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बाबरी केस: सीबीआई ने कल्याण सिंह के ख़िलाफ़ समन जारी करने की मांग की

राज्यपाल पद पर कार्यकाल समाप्त होते ही बीजेपी के दिग्गज नेता कल्याण सिंह की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। सीबीआई ने एक अर्जी दाख़िल कर अदालत से उनके ख़िलाफ़ समन जारी करने की अनुमति मांगी है। बाबरी मसजिद विध्वंस मामले में अप्रैल, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्यगोपाल दास और उमा भारती के ख़िलाफ़ आपराधिक साजिश रचने के आरोपों में मुक़दमा चलाने का आदेश दिया था लेकिन कल्याण सिंह तब राजस्थान के राज्यपाल थे और उनके ख़िलाफ़ यह मुक़दमा नहीं चल सका था। आडवाणी, जोशी और अन्य नेता इस मामले में जमानत पर चल रहे हैं। 
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अदालत ने सीबीआई की अर्जी को स्वीकार कर लिया है। इससे पहले अदालत ने इस बात को सुनिश्चित किया कि कल्याण सिंह वर्तमान में किसी संवैधानिक पद पर तो नहीं हैं। बता दें कि इस मामले में हर दिन सुनवाई हो रही है और सीबीआई की इस अर्जी पर 11 सितंबर को सुनवाई हो सकती है। बता दें कि राज्यपाल पद पर कार्यकाल पूरा होने के बाद कल्याण सिंह एक बार फिर बीजेपी में शामिल हो गए हैं। 
फिर से बीजेपी की सदस्यता लेते कल्याण सिंह।

सुप्रीम कोर्ट ने तब अपने आदेश में कहा था कि संवैधानिक पद पर होने के कारण कल्याण सिंह के ख़िलाफ़ कोई मुक़दमा नहीं चलाया जा सकता। हालाँकि शीर्ष अदालत ने इस बात की अनुमति दी थी कि कल्याण सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सीबीआई उन्हें समन भेजने की कार्रवाई कर सकती है। 

1992 में जब अयोध्या में बाबरी मसजिद का विध्वंस हुआ था तब कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। कल्याण सिंह को सितंबर 2014 में राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।

उत्तर प्रदेश में 2022 में विधानसभा के चुनाव होने हैं और कल्याण सिंह पार्टी का मजबूत चेहरा रहे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी उनके सियासी अनुभव का लाभ ले सकती है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद मामले में हर दिन सुनवाई चल रही है और जल्द इस बारे में फ़ैसला आने की चर्चाएं हैं, ऐसे में कल्याण सिंह बड़ी भूमिका में नजर आ सकते हैं। 

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कल्याण सिंह की सरकार के दौरान सूचना और जनसंपर्क निदेशक के पद पर तैनात रहे अनिल स्वरूप ने अपनी किताब में कुछ समय पहले ख़ुलासा किया था कि सिंह बाबरी मसजिद गिराए जाने के ख़िलाफ़ थे। रिटायर्ड आईएएस अफ़सर अनिल स्वरूप की किताब ‘नॉट जस्ट अ सिविल सर्वेंट’ से यह बात सामने आई थी। अनिल स्वरूप मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेहद क़रीबी अफ़सरों में शामिल थे। 

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अनिल स्वरूप ने अपनी किताब में लिखा है कि कल्याण सिंह बाबरी मसजिद के गिरने से काफ़ी दुखी थे और उन्होंने अपने क़रीबी लोगों से इस बात का ज़िक्र भी किया था। अनिल स्वरूप ने किताब में लिखा है कि उस वक़्त कल्याण सिंह बड़ी शिद्दत के साथ राम मंदिर-बाबरी मसजिद विवाद का शांतिपूर्ण हल निकालने में जुटे हुए थे और बाबरी मसजिद का विध्वंस दूर-दूर तक उनके दिमाग़ में नहीं था। 

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