एसआईआर के तहत यूपी की मतदाता सूची से 2.89 करोड़ नाम उड़ा दिए गए। इससे भाजपा परेशान है। उसके शीर्ष नेताओं ने बैठक करके 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले 3.5 करोड़ से अधिक वास्तविक मतदाताओं को जोड़ने का लक्ष्य तय किया है।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से बीजेपी में चिंता की लहर दौड़ गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस मुद्दे पर तत्काल बैठक की और नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं।
उत्तर प्रदेश में कुल 12.55 करोड़ मतदाताओं की सूची में ड्राफ्ट सूची में 2.89 करोड़ नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का 18.70 प्रतिशत है। देशभर में सबसे अधिक नाम हटाने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। नाम हटाने के मुख्य कारणों में मतदाताओं का मृत घोषित होना, ट्रांसफर, अनुपस्थित होना या एक से अधिक जगहों पर रजिस्ट्रेशन शामिल हैं। राज्य में अब 1.77 लाख मतदान केंद्र हैं।
इस घटनाक्रम के कुछ घंटों बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने राज्य के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों के साथ वर्चुअल बैठक की। बैठक में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इसने बीजेपी में खतरे की घंटी बजा दी हैं, क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं।
हर बूथ पर कम से कम 200 नए मतदाता जोड़े जाएंगे
पार्टी ने इस स्थिति से निपटने के लिए हर मतदान बूथ पर कम से कम 200 नए मतदाताओं को जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। इससे राज्यभर में 3.5 करोड़ से अधिक वास्तविक मतदाताओं को जोड़ने का मकसद है। एक वरिष्ठ प्रदेश बीजेपी नेता ने कहा, “हर बूथ पर 200 मतदाताओं के लक्ष्य के अनुसार, पार्टी नेताओं को 3.5 करोड़ से अधिक वास्तविक मतदाताओं को पंजीकृत करने को कहा गया है। इनमें नए युवा मतदाता, दस्तावेजों की कमी या मतदाता सूची में गलती के कारण हटाए गए नाम और अनट्रेसेबल तथा अनमैप्ड मतदाता शामिल हैं।”
यह लक्ष्य राज्य में वर्तमान में लगभग 15.5 करोड़ पात्र मतदाताओं के अनुमान पर आधारित है। पार्टी कार्यकर्ताओं को अन्य राज्यों (जैसे दिल्ली) में काम करने वाले उत्तर प्रदेश के निवासियों से संपर्क कर उन्हें यूपी में पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया है, क्योंकि दिल्ली में अगले पांच वर्षों में विधानसभा चुनाव नहीं हैं।
इसके अलावा, दो जगहों पर पंजीकृत मतदाताओं (शहर और ग्रामीण पता) से अनुरोध किया जाएगा कि वे उस निर्वाचन क्षेत्र में अपना नाम बनाए रखें जहां वे आसानी से मतदान कर सकें। एक अन्य बीजेपी नेता ने कहा, “एसआईआर से संबंधित आशंकाओं के कारण अधिकांश ऐसे मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों में अपना वोट बनाए रखना पसंद करते हैं, लेकिन मतदान के दिन लंबी दूरी तय कर वोट डालने की संभावना कम है। इसलिए, हम उन्हें सुविधाजनक जगह पर पंजीकरण जारी रखने का अनुरोध करेंगे।”
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि 6 जनवरी से 6 फरवरी तक तय की है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को जारी की जाएगी। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है।
बीजेपी का यह कदम आगामी चुनावों में अपनी मतदाता आधार को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी ने विकसित भारत-जी राम जी एक्ट (मनरेगा का नया नाम) के लाभों के बारे में भी लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।
इस बीच, समाजवादी पार्टी (सपा) ने करीब 2.89 करोड़ नाम कटने की प्रक्रिया पर तीखा विरोध जताया है। पार्टी ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया है। सपा नेताओं का दावा है कि सत्तारूढ़ भाजपा ने अपने समर्थकों के नाम बचाए रखे, जबकि विपक्षी वोटरों, खासकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समुदाय के लोगों के नाम बड़े पैमाने पर हटाए गए। पार्टी ने प्रक्रिया में अनियमितताएं बताते हुए कहा कि पहले चार करोड़ नाम कटने की चर्चा थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर तीन करोड़ के करीब किया गया और जल्दबाजी में करीब एक करोड़ नाम जोड़े गए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
सपा ने इस मुद्दे पर आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है और जरूरत पड़ी तो अदालत जाने की चेतावनी दी है। पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल समेत कई नेताओं ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। सपा ने अपने पीडीए प्रहारियों को बूथ स्तर पर सक्रिय रखते हुए मतदाताओं के नाम बहाल कराने का अभियान तेज कर दिया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को निराधार बताकर खारिज किया है और दावे-आपत्ति की अवधि में सुधार का मौका होने की बात कही है।