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फ़ोटो क्रेडिट- @ranvijaylive

शामली: प्रशासन की ना के बाद भी हुई महापंचायत, बड़ी संख्या में जुटे लोग

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ शामली में आयोजित किसान महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। जिला प्रशासन की ओर से इस महापंचायत की अनुमति नहीं दी गई थी। इसे लेकर किसानों, महापंचायत के आयोजकों का प्रशासन के साथ टकराव भी हुआ। जिला प्रशासन ने 3 अप्रैल तक जिले में किसी भी बड़ी सभा को करने पर रोक लगा दी है। शामली जिले के भैंसवाल गांव में ये किसान महापंचायत आयोजित की गई।  

भारतीय किसान यूनियन, राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) और महापंचायत के आयोजकों ने कहा था कि वे हर हाल में कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ इस महापंचायत को आयोजित करेंगे। डीएम-एसएसपी के साथ ही पुलिस फोर्स भी इस दौरान मौक़े पर तैनात रही। 

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किसान महापंचायत की इजाजत न देने के पीछे जिला प्रशासन ने 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा का हवाला दिया। लेकिन कहा जा रहा है कि इसके पीछे कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रही महापंचायतों में उमड़ रही जबरदस्त भीड़ है और शायद इससे योगी सरकार डर गई है। 

किसान आंदोलन पर देखिए वीडियो- 

जयंत चौधरी खासे सक्रिय

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आरएलडी पूरा जोर लगा रही है। तमाम महापंचायतों में पूर्व सांसद और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी शिरकत कर रहे हैं। आरएलडी ने कहा है कि वह भारतीय किसान यूनियन के साथ मिलकर कृषि क़ानूनों के विरोध में उत्तर प्रदेश में 5 फ़रवरी से लेकर 18 फ़रवरी तक लगातार बैठकें करेगी। 

Kisan mahapanchayat in western up Shamli  - Satya Hindi
आरएलडी जानती है कि अपनी राजनीतिक ताक़त को वापस पाने का यह एक सुनहरा मौक़ा है। लेकिन अगर बाग़पत की तरह ही बाक़ी जिला प्रशासन भी महापंचायत की अनुमति नहीं देंगे तो हो सकता है कि किसान इसके ख़िलाफ़ लामबंद हो जाएं, जैसे वे राकेश टिकैत के भावुक भाषण के बाद हुए थे। 

जयंत के पिता चौधरी अजित सिंह का भी राजनीतिक आधार पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही रहा है और यहां जाट समुदाय इनके साथ खड़ा रहा है। हालांकि इस इलाके में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के बाद दोनों को हार का सामना करना पड़ा लेकिन किसान आंदोलन ने जाटों को आरएलडी के पक्ष में एकजुट किया है। 

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एकजुट हो रहा जाट समुदाय

इन महापंचायतों की वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय इकट्ठा हो रहा है। किसानों के सबसे बड़े नेता महेंद्र सिंह टिकैत यहीं से थे। चूंकि वह जाट समुदाय से आते थे, इसलिए जाटों की बड़ी आबादी उनके हुक्के की गुड़गुड़ाहट पर इकट्ठा हो जाती थी। उनकी विरासत को संभाल रहे उनके बेटे राकेश और नरेश टिकैत किसान आंदोलन में खासे सक्रिय हैं। इनमें भी राकेश टिकैत के पक्ष में जिस तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उबाल आया है, उससे साफ पता चलता है कि उनके भावुक होने का असर जाटों के बीच हुआ है। 

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क़मर वहीद नक़वी
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