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प्रयागराज: पुलिस पर आरोप- सवर्णों को बचाने के लिए दलितों को फंसा रही

प्रयागराज के फाफामऊ थाना क्षेत्र में हुई दलित परिवार की हत्या के मामले में पुलिस ने गिरफ़्तार किए गए पवन सरोज नाम के युवक को हिरासत में भेज दिया है जबकि गिरफ़्तार किए गए सवर्ण समुदाय के आठ लोगों को रिहा कर दिया है। पुलिस ने सरोज के अलावा दलित समुदाय के दो और युवकों को हिरासत में लिया है।

इन युवकों के परिवार सोमवार को पुलिस थाने पहुंचे और अपने बच्चों को छोड़ने की मांग की। पुलिस का कहना है कि सुबूत न मिलने पर इन्हें रिहा कर दिया जाएगा। ये दोनों भी पवन सरोज के गांव में ही रहते हैं। 

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, पुलिस ने अभी तक पवन सरोज के ख़िलाफ़ उसके पास क्या सबूत हैं, इन्हें सामने नहीं रखा है। पुलिस ने कहा था कि पवन ने कुछ लोगों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया है। 

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इस मामले में पड़ोसी दबंग परिवार पर आरोप है कि उसने ज़मीन विवाद के मामले में रंजिश रखते हुए दलित परिवार के चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने मामले में हत्या और दुष्कर्म की धाराओं में 11 लोगों के ख़िलाफ़ नामजद मुक़दमा दर्ज किया था। 

घटना में फूलचंद्र (50 वर्ष) उसकी पत्नी मीनू (45 वर्ष), बेटी (17 वर्ष) और बेटे शिव (10 वर्ष) की हत्या हुई थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि लड़की नाबालिग नहीं थी। 

प्रयागराज जोन के एडीजी ने कहा था कि पवन सरोज मृतक परिवार की लड़की को मोबाइल पर मैसेज भेजकर उसे लगातार परेशान कर रहा था लेकिन लड़की उसे नज़रअंदाज कर रही थी। अंतिम मैसेज और सबूतों के आधार पर पवन सरोज की गिरफ़्तारी हुई है। 

मृतक परिवार के परिजनों का कहना है कि पुलिस सवर्ण समुदाय के लोगों को बचा रही है। उन्होंने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि 19 साल का लड़का कैसे एक परिवार के चार लोगों की हत्या कर सकता है और अगर बाकी लोग वारदात में शामिल थे तो वे कहां हैं और कौन हैं। 

मारे गए फूलचंद्र के भाई ने कहा कि अगर पवन सरोज को मारना होता तो वह सिर्फ़ लड़की को मारता न कि पूरे परिवार को। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। 

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पवन सरोज की बड़ी बहन का कहना है कि उसके भाई को दलित और ग़रीब होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घटना वाले दिन उसका भाई घर पर था। उन्होंने कहा कि पुलिस सवर्ण समुदाय के लोगों को बचाना चाहती है और इसलिए उसके भाई को बलि का बकरा बना रही है। 

घटना को लेकर जब हंगामा बढ़ा तो दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। विपक्षी दलों ने कहा है कि योगी सरकार में लगातार दलित समुदाय को लोगों की हत्या हो रही है और उनके ख़िलाफ़ अत्याचार चरम पर है।

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