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लखीमपुर में घटनास्थल पर आरोपी आशीष मिश्रा की मौजूदगी की तकनीकी रिपोर्ट कोर्ट पहुंची

लखीमपुर खीरी केस में पुलिस ने अपनी टेक्विकल रिपोर्ट के सबूत भी अदालत में जमा करा दिए हैं। पांच हजार पेजों की चार्जशीट वो पहले ही फाइल कर चुकी है। चार्जशीट में कई टेक्निकल रिपोर्ट का जिक्र किया गया था, लेकिन उनके सबूत अलग से जमा कराने होते हैं। सूत्रों ने बताया कि टेक्विकल रिपोर्ट में घटना वाली जगह के आसपास दो मोबाइल टावरों का जिक्र किया गया है। उन मोबाइल टावरों ने आरोपी आशीष मिश्रा उर्फ मोनू की लोकेशन हिंसा वाली जगह पर बताई है। आशीष केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी का बेटा है। केंद्रीय मंत्री टेनी ने घटना के बाद इस बात को बार-बार दोहराया था कि उनका बेटा घटनास्थल पर नहीं था। लेकिन टेक्निकल रिपोर्ट का सबूत आशीष के खिलाफ जा रहा है।
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टेक्निकल रिपोर्ट को तैयार करने में मौसम विभाग की मदद भी ली गई है। जिस दिन घटना हुई थी, उस दिन बारिश बहुत हुई थी। पुलिस ने घटनास्थल से मिट्टी के नमूने उठाए थे। बारिश की वजह से मौसम विभाग से भी सूचनाएं मांगी गई थीं। समझा जाता है कि आशीष जिस वाहन में सवार था, उसमें वहां की मिट्टी मिली है। उससे घटनास्थल की मिट्टी का मिलान किया गया है। यह महत्वपूर्ण साक्ष्य है। इसके बावजूद अजय मिश्रा इस दावे पर कायम हैं कि उनका पुत्र वहां नहीं था।इससे पहले जो चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी, सूत्रों ने उसमें भी आशीष मिश्रा के मौके पर मौजूद होने की बात कही थी। चार्जशीट में आशीष को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
एसआईटी ने अदालत में दाखिल रिपोर्ट में घटनास्थल पर आशीष की उपस्थिति की पुष्टि करने के लिए गवाहों के बयानों का हवाला दिया गया।

एसआईटी ने आरोपपत्र में स्वतंत्र गवाहों द्वारा घटना की 24 तस्वीरें, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो शूट की घटना के दिन की घटनाओं के क्रम को स्थापित करने के लिए शामिल किया था। इस घटना में चार किसानों और एक पत्रकार को कथित रूप से कुचल दिया गया था। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा और अन्य ने कार किसानों पर चढ़ा दी थी। लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा के दौरान कुल आठ लोग मारे गए थे। एक अधिकारी ने कहा कि 17 वैज्ञानिक साक्ष्य, जिसमें तीन हथियारों की बैलिस्टिक रिपोर्ट के साथ-साथ छूटी हुई गोलियों की फोरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से बरामद किए गए जले हुए वाहन भी शामिल थे, चार्जशीट में जिक्र किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपी की कॉल डिटेल रिपोर्ट और मोबाइल लोकेशन को भी चार्जशीट में सहायक साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया था।

“इसके अलावा, एसआईटी ने मौके पर आशीष मिश्रा और अन्य की उपस्थिति साबित करने के लिए 208 चश्मदीद गवाहों और गवाहों के बयान शामिल किए थे। इनमें से 90 से अधिक गवाहों के बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किए गए हैं ताकि वे बाद में अपने बयान से पीछे न हटें।


वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने कहा कि मामले में शुरुआती शिकायत में केवल आशीष मिश्रा और अज्ञात लोगों का नाम था। बाद की जांच के बाद, एसआईटी ने 13 आरोपियों को धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियारों से लैस दंगा), 149 (गैरकानूनी सभा), 307 (हत्या का प्रयास), 326 (स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना), 302 (हत्या) के तहत आरोप पत्र दायर किया। , 120B (आपराधिक साजिश), 427 (नुकसान पहुंचाना), 34 (सामान्य इरादे से किए गए कार्य) भारतीय दंड संहिता (IPC) और धारा 177 (जानबूझकर निर्देशों की अवहेलना करना) और मोटर वाहन अधिनियम की B177।

घटना के सिलसिले में जेल में बंद लोगों में आशीष मिश्रा, लखनऊ के एक व्यवसायी के रिश्तेदार अंकित दास, उनके सहयोगी नंदन सिंह बिष्ट, उनके निजी सुरक्षा गार्ड लतीफ उर्फ ​​काले और ड्राइवर शेखर भारती शामिल हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे मौजूद थे। मिश्रा के काफिले में तीन एसयूवी थी। आशीष मिश्रा के रिश्तेदार वीरेंद्र शुक्ला का नाम आईपीसी की धारा 201 (सबूत गायब होने) के तहत चार्जशीट में जोड़ा गया था और उन्हें 10 जनवरी को अदालत में बुलाया गया था।

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दो अन्य तलाश कर रही एसआईटी इस बीच, एसआईटी ने एक एसयूवी में सवार दो अज्ञात लोगों की तलाश जारी रखी है, जो घटना वाले दिन आशीष मिश्रा के काफिले का हिस्सा थे। एसआईटी के पास दंगल स्थल से तिकुनिया जाने के बाद उक्त घुड़सवार दल के दो सीसीटीवी फुटेज भी दर्ज हैं। मौके से निकलने के बाद रिकॉर्ड की गई पहली फुटेज में तीनों एसयूवी तिकुनिया की ओर बढ़ती नजर आ रही हैं। एक किलोमीटर आगे रिकॉर्ड किए गए एक अन्य फुटेज में, एसयूवी के किनारों पर करीब एक दर्जन आदमी लटके हुए दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों ने दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि अतिरिक्त पुरुषों को उनके साथ तिकुनिया जाने के लिए कहा गया था।बहरहाल, इतने सारे सबूतों के बावजूद केंद्रीय मंत्री टेनी प्रधानमंत्री मोदी के कैबिनेट की शोभा बढ़ा रहे हैं। बेशक उनका इस घटना से मतलब नहीं है लेकिन जिस तरह वो अपने आरोपी बेटे का बचाव करते रहे हैं, क्यों उन्हें इन सबूतों के बाद मंत्री बने रहना चाहिए?इस बीच पुलिस ने उन 12 किसानों को पूछताछ के लिए बुलाया है, जो उस दिन घटनास्थल पर मौजूद थे। हालांकि वे लोग पहले ही कह चुके थे कि उनका इस घटना से कोई मतलब नहीं है।

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