नोएडा के मज़दूर 20 हज़ार से कम न्यूनतम वेतन पर तैयार नहीं। फिर भी सरकार ने समझौता कराया। लेकिन मंगलवार 14 अप्रैल को सेक्टर 80 में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात फिर बिगड़। पुलिस अब इस प्रदर्शन, हिंसा के पीछे कथित पाकिस्तानी लिंक तलाश रही है।
सैलरी के मुद्दे पर नोएडा के मज़दूरों का गुस्सा मंगलवार 14 अप्रैल को भी शांत नहीं हुआ। सेक्टर 80 में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन भड़क उठा। कम वेतन को लेकर प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों की पुलिस से झड़प हुई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया और इलाके को खाली करा लिया। मज़दूर कम से कम 20,000 रुपये मासिक वेतन की मांग कर रहे हैं। लेकिन पुलिस उनसे सरकार द्वारा बीती रात घोषित वेतन पर काम करने को कह रही है। पुलिस ने कहा कि उपद्रवी तत्वों ने स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की। पुलिस अब इस आंदोलन को पाकिस्तान से जोड़कर उस लिंक को तलाश रही है। नोएडा के कुछ चैनल कल से ही मजदूरों के आंदोलन को पाकिस्तान से जोड़ने में जुटे हुए हैं। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इसमें नक्सलियों की और श्रम मंत्री अनिल राजभर को पाकिस्तान का हाथ नज़र आ रहा।
मंगलवार के घटनाक्रम की शुरुआत सुबह आहूजा फैक्ट्री से हुई। सुबह, आहूजा कारखाने के श्रमिकों ने वेतन संबंधी मुद्दों को लेकर कारखाने के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। कई श्रमिकों ने हाल ही में हुई वेतन वृद्धि पर असंतोष व्यक्त किया और मांग की कि सरकार द्वारा घोषित वेतन दरें कारखाने के गेट पर प्रदर्शित की जाएं। मज़दूरों ने आरोप लगाया कि भत्तों में बढ़ोतरी से बचने के लिए कर्मचारियों को नौ महीने के भीतर ही बर्खास्त कर दिया जाता है और फिर से नियुक्त कर लिया जाता है। श्रमिकों ने बताया कि उन्हें शुरुआत में 90 रुपये प्रति घंटा का भुगतान किया जाता था, जो एक साल बाद घटकर 50 रुपये प्रति घंटा हो गया। श्रमिकों ने कहा कि कारखाना मालिकों ने यूपी सरकार के दबाव में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग मान तो ली है, लेकिन उसे लागू करने में अभी से आनाकानी कर रहे हैं।
20 हज़ार मांग रहे मज़दूर, सरकार 16-17 हज़ार से आगे बढ़ने को तैयार नहीं
नोएडा में हुई हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी श्रेणियों के श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि संशोधित दरें 1 अप्रैल से लागू हो गई हैं। हालांकि समझौता 13 अप्रैल को देर रात हुआ। गौतम बुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने कहा, "वेतन वृद्धि उच्चाधिकार समिति द्वारा की गई है। इस निर्णय को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कल देर रात मंजूरी दे दी।"
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों को अब 11,313 रुपये प्रति माह के बजाय 13,690 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि अर्ध-कुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये प्रति माह मिलेंगे। जबकि मज़दूर न्यूनतम मज़दूरी 20 हज़ार मांग रहे हैं। पुलिस के ज़रिए अब सरकार मज़दूरों पर दबाव बना रही है।
एक तरफ मज़दूरों से बातचीत, दूसरी तरफ एफआईआर, पाकिस्तानी लिंक की तलाश
नोएडा पुलिस ने बताया कि सोमवार की हिंसा के संबंध में तोड़फोड़ और आगजनी में शामिल 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनके खिलाफ सात एफआईआर दर्ज की गई हैं। अपुष्ट और निराधार अफवाहें फैलाने के आरोप में दो एक्स हैंडल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, 50 से अधिक एक्स हैंडल की पहचान की गई है, जिनमें से कई पिछले 24 घंटों में बनाए गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि एक विशेष कार्य बल (एसटीएफ) इन खातों के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच करेगा। पुलिस ने नागरिकों से केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने और अपुष्ट सामग्री प्रसारित न करने का आग्रह किया है।
शांति और संयम की अपील करते हुए, यूपी डीजीपी राजीव कृष्णा ने हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा कि दोषियों से मुआवजा वसूला जाएगा। उन्होंने जनता को आश्वासन दिया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, पर्याप्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
यूपी के सीएम योगी को नोएडा मज़दूर आंदोलन के पीछे नक्सली दिखाई दे रहे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चेतावनी दी कि ये विरोध प्रदर्शन नक्सलवाद को पुनर्जीवित करने के प्रयासों से जुड़े हो सकते हैं। लखनऊ में उच्च स्तरीय समीक्षा की अध्यक्षता करने के बाद उन्होंने कहा, “नक्सलवाद खत्म होने के कगार पर है, लेकिन इसे फिर जीवित करने के प्रयास एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकते हैं। कुछ प्रदर्शनों में भ्रामक और विघटनकारी तत्व शामिल हो सकते हैं।” मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केवल “वास्तविक श्रमिकों” को ही बातचीत में शामिल होने दिया जाना चाहिए, और आगाह किया कि बाहरी तत्व अक्सर श्रमिक प्रतिनिधियों के रूप में ऐसे आंदोलनों में घुसपैठ करते हैं। उन्होंने अधिकारियों को औद्योगिक क्षेत्रों में खुफिया नेटवर्क को मजबूत करने, कड़ी निगरानी रखने और अशांति फैलाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
