नालसार यूनिवर्सिटी के छात्रों ने जंतर मंतर पर नीट प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई पर सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणियों का हवाला देते हुए उन्हें दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया है और चिट्ठी लिखी है।
भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत
नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च यानी नालसार के छात्रों के एक समूह ने सीजेआई सूर्यकांत को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में संभावित रूप से मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस फ़ैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि हाल ही में जंतर-मंतर पर नीट से जुड़े प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की टिप्पणियों से वे असहमत हैं। छात्रों ने इन टिप्पणियों को अपने संवैधानिक और क़ानूनी मूल्यों के अनुरूप नहीं माना है।
हालाँकि, विश्वविद्यालय ने अभी तक दीक्षांत समारोह की तारीख़ आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की है और न ही सीजेआई सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने की औपचारिक पुष्टि की है। इसके बावजूद छात्रों का कहना है कि NALSAR में लंबे समय से भारत के मुख्य न्यायाधीश को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाने की परंपरा रही है।
छात्रों ने कुलपति और प्रशासन को भेजी चिट्ठी
विरोध की शुरुआत 2026 बैच के कुछ छात्रों की ओर से हुई। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार 23 जुलाई को छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार, शिक्षकों और प्रशासन को एक पत्र भेजा। इसमें छात्रों ने सीजेआई सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने के फ़ैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। छात्रों के मुताबिक़ शुरुआती पत्र को क़रीब 70 छात्रों का समर्थन मिला। इसमें स्टूडेंट्स बार काउंसिल से जुड़े छात्र भी शामिल थे। बाद में यह विरोध दूसरे बैचों तक भी पहुंचा। रिपोर्ट में छात्रों के हवाले से कहा गया है कि 25 जुलाई तक 2027, 2028, 2029, 2030 और 2031 बैच के छात्रों ने भी इस मांग का समर्थन किया। इन बैचों से करीब 380 छात्रों ने समर्थन दिया।छात्रों के पत्र में क्या लिखा गया है?
छात्रों ने इस मामले में पत्र विश्वविद्यालय प्रशासन को भेजा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार इसमें लिखा है, '2025-2026 के हम ग्रेजुएट हो रहे बैच के छात्र कन्वोकेशन के मुख्य अतिथि के तौर पर माननीय सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को बुलाने को लेकर चिंतित हैं।' इसमें आगे कहा गया, "युवाओं को 'कॉकरोच' कहने से लेकर पुलिस की बर्बरता के वीडियो देखने का समय न होने जैसी असंवेदनशील बातें कहने तक, सीजेआई ने हम जैसे छात्रों के प्रति उदासीनता दिखाई है। ऐसे व्यक्ति को हमारे कॉलेज में बुलाना, जो हमें ऐसी डिग्रियां सौंपेंगे जिनका इतना ज़्यादा एकेडमिक और भावनात्मक महत्व है, हमें सही नहीं लगता।"
जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर क्या है विवाद?
छात्रों का यह विरोध हाल में जंतर-मंतर पर हुए नीट से जुड़े प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के आरोपों से जुड़ा है। 20 जुलाई को NALSAR के कई छात्रों ने प्रदर्शनकारियों और शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों के समर्थन में एक समय का भोजन छोड़कर अपनी एकजुटता जताई थी। छात्रों ने शिक्षा सुधार से जुड़े कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में भी आवाज उठाई, जो जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर थे।प्रदर्शन के दो दिन बाद सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में कार्रवाई शुरू करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान सीजेआई की कुछ टिप्पणियां बाद में काफ़ी चर्चा में आईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा था, 'हम वीडियो में रुचि नहीं रखते। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।' एक अन्य टिप्पणी में उन्होंने कहा था, 'हमारा समय बर्बाद मत कीजिए और अपना समय भी बर्बाद मत कीजिए।' छात्रों ने इन्हीं टिप्पणियों को अपने विरोध का प्रमुख आधार बनाया है।
छात्रों ने संवैधानिक मूल्यों का दिया हवाला
छात्रों का कहना है कि उनकी आपत्ति किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह कानूनी शिक्षा और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा सवाल है। छात्रों ने अपने ख़त में कहा कि NALSAR में उन्हें कानून, संविधान, मौलिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में पढ़ाया जाता है। ऐसे में यदि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादती से जुड़े आरोपों को लेकर अदालत में हुई सुनवाई में असंवेदनशीलता दिखाई देती है तो उससे वे असहज महसूस करते हैं।छात्रों का तर्क है कि ऐसे व्यक्ति से डिग्री लेना, जिनके हालिया आचरण को उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के आरोपों के प्रति उपेक्षापूर्ण माना है, उनके लिए अपने कानूनी और संवैधानिक मूल्यों के साथ सहज महसूस करना मुश्किल है।
छात्रों के अनुसार, 8 अगस्त तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके ख़त पर कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया था। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने अभी तक यह भी साफ़ नहीं किया है कि दीक्षांत समारोह कब आयोजित होगा और क्या सीजेआई सूर्यकांत उसमें शामिल होंगे। इस मामले में विश्वविद्यालय की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
दीक्षांत समारोह को लेकर असमंजस
विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर द हिंदू से कहा कि अगस्त में दीक्षांत समारोह होना अब मुश्किल लग रहा है। इसकी एक वजह यह भी बताई गई कि अगस्त के दूसरे हिस्से में कुछ बैचों की मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं होनी हैं। इस विवाद का असर दीक्षांत समारोह की तैयारियों पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। छात्रों के अनुसार, पहले उम्मीद थी कि दीक्षांत समारोह अगस्त में आयोजित किया जाएगा। लेकिन अब तक कार्यक्रम की तैयारियाँ शुरू नहीं हुई हैं।जूनियर बैच के छात्रों की ओर से कार्यक्रम में स्वयंसेवा और अन्य व्यवस्थाओं के लिए मदद की उम्मीद रहती है, लेकिन इस दिशा में भी अभी तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया है। 2026 बैच के कुछ छात्र विदेशों में नौकरी भी शुरू कर चुके हैं। ऐसे में कार्यक्रम की तारीख स्पष्ट नहीं होने से उनके सामने यात्रा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी परेशानी पैदा हो रही है।
विश्वविद्यालय के भीतर मतभेद की स्थिति
छात्रों की ओर से यह भी कहा गया है कि प्रशासन ने उनकी चिट्ठी को देखा और उनकी चिंताओं को समझा है, लेकिन अभी तक इस फैसले पर पुनर्विचार के संकेत नहीं मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि छात्रों के ख़त को संबंधित लोगों ने समझा है, लेकिन मुख्य अतिथि के फैसले पर पुनर्विचार की संभावना फिलहाल कम है।
छात्र आगे भी जारी रखेंगे विरोध
छात्रों ने कहा है कि वे विश्वविद्यालय से औपचारिक जवाब की मांग जारी रखेंगे। उनका कहना है कि यदि उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे प्रशासन को क़रीब एक सप्ताह का नोटिस देकर विरोध प्रदर्शन करने पर विचार करेंगे।