क़ानूनी वजह से एक्स पर खातों को ब्लॉक करने का एकाएक से सिलसिला तेज़ क्यों हो गया? क्या सरकार सोशल मीडिया की आलोचनाएँ भी नहीं झेल सकती? क्या भारत में डिजिटल इमरजेंसी जैसे हालात बन रहे हैं?
क्या मोदी सरकार ने आलोचना करने वाले एक्स खातों को एक के बाद एक बंद करना शुरू कर दिया है? आख़िर एक्स ने क़ानूनी वजहों का हवाला देते हुए कई खातों को हाल में क्यों रोक दिया? इस पर तब हंगामा मचा जब एक साथ उन पाँच-छह खातों को बंद कर दिया गया जो पैरोडी एकाउंट थे और सरकार की नीतियों की आलोचना करते थे।
इन पर कार्रवाई बुधवार से तेज हुई है। ऐसे खातों के पेज पर जाने पर भारत में लिखा आ रहा है 'withheld'। इन अकाउंट्स पर अब भारत से देखने पर मैसेज दिखता है- 'Account withheld in IN in response to a legal demand.' यानी कानूनी वजह से भारत में अकाउंट रोका गया है। ये अकाउंट्स भारत के बाहर नॉर्मल दिख रहे हैं। इसके साथ ही एक रिपोर्ट यह भी है कि फिलहाल आईटी मंत्रालय के पास ऐसी रोक लगाने का अधिकार है, लेकिन अब कई अन्य मंत्रालयों को भी यह अधिकार देने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा हो गया तो क्या ऐसी कार्रवाइयों की बाढ़ नहीं आ जाएगी? तो क्या यह 'डिजिटल इमरजेंसी' है? सोशल मीडिया पर तो कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया दी जा रही है।
सोशल मीडिया ने कैसे रिएक्ट किया, यह जानने से पहले यह जान लें कि आख़िर एक्स खातों पर किस तरह की कार्रवाई हुई है। सरकार की तरफ़ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि ये खाते क्यों रोके गए। लेकिन रिपोर्टों के अनुसार, ये कार्रवाई आईटी एक्ट की धारा 69 ए के तहत हुई है। इस धारा के तहत केंद्र सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऑर्डर दे सकती है कि अगर कोई कंटेंट देश की सुरक्षा, संप्रभुता, सार्वजनिक व्यवस्था या विदेशी संबंधों के लिए खतरा है तो उसे ब्लॉक कर दिया जाए। सरकार की ओर से ऐसा आदेश जॉइंट सेक्रेटरी रैंक से ऊपर का अधिकारी ही निकाल सकता है।
कौन-कौन से अकाउंट्स प्रभावित हुए?
हाल में जिन खातों पर सरकार ने कार्रवाई करवाई है उनमें पैरोडी, व्यंग्य और पत्रकार वाले खाते शामिल हैं। पैरोडी और व्यंग्य वाले पॉपुलर अकाउंट्स में @Nehr_who, @DrNimoYadav, @indian_armada, @DuckKiBaat, @mrjethwani_ , @Doc_RGM शामिल हैं। जर्नलिस्ट और एक्टिविस्ट @ActivistSandeep (संदीप सिंह) का खाता भी इसमें शामिल है।
ये खाते सरकार की नीतियों, अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों, विदेश नीति, एलपीजी संकट और प्रधानमंत्री पर व्यंग्य करते थे। मीम्स, कार्टून और क्रिटिकल पोस्ट्स से ये काफी फेमस थे।
कारवाँ मैगजीन के ट्वीट ब्लॉक
स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार कारवाँ मैगजीन के एडिटर हरतोष सिंह बाल ने बताया कि 14 मार्च का एक ट्वीट भी ब्लॉक हुआ। यह ट्वीट 2022 के उनके आर्टिकल को प्रमोट कर रहा था। इसमें इंडिया टुडे के अप्रैल 2002 के कवर का जिक्र था, जिसमें गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो थी और हेडलाइन थी 'Hero of Hatred'। कारवां को एक्स से ईमेल मिला कि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने धारा 69ए के तहत ब्लॉकिंग ऑर्डर दिया है।
4PM पर कार्रवाई
