तमिल सुपरस्टार थलापति विजय की फ़िल्म 'जन नायगन' पर सेंसर वाला विवाद बढ़ गया है। विजय राजनीति में कूदे हैं तो क्या उनकी फ़िल्म भी राजनीति का शिकार हो गयी? विजय ने पहले ही घोषणा कर दी है कि यह उनकी आख़िरी फिल्म होगी, लेकिन इसके रिलीज से पहले सेंसर बोर्ड की रोक लग गई। डीएमके ने तो फ़िल्म पर रोक का विरोध किया ही, राहुल गांधी ने भी इस रोक को तमिल संस्कृति पर हमला बताया।

दरअसल, लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने विजय की फिल्म 'जन नायगन' को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन यानी सीबीएफ़सी द्वारा फ़िल्म की रिलीज में देरी करना तमिल संस्कृति पर हमला है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी दी कि वे तमिल लोगों की आवाज को कभी दबा नहीं पाएंगे। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, "I&B मिनिस्ट्री का 'जन नायगन' को ब्लॉक करने की कोशिश तमिल संस्कृति पर हमला है। मोदी जी, आप तमिल लोगों की आवाज को दबाने में कभी सफल नहीं होंगे।"
यह पोस्ट ऐसे समय में आयी है जब राहुल गांधी तमिलनाडु के नीलगिरि जिले के गुडलूर में पोंगल उत्सव मनाने और एक स्कूल के गोल्डन जुबली समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।

फिल्म 'जन नायगन' की समस्या अब सिर्फ एक फिल्म विवाद नहीं रह गई है। यह विजय की आखिरी फिल्म है, जिसके बाद वे पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हो जाएंगे। फिल्म 9 जनवरी 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सीबीएफ़सी ने सर्टिफिकेट देने में देरी की। फिल्म को पहले U/A 16+ सर्टिफिकेट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ आपत्तियों के बाद इसे रिवाइजिंग कमिटी को भेज दिया गया। मद्रास हाई कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां एक जज ने सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया, लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने उसे स्टे कर दिया। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है और अगली सुनवाई 19 या 21 जनवरी को हो सकती है।
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स्टालिन भी फिल्म पर रोक के ख़िलाफ़

इस विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। पहले से ही कांग्रेस के कुछ नेता फिल्ममेकर्स का समर्थन कर रहे थे और कह रहे थे कि क्रिएटिव फ्रीडम पर रोक नहीं लगनी चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी कहा था कि फिल्मों को राजनीतिक दबाव में अनुचित तरीके से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। राहुल गांधी का यह बयान और भी मजबूत राजनीतिक संदेश देता है। वे इसे बीजेपी और आरएसएस द्वारा राष्ट्रीय संस्थाओं पर दबाव का हिस्सा बता रहे हैं।

कांग्रेस के अंदर अब तमिलनाडु की रणनीति पर नई चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि विजय की पार्टी टीवीके के साथ समझौते या गठबंधन की संभावना तलाशनी चाहिए। 

विजय की युवाओं और पहली बार वोट देने वालों में बहुत लोकप्रियता है। कुछ कांग्रेस समर्थकों में ऐसी चर्चा है कि अगर राहुल गांधी और विजय साथ मिलकर कैंपेन चलाएं, तो जमीन पर माहौल बदल सकता है।

लेकिन कांग्रेस में सभी इस विचार से सहमत नहीं हैं। कई वरिष्ठ नेता कहते हैं कि डीएमके के साथ पुराना गठबंधन मजबूत है, जिससे पार्टी को सालों से स्थिरता, महत्व और फायदा मिला है। नई पार्टी के साथ प्रयोग जोखिम भरा हो सकता है। वे कहते हैं कि मौजूदा स्थिति का फायदा उठाकर डीएमके गठबंधन में कांग्रेस को बेहतर जगह और मजबूत भूमिका मिल सकती है।

फिल्म में क्या है?

'जन नायगन' एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर फ़िल्म है, जिसका मतलब है 'जनता का नायक'। फ़िल्म को एच. विनोथ ने निर्देशित किया है और केवीएन प्रोडक्शंस ने बनाया है। इसमें विजय मुख्य भूमिका में हैं, साथ में पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, ममिता बैजू, गौतम वासुदेव मेनन, प्रकाश राज, नारायण और प्रियामणि जैसे सितारे हैं। फ़िल्म की कहानी गरीबों और आम लोगों के लिए लड़ने वाले एक नायक की है, जो भ्रष्टाचार और सिस्टम के ख़िलाफ़ खड़ा होता है। ट्रेलर में विजय का किरदार भविष्य के मुख्यमंत्री जैसा दिखाया गया है और इसमें 'टीवीके' जैसे संकेत हैं, जो विजय की राजनीतिक पार्टी यानी टीवीके से मिलते हैं। फ़िल्म में मछुआरों की मदद करना, भ्रष्ट सिस्टम से लड़ना जैसे सीन हैं, जो विजय की असली राजनीतिक छवि से जुड़ते नज़र आते हैं। विजय ने 2024 में टीवीके पार्टी लॉन्च की थी और कहा था कि यह उनकी आखिरी फिल्म होगी। अब वे 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। फिल्म को भारत और विदेशों में 5000 से ज़्यादा सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना थी।
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सेंसर बोर्ड का विवाद कैसे शुरू हुआ?

फ़िल्म की रिलीज से ठीक पहले सीबीएफ़सी ने सर्टिफिकेट देने में देरी कर दी। बोर्ड का कहना है कि फिल्म में सशस्त्र बलों से जुड़े आर्मी एम्ब्लेम जैसे प्रतीक इस्तेमाल किए गए हैं, जिनकी जाँच विशेषज्ञों से करानी ज़रूरी है। इसके अलावा, कुछ लोगों ने शिकायत की कि फिल्म के कुछ हिस्सों से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। फिल्म के निर्माताओं का कहना है कि वे हर संभव कोशिश कर चुके हैं, लेकिन बोर्ड ने जानबूझकर अड़ंगा लगाया। फिल्म की मूल रिलीज अक्टूबर 2025 में तय थी, लेकिन प्रोडक्शन पूरा होने में समय लगा, इसलिए रिलीज जनवरी में शिफ्ट की गई। अब सेंसर विवाद ने इसे और आगे खिसका दिया है।

कानूनी लड़ाई कहाँ तक पहुँची?

निर्माताओं ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। सिंगल जज ने सीबीएफसी को 'यू/ए' सर्टिफिकेट तुरंत जारी करने का आदेश दिया। लेकिन बड़ी बेंच ने इस आदेश पर स्टे लगा दिया और सुनवाई 21 जनवरी तक टाल दी। अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हो चुकी है और सुनवाई पोंगल के आसपास हो सकती है।