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14 की उम्र में गैंगरेप, बेटे की ज़िद पर पीड़िता ने 27 साल बाद केस दर्ज कराया

रेप और गैंगरेप की पीड़ा कितनी अंतहीन होती है, सामाजिक कलंक गहरा होता है, वह यूपी के शाहजहाँपुर के एक मामले से पता चलता है। 14 साल की उम्र में किशोरी से गैंगरेप हुआ। पीड़िता 27 साल बाद अब केस दर्ज करा पाई हैं। 27 साल बाद क्यों? इस सवाल का जवाब शायद आपके शरीर में सिहरन पैदा कर दे! 

गैंगरेप के बाद एक बच्चा जन्मा था। पीड़िता सामाजिक कलंक से बचना चाहती थीं। वह सामाजिक कलंक जो गैंगरेप करने वालों पर लगना चाहिए। पीड़िता सबकुछ भूल जाना चाहती थीं इसलिए बच्चे को एक जानने वाले को गोद दे दिया। सामान्य ज़िंदगी जीने के लिए ख़ुद की शादी भी कर ली। भूलने की हर मुमकीन कोशिश की, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। 27 साल बाद भी वह पीड़ा झेल रही हैं। गैंगरेप का पता चलने पर पति ने छोड़ दिया। अब वह बच्चा अपने बायोलॉजिकल पिता को ढूँढते हुए अपनी माँ के पास पहुँच गया। बायोलॉजिकल पिता का पता लगाने के लिए ही महिला ने अब रिपोर्ट दर्ज कराई है। 

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अदालत के आदेश पर शाहजहाँपुर पुलिस ने दो दिन पहले ही दो भाइयों के ख़िलाफ़ क़रीब 27 साल पहले गैंगरेप करने के आरोप में केस दर्ज किया है। उस गैंगरेप के बाद पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया था। पीड़िता ने घटना के 27 साल बाद अब कोर्ट में याचिका लगाई थी। महिला ने याचिका में दो आरोपी भाइयों के डीएएन टेस्ट के लिए याचिका लगाई थी ताकि उनके बेटे के बायोलॉजिकल पिता का पता लगाया जा सके। सामाजिक कलंक के डर से तब महिला ने बच्चे को गोद दे दिया था। 

'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया है, 'पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनका सबसे पहला लड़का, जो अब बड़ा हो गया है, उनके पास आया। उन्हें आशंका है कि गोद लेने वाले परिवार ने उनके बारे में बताया होगा। पीड़िता ने कहा कि उनके बेटे ने बायोलॉजिकल पिता को लेकर दबाव डाला और इसलिए उन्होंने कोर्ट जाने का फ़ैसला किया जिससे डीएनए टेस्ट लिया जा सके और कथित यौन हमले में कार्रवाई हो सके।' 

रिपोर्ट के अनुसार, शहर के सर्कल अधिकारी प्रवीण कुमार यादव ने कहा, 'हमने दो भाइयों के ख़िलाफ़ गैंगरेप का मामला दर्ज किया है, जो एक व्यवसाय चलाते हैं। हम डीएनए परीक्षण की तैयारी कर रहे हैं।' 

पुलिस ने आरोपी की पहचान नकी हसन और गुड्डू के रूप में की है। उन्होंने कहा है कि शिकायतकर्ता ने कोई सटीक तारीख़ और महीना नहीं बताया है, लेकिन वारदात 1994-95 में हुई बताई गई है।

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार सदर बाज़ार पुलिस थाने के अशोक पाल सिंह ने महिला के हवाले से कहा कि तब वह अपनी बहन के घर पर आई थी और आरोपी 20 साल के थे। पहली बार उस पर हमला तब किया गया था जब वह कुछ काम से उनके घर गई थीं। बाद में दोनों ने तब गैंगरेप किया था जब उसकी बहन और जीजा दोनों काम से बाहर गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों को चुप रहने के लिए धमकाया गया था। 

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पुलिस के अनुसार उन्होंने घटना के बारे में किसी से कुछ नहीं कहा और कुछ दिन बाद ही उनका परिवार लखनऊ चला गया। वहीं पता चला कि पीड़िता गर्भवती हो गई थी और उसने अपनी बहन को बताया। महिला ने कहा कि आरोपियों ने उनकी बहन को भी धमकाया और इस कारण वे पुलिस के पास नहीं गए। 

14 साल की ही उम्र होने की वजह से डॉक्टरों ने गर्भपात करने से मना कर दिया। जब बच्चा जन्मा तो परिवार के जानने वालों ने ही गोद ले लिया।

अब चूँकि मामला पुलिस थाने में है तो जाँच के बाद ही इसकी सचाई पता चलेगी और पीड़िता को न्याय मिल पाएगा। न्याय मिल भी गया तो क्या उनकी अंतहीन पीड़ा कम हो पाएगी!

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