यूपी के श्रम मंत्री को नोएडा हिंसा में पाकिस्तान का हाथ दिखाई दे रहा
उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने नोएडा में श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को "सुनियोजित साजिश" बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हाल ही में आतंकवाद से संबंधित गिरफ्तारियों के मद्देनजर अधिकारी पाकिस्तान से संभावित संबंध की भी जांच कर रहे हैं। पुलिस ने अब तक इस अशांति के संबंध में लगभग 350 लोगों को गिरफ्तार किया है। मंत्री ने कहा कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि घटना का उद्देश्य अस्थिरता पैदा करना हो सकता है। राजभर ने बताया कि हाल ही में नोएडा और मेरठ से चार आतंकी संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जिनका कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित संचालकों से संबंध है। नोएडा के कुछ चैनल कल से ही इस नज़रिए से सारे मामले को हवा दे रहे हैं। उन्हें ट्रेड यूनियनों के झंडे, उनके नेता नज़र नहीं आ रहे हैं।
राजभर ने सोमवार रात एक बयान में कहा, “ऐसा लगता है कि यह घटना राज्य के विकास और कानून व्यवस्था को बाधित करने के इरादे से अंजाम दी गई है। हाल के दिनों में मेरठ और नोएडा से चार संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके संबंध पाकिस्तान स्थित संचालकों से थे। ऐसे में राज्य में अस्थिरता पैदा करने की साजिश की संभावना और भी बढ़ जाती है। एजेंसियां पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं।”
कई तरह के आरोप लगा रहे हैं यूपी के श्रम मंत्री
मंत्री राजभर ने यह भी कहा कि यह अशांति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुजफ्फरनगर कार्यक्रम को बाधित करने के उद्देश्य से भी हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि "राष्ट्रविरोधी ताकतें" राज्य में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांत रहने और उकसावे या गलत सूचनाओं से प्रभावित न होने का आग्रह किया। राजभर ने कहा, "उन्हें किसी भी भ्रामक सूचना या उकसावे का शिकार नहीं होना चाहिए और शांति बनाए रखनी चाहिए। अराजकता और आक्रामक विरोध प्रदर्शन किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं। सरकार कार्यकर्ताओं की हर चिंता सुनने के लिए तैयार है।" मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारियों को नोएडा भेजा गया है और वे कार्यकर्ताओं से सीधे बातचीत कर उनकी शिकायतों का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासनिक और पुलिस कर्मी पहले से ही मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
नोएडा आंदोलन को लेकर राहुल गांधी का सरकार पर हमला
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने नोएडा के मज़दूर आंदोलन का मुद्दा मंगलवार को उठाया। राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा- कल (सोमवार) नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी - जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया। नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा देता है। तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज़ की गहराई में डुबा देती है- यही है “विकसित भारत” का सच। एक महिला मज़दूर ने कहा - “गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं।” इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 का भी सिलेंडर खरीदा होगा।
राहुल गांधी ने कहा- यह सिर्फ़ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ़ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं - पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है। मगर, अमेरिका के टैरिफ़ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन - इसका बोझ Modi जी के “मित्र” उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मज़दूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज़ खाता है। वो मज़दूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई - जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार। एक और ज़रूरी मुद्दा - मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाज़ी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया।
मैं मज़दूरों के साथ हूंः राहुल गांधी
नेता विपक्ष राहुल ने कहा- जो मज़दूर हर रोज़ 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फ़ीस क़र्ज़ लेकर भरता है - क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? और जो उसका हक़ हर रोज़ मार रहा है - वो “विकास” कर रहा है? नोएडा का मज़दूर ₹20,000 माँग रहा है। यह कोई लालच नहीं - यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है। मैं हर उस मज़दूर के साथ हूं - जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।