तमिलनाडु में गठबंधन सरकार चला रही CM विजय की पार्टी टीवीके अकेले बहुमत से सरकार चलाने की कोशिश में है, ऐसा लगता है। बहुमत के लिए सहयोगियों के बिना 118 का जादुई आंकड़ा है। एआईएडीएमके से विधायकों के इस्तीफे के बाद 'ऑपरेशन एल' की चर्चा शुरू हो गई है।
तमिलनाडु में एआईएडीएमके को तब एक और बड़ा झटका लगा जब सोमवार को पार्टी के तीन विधायकों ने विधानसभा का इस्तीफा स्पीकर जेसीडी प्रभाकर को सौंप दिया। इन तीनों विधायकों ने इस्तीफा देने के तुरंत बाद टीवीके के मंत्री आदव अर्जुन से मुलाकात की और पार्टी में शामिल हो गए। टीवीके के प्रमुख और मुख्यमंत्री विजय को यह नया समर्थन मिला है। माना जा रहा है कि टीवीके अकेले दम पर बहुमत पाने की कोशिश में है। चर्चा है कि पार्टी के नेता 'ऑपरेशन एल' चला रहे हैं। 'ऑपरेशन एल' क्या है, यह जानने से पहले सोमवार को चले घटनाक्रमों को जान लें।
एआईएडीएमके से इस्तीफ़ा देने वाले विधायकों में मदुरांतकम सीट से जीते मारगथम कुमारवेल, धारापुरम सीट से सत्यभामा और पेरुंदुरै सीट से जयकुमार शामिल हैं। धारापुरम और पेरुंदुरै पश्चिम तमिलनाडु के कोंगु इलाके में एआईएडीएमके की पुरानी मजबूत सीटें मानी जाती हैं।
कैसे बढ़ा बगावत का सिलसिला?
यह घटना महज दो हफ्ते बाद हुई है जब एआईएडीएमके के 30 विधायकों ने वरिष्ठ नेता सीवी शणमुगम के नेतृत्व में विजय की टीवीके सरकार को समर्थन दिया था। ये तीनों विधायक भी उसी बागी गुट का हिस्सा थे। 13 मई को विधानसभा के फ्लोर टेस्ट के दौरान कुल 25 एआईएडीएमके विधायकों ने पार्टी के व्हिप की अनदेखी करते हुए टीवीके सरकार के पक्ष में वोट दिया था। इनमें ये तीनों भी शामिल थे। अकेले बहुमत पाने पर नज़र?
तमिलनाडु की राजनीति में नया बड़ा घमासान शुरू हो गया है। फिलहाल विजय की पार्टी टीवीके के पास 107 विधायक हैं। टीवीके अब गठबंधन पर निर्भर रहने के बजाय अकेले बहुमत यानी 118 सीटें हासिल करने की राह पर है। इस रणनीति को अंदरूनी तौर पर ‘ऑपरेशन L’ नाम दिया गया है। और सोमवार को एआईएडीएमके के तीन विधायकों का टीवीके में शामिल होने के तौर पर इस ऑपरेशन का पहला बड़ा प्रदर्शन हुआ।
‘ऑपरेशन L’ का मतलब क्या है?
इन विधायकों के इस्तीफ़ा दिए जाने के बाद राज्य में ‘ऑपरेशन L’ की चर्चा शुरू हो गई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एआईएडीएमके के एक पूर्व मंत्री ने मजाक में कहा, 'L का मतलब Lottery, Leema या Leave कुछ भी ले लो।' बता दें कि आदव अर्जुन लॉटरी कारोबारी सैंटियागो मार्टिन के दामाद हैं और मार्टिन की पत्नी लीमा रोज मार्टिन एआईएडीएमके की विधायक हैं। इससे भी जोड़ा जा रहा है कि एआईएडीएमके के चिह्न 'दो पते' यानी Leaves से एक एक कर पते झड़ रहे (Leaving) हैं।डीएमके नेता एमके स्टालिन ने इसे ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ बताया। एआईएडीएमके ने टीवीके पर खुलेआम ‘विधायकों को खरीदने’ का आरोप लगाया है।
एआईएडीएमके में अभी क्या है स्थिति?
हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी और उसे 108 सीटें मिलीं। बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से थोड़े कम होने पर विजय ने कांग्रेस, आईयूएमएल, वीसीके और वामपंथी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई। एआईएडीएमके को 47 सीटें मिली थीं। बाद में एआईएडीएमके के 30 बागी विधायकों ने भी सरकार को बाहर से समर्थन दे दिया। पहले बागी हुए पांच विधायक वापस पलानीस्वामी यानी ईपीएस के पास लौट आए हैं। अब ईपीएस के पास कुल 27 विधायक हो गए हैं। बागी गुट की ताकत 25 से घटकर अब 17 रह गई है।
बागियों में फूट
बागी गुट में अब फूट दिख रही है। वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि ने शुक्रवार को कहा कि वे पार्टी तोड़ने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने साफ कहा कि पलानीस्वामी ही उनका नेता हैं और पार्टी को पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की 'अम्मा राज' को वापस लाने के लिए काम करना चाहिए। वेलुमणि ने यह भी बताया कि न तो वे और न ही शणमुगम टीवीके सरकार में कोई पद चाहते थे। हाल ही में हुई मंत्रिपरिषद विस्तार में टीवीके ने बागी एआईएडीएमके विधायकों को कोई मंत्री पद नहीं दिया था। एआईएडीएमके पर क्या असर?
पार्टी पहले ही चुनाव हारने के बाद आंतरिक कलह से जूझ रही थी। अब तीन और विधायकों के जाना पार्टी के लिए नया संकट बन गया है। एआईएडीएमके अब विधानसभा में और कमजोर हो गई है। यह घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में तेज बदलाव दिखा रहा है। टीवीके सरकार को लगातार नए समर्थन मिल रहे हैं, जबकि एआईएडीएमके अपने बागियों को संभालने में मुश्किल का सामना कर रही है।
AIADMK में आगे क्या होगा?
बहरहाल, लीमा रोज मार्टिन के इस्तीफे की भी चर्चा हो रही है। अगर ऐसा हुआ तो AIADMK के ‘दो पत्तियां’ चिन्ह पर और गहरा असर पड़ेगा। तमिलनाडु की द्रविड़ियन राजनीति में दशकों से गठबंधन का खेल चला, लेकिन विजय की टीवीके ने इसे पूरी तरह बदल दिया है। अब सीट-दर-सीट, विधायक-दर-विधायक खेल चल रहा है।