4PM न्यूज़ नेटवर्क पर भी कार्रवाई हुई है। इसने गुरुवार को एक्स पर पोस्ट कर कहा है, 'पहले नेशनल चैनल पर ताला जड़ा गया। फिर हमारी एंकर फ़िज़ा की इंस्टाग्राम रील से भी सरकार डर गई और उसे हटवा दिया गया। और अब हद देखिए, आज सुबह से 4 PM का फेसबुक भी बंद करा दिया गया। एक-एक करके हर प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया जा रहा है। सवाल ये है कि आखिर इतना डर किस बात का है। एक छोटे से वीडियो से, एक एंकर की आवाज़ से, या उस सच से जो जनता तक पहुंच रहा है। सरकार को लगता है कि चैनल बंद करा दोगे तो आवाज़ बंद हो जाएगी। सोशल मीडिया हटवा दोगे तो सवाल खत्म हो जाएंगे। लेकिन ये उनकी सबसे बड़ी भूल है। ये लड़ाई किसी एक प्लेटफॉर्म की नहीं है, ये लड़ाई सच और दबाव के बीच है। और इतिहास गवाह है—सच को जितना दबाया जाता है, वो उतनी ताकत से बाहर आता है।'इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन की प्रतिक्रिया
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन यानी आईएफएफ ने गुरुवार को बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम पर पोस्ट्स और अकाउंट्स को बिना ठोस वजह बताए रोका जा रहा है। ये ज्यादातर राजनीतिक, व्यंग्यात्मक या सरकार की आलोचना करने वाले हैं, जो स्पष्ट रूप से गैरकानूनी नहीं लगते। आईएफएफ ने इसे चिंताजनक बताया। इसने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शरेया सिंघल केस में धारा 69ए को वैध माना था, लेकिन लिखित वजह और चुनौती देने का रास्ता होना चाहिए। इसने कहा कि 'सीक्रेट सेंसरशिप इन सुरक्षा को खत्म कर रही है। प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ जनरल मैसेज नहीं भेजने चाहिए, बल्कि ठोस नोटिस, रिकॉर्ड रखना और ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट जारी करनी चाहिए।
'प्रतिबंधों की लहर'
रिपोर्टों के अनुसार टेक ग्लोबल इंस्टीट्यूट के प्रोग्राम हेड प्रतीक वाघरे ने कहा कि मार्च 2026 से अकाउंट लेवल पर प्रतिबंधों की नई लहर आई है। उन्होंने 42 से ज्यादा केस रिकॉर्ड किए हैं। पॉलिसी रिसर्चर प्रणेश प्रकाश की लिस्ट के अनुसार, गुरुवार तक कम से कम 316 एक्स अकाउंट्स भारत में कानूनी तौर पर ब्लॉक हैं।कांग्रेस का पीएम मोदी पर हमला
कांग्रेस नेता और सोशल मीडिया हेड सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स खातों पर ऐसी रोक को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'कंटेंट ब्लॉक किए जाने के बाद अब पूरा अकाउंट ही रोक दिया जा रहा है। ये कई अकाउंट्स अब भारत में नहीं दिख रहे। यह डरपोक प्रधानमंत्री की सरकार है।' उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की और कहा कि यह बहुत खतरनाक ट्रेंड है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार तय कर रही है कि क्या स्वीकार्य है और क्या नहीं।क्या यही लोकतंत्र है?
पॉलिटिकल कंटेंट क्रिएटर अर्पित शर्मा ने लिखा, 'इंस्टाग्राम रील्स और एक्स पोस्टें जो सरकार की आलोचना करते हैं, उन्हें भारत में रोका जा रहा है। क्या यही लोकतंत्र है?'ब्लॉक करवाने का अधिकार मंत्रालयों को देने पर विचार
एक रिपोर्ट के अनुसार 2024-2025 में सरकार ने एक्स से क़रीब 1400 पोस्ट्स या अकाउंट्स हटवाए थे। फिलहाल सिर्फ आईटी मंत्रालय यानी MeitY ही ऐसा कर सकता है। लेकिन अब रिपोर्टें हैं कि गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और सूचना व प्रसारण मंत्रालय को भी धारा 69ए के तहत ब्लॉकिंग ऑर्डर देने का अधिकार दिया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो क्या सोशल मीडिया पर यूज़र कुछ भी विरोध वाली बातें लिख पाएँगे?
यह मामला फ्री स्पीच और सेंसरशिप पर बड़ा बहस छेड़ रहा है। कई यूजर इसे 'डिजिटल इमरजेंसी' जैसा बता रहे हैं। आगे क्या होता है, यह देखना होगा कि क्या सरकार वजह बताएगी या और खाते भी प्रभावित होंगे।