हमारे ऐंकर ही बेरोज़गार हो जाएंगे।
विदेश सचिव ने रुमाल से पसीना पोंछा।
ठीक है..ठीक है....ये बताओ कुल कितने ऐंकरों की डिमांड है...
कम से कम 1000 ऐंकरों की ज़रूरत पड़ेगी सर।
अरे ये कोई इतनी बड़ी संख्या थोड़ी है जिसके लिए आपके माथे पर पसीना आ रहा है।
विदेश सचिव ने हड़बड़ाकर रुमाल निकाला और पसीना पोंछा।
विदेश मंत्री ने आगे कहा- हमारे देश में चार सौ न्यूज़ चैनल हैं। हर चैनल से तीन ऐंकर भी निकले तो काम हो जाएगा। सबसे पहले तो दूरदर्शन को देखिए। 50 तो आपको वहीं से मिल जाएंगे। राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल आपको दो-तीन सौ दे देंगे।  
ऐसा कीजिए कि ऐंकरों की सूची बनाइए और उनकी तीन कैटेगरी भी बना लीजिए। सर्वश्रेष्ठ गोदी ऐंकर, श्रेष्ठ गोदी ऐंकर और सामान्य गोदी ऐंकर। हम डील के हिसाब से ऐंकरों की सप्लाई करेंगे।
विदेश सचिव ने सुझाव दिया—"सर, श्रेणियों को थोड़ा वैज्ञानिक बना देते हैं।"
"कैसे?"
"ग्रेड ए प्लस—जो इंटरव्यू में कठिन सवाल पूछने का भ्रम पैदा कर सकें।"
"अच्छा।"
ग्रेड ए—जो बिना सवाल पूछे इंटरव्यू पूरा कर सकें।
बहुत बढ़िया।
और ग्रेड बी—जो केवल चिल्लाकर विपक्ष को दोषी साबित कर सकें।
उत्कृष्ट।
इसी बीच एक अधिकारी ने नई फाइल खोली- सर, गुणवत्ता नियंत्रण की भी समस्या है।
कैसी समस्या?
कुछ ऐंकरों में अभी भी पत्रकारिता के अंश पाए गए हैं।
कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।
विदेश मंत्री का चेहरा गंभीर हो गया। छोटे से मौन के बाद वे बोले- तुरंत उच्च स्तरीय समिति बनाइए। ऐसे दोषपूर्ण उत्पाद विदेश नहीं भेजे जा सकते।
जी सर।
आपने इन देशों से बात की है कि वे बदले में हमें क्या देंगे।
विदेश सचिव ने एक अफसर को इशारा किया। अफसर ने फाइल खोलकर पढ़ना शुरू किया- सर अमेरिका ने कहा है कि वह एप्स्टीन फाइल्स से भारत के मंत्रियों, नेताओं और कारोबारियों के नाम हटवा देगा। फ्रांस ने कहा है कि वह राफेल डील में स्पेशल छूट के रूप में किसी उद्योगपति को शामिल कर लेगा देगा। रूस ने कहा है कि वह पाँचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान सस्ते में दे देगा और पीएम के मित्र के साथ कोलेबोरेशन भी करेगा। मेलोनी ने कहा है...
ठीक है...ठीक है....पूरी फ़ाइल तैयार कीजिए और पीएमओ को भेज दीजिए। हमने होम वर्क कर दिया है। हमारा काम ख़त्म क्योंकि फैसले तो वहीं होंगे न।  
विदेश मंत्री उठने वाले थे कि एक अफसर ने विनती के स्वर में कहा- सरजी वो एक ऐंकरानी मास्टर से झगड़ रही है। और झगड़ क्या रही है, बड़े निचले स्तर की तू तू मैं मैं कर रही है। उन्हें मना करना चाहिए। इससे हमारे प्रोडक्ट की मार्केट इमेज ख़राब होती है। उन्हें इस तरह के पंगों से बचना चाहिए।
व्यंग्य/उलटबाँसी से और खबरें
हाँ, ये आपने सही पाइंट उठाया है। अगर हमको गोदी ऐंकरों की इंडस्ट्री को डेवलप करना है तो इन सब चीज़ों पर ध्यान देना होगा। पीएमओ में जोशी को बोल दीजिए वे देख लेंगे।
सर, उनकी तो कब की छुट्टी हो चुकी है।
अरे तो उनकी जगह जो हों उनको मैसेज भिजवा दीजिए।
उनके जाते ही कमरे में फिर हलचल शुरू हो गई।
एक युवा अधिकारी ने धीरे से पूछा—
"सर, अगर इतने ऐंकर विदेश चले गए तो देश में पत्रकार ही बचेंगे, जो ख़तरनाक़ साबित हो सकता है?"
विदेश सचिव मुस्कुराए- आप भी कैसी पुरानी बातें करते हैं- पत्रकार तो बहुत पहले ही समाप्त हो चुके हैं। अब केवल गोदी ऐंकर ही बचे हैं, उनसे क्या ख़तरा?