डीएमके का आरोप है कि SIR के कारण मतदाताओं के नाम अंधाधुंध तरीके से हटाए गए हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर ग़रीब, अल्पसंख्यकों, प्रवासी मजदूरों और युवा मतदाताओं पर पड़ा है। एमके स्टालिन की अध्यक्षता में हुई बैठक में DMK ने ये प्रस्ताव पारित किए।
स्टालिन का चुनाव आयोग पर हमला
एम के स्टालिन की पार्टी डीएमके ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ अपना विरोध और तेज करते हुए चार प्रस्ताव पास किये हैं। पार्टी ने एसआईआर को पूरी तरह रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने और एसआईआर के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों का समर्थन करने की मांग की। डीएमके राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपकर चुनाव प्रक्रिया में सुधार की मांग करेगी। ये फ़ैसले डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अध्यक्षता में चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय में हुई सांसदों की बैठक में लिए गए। पार्टी का आरोप है कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची से बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इससे गरीबों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी मजदूरों और युवा मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ने की आशंका है।
डीएमके ने कहा है कि चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए मतदाता सूची की समीक्षा और मतदान प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। पार्टी अपने सांसदों के ज़रिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भी सौंपेगी।
डीएमके के चार प्रस्तावों में क्या है?
पार्टी की बैठक में पारित चार प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य SIR का विरोध करना और चुनाव प्रक्रिया में बदलाव की मांग करना है। डीएमके ने मांग की है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को तत्काल वापस लिया जाए और आगामी चुनाव SIR शुरू होने से पहले मौजूद मतदाता सूचियों के आधार पर कराए जाएँ। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके कामकाज की औपचारिक जांच कराने की मांग की है। डीएमके चाहती है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की जगह पारंपरिक कागजी मतपत्रों से चुनाव कराए जाएं। पार्टी ने देशभर में SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों और अन्य समूहों के साथ एकजुटता जताई है। इन प्रस्तावों के जरिए डीएमके ने साफ़ किया है कि वह SIR और मौजूदा मतदान प्रणाली को लेकर अपने विरोध को राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा मानती है।
वोटिंग राइट्स छीनने वाला SIR नहीं चाहिए: स्टालिन
एमके स्टालिन ने एक्स पर SIR के खिलाफ पार्टी के रुख को दोहराया। उन्होंने लिखा, 'मतदान का अधिकार छीनने वाला SIR नहीं चाहिए! हमें फिर से बैलेट पेपर प्रणाली चाहिए।' पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन का उद्देश्य वास्तविक मतदाताओं की पहचान और रिकॉर्ड में सुधार होना चाहिए, लेकिन इस प्रक्रिया में किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए।डीएमके के मुताबिक़ यदि किसी मतदाता का नाम हटाया जाता है तो इसके लिए साफ़ आधार, पर्याप्त जानकारी और सही प्रक्रिया होनी चाहिए।
DMK को आशंका है कि SIR के कारण ऐसे लोगों के नाम भी सूची से बाहर हो सकते हैं जो वास्तव में मतदान के पात्र हैं। इसका आरोप है कि SIR के दौरान पर्याप्त पूर्व सूचना और स्पष्ट मानदंडों के बिना मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसी आधार पर उसने SIR को पूरी तरह रद्द करने की मांग की है।
संसद के अंदर और बाहर विरोध किया: ए. राजा
DMK सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी SIR लागू होने के समय से ही इसके खिलाफ लगातार आवाज उठाती रही है। उन्होंने कहा कि DMK ने संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह इस प्रक्रिया का विरोध किया है और इससे जुड़े सवाल उठाए हैं। ए. राजा के मुताबिक, पार्टी ने SIR को लेकर अपने विरोध को लगातार जारी रखा है और अब चार प्रस्ताव पारित करके अपनी मांगों को औपचारिक रूप दिया है। डीएमके का कहना है कि मतदाता सूची की समीक्षा के नाम पर यदि पात्र नागरिकों के नाम हटते हैं तो यह केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है।
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग क्यों?
डीएमके के एक प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके आचरण की औपचारिक जांच कराने की मांग की गई है। पार्टी का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों के कथित विरोध के बावजूद SIR प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।स्टालिन और उनकी पार्टी पहले भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। DMK का तर्क है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह है।
'EVM की जगह बैलेट पेपर आए'
डीएमके ने अपने प्रस्तावों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर प्रणाली बहाल करने की मांग भी की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के भरोसे को मजबूत करने के लिए पारंपरिक कागजी मतपत्रों से मतदान की व्यवस्था वापस लाई जानी चाहिए। डीएमके ने ईवीएम और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों को इस मांग से जोड़ा है।बैलेट पेपर प्रणाली में मतदाता कागजी मतपत्र पर अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने निशान लगाता है। डीएमके का मानना है कि बैलेट पेपर प्रणाली बहाल करने से चुनावी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपेगी पार्टी
डीएमके ने फ़ैसला किया है कि उसके सांसद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को औपचारिक ज्ञापन सौंपेंगे। पार्टी इस ज्ञापन में मुख्य रूप से दो मांगें उठाएगी- SIR को पूरी तरह रद्द किया जाए और EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराया जाए। डीएमके का कहना है कि राष्ट्रपति के सामने ये मुद्दे रखकर मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की जाएगी।SIR के खिलाफ छात्र संगठनों को समर्थन
डीएमके ने देशभर में SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों और अन्य समूहों के समर्थन में भी प्रस्ताव पारित किया है। पार्टी ने इन प्रदर्शनों को मतदान के मौलिक अधिकार की रक्षा से जुड़ा आंदोलन बताया है। डीएमके का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में बदलाव या मतदाता सूची की समीक्षा के दौरान नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना ज़रूरी है। हाल के दिनों में SIR के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों में छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों की भागीदारी बढ़ी है। डीएमके का यह फ़ैसला इन आंदोलनों के प्रति पार्टी का समर्थन औपचारिक रूप से दर्ज करता है।
कांग्रेस के रुख पर भी DMK ने उठाए सवाल
बैठक में पारित एक प्रस्ताव में डीएमके ने कांग्रेस की आलोचना भी की। पार्टी ने आरोप लगाया कि SIR के मुद्दे पर कांग्रेस अलग-अलग राज्यों में अलग रुख अपनाती है। डीएमके का कहना है कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर SIR का विरोध करती है, लेकिन केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में उसका रुख अपेक्षाकृत संयमित रहा है। पार्टी ने इस कथित अंतर पर सवाल उठाया।इसके अलावा DMK ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम यानी TVK की भी आलोचना की। इसके मुताबिक, टीवीके ने हाल ही में इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की, जबकि इससे पहले उसकी ओर से पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
बहरहाल, डीएमके के चार प्रस्तावों के बाद अब राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया पर नज़र रहेगी। पार्टी की मांगों पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का क्या रुख रहता है यह भी अहम होगा। फ़िलहाल डीएमके ने अपने फ़ैसलों के ज़रिए एसआईआर, ईवीएम और चुनाव आयोग के नेतृत्व को लेकर अपना विरोध स्पष्ट कर दिया है। पार्टी इन मुद्दों को मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में जनता के भरोसे से जोड़ रही है। हालाँकि, एसआईआर को रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने या बैलेट पेपर प्रणाली बहाल करने की मांगों पर अंतिम फ़ैसला संबंधित संवैधानिक और क़ानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही हो सकता